×

मूलनिवासी बहुजनों की सभी समस्याओं का समाधान जनआन्दोलन से ही सम्भव

Published On :    27 Apr 2018   By : MN Staff
शेयर करें:


-



‘‘एससी और एसटी को प्रमोशन में रिजर्वेशन देना और ओबीसी को प्रमोशन में आरक्षण ना देना ये दोनों के बीच झगड़ा लगाने का षड्यंत्र है।’’ इस महत्वपूर्ण षड्यंत्र के बारे में मैं मूलनिवासी बहुजन समाज को कुछ बताना चाहता हूँ।जिस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। 


संवैधानिक रूप से मूलनिवासी समाज में 2 ग्रुप हैं, एक एससी, एसटी और दूसरा ओबीसी है। इन दोनों में शासक वर्ग हमेशा झगड़ा लगाने का षड्यंत्र करता है। इस विषय पर मुझे एक कहानी याद आती है जो हम बचपन में सुना करते थे। आपने भी सुनी होगा कि किसी गांव में दो बिल्लियां थी। मान लीजिए कि एक तरफ एससी और एसटी नाम की बिल्ली है और दूसरी तरफ ओबीसी नामकी बिल्ली है। 


तो वे बिल्लियां अपने भोजन की तलाश में इधर-उधर जाती थी और आराम से अपना जीवन निर्वाह करती थी। एक बार ऐसा समय आया कि वह गांव में घूम रही थी और उन्हें केवल एक ही रोटी मिली। बिल्लियों के सामने समस्या खड़ी हो गयी कि रोटी तो एक ही है और खाने वाले दो हैं, तो वे दोनों बिल्लियां बड़ी मुश्किल में थी, एक चालाक बन्दर थोड़ी दूर से उन दोनों बिल्लियां को देख रहा था। 


उसने सोचा कि इस मौके का फायदा उठाना चाहिए, तो बन्दर उन दोनों बिल्लियां के पास गया और कहा कि हम आपकी रोटी का बंटवारा कर देते हैं मगर हमें थोड़ा कमीशन देना होगा। तो बिल्लियां यह बात सुनकर सहमत हो गयी। लेकिन बन्दर बहुत चालाक था। शायद वह ब्राह्मण का ही रूप था। उस बंन्दर ने रोटी का दो टुकड़ा बनाया। एक टुकड़ा छोटा और दूसरा थोड़ा बड़ा बनाया। 


दोनों टुकड़े को एक तराजू पर तौलने की कोशिश करने लगा। तराजू के पलड़े पर एक छोटा सा टुकड़ा रखा और एक तरफ थोड़ा बड़ा टुकड़ा रखने की वजह से बड़े टुकड़े का वजन ज्यादा होने से पलड़ा भारी हो गया। उसी समय बन्दर ने बिल्ली से कहा कि बिल्ली रानी बड़ा टुकड़ा होने की वजह से तौल सही नहीं हो रही है। क्या इस टुकड़ा से थोड़ा काट लूँ। इस तरह से कभी एक पलड़ा से रोटी को मुंह से काटता था, तो कभी दूसरे पलड़े से रोटी को मुंह से काटता चला गया। 


तरह से रोटी ही समाप्त हो गयी। अंत में बेचारी दोनों बिल्लियां भूखी ही रह गयी और उनको अपने आप पर बहुत पछतावा हुआ। अब ठीक से समझ आया होगा वर्तमान समय में ब्राह्मण नाम का दुश्मन बन्दर जैसी कहानी दोहरा रहा है।इस कहानी से दो निष्कर्ष निकलकर सामने आते है। पहली बात ऐसी है कि जब दो वर्गों में किसी बात को लेकर असमानता होती है, यानि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी के बीच प्रतिनिधित्व (आरक्षण) को लेकर असमानता होगी तो उसमें असंतोष पैदा होगा और उस असंतोष से ही झगड़ा होगा। 


दूसरा तथ्य यह है कि इस झगड़े का फायदा किसने उठाया। तो ये ब्राह्मण आजादी से पहले भी इस तरह का झगड़ा लगाकर फायदा उठाया करता था और 1947 में तथाकथित आजादी मिलने के बाद से अब तक फायदा उठा रहा है। कई बार समाज में हम जब काम करते हैं तो ओबीसी के लोग मिलते हैं और वे कहते हैं कि हम तो आजाद है। तो सवाल पूछते हैं किस तरह से आजाद हो? क्या 1947 से पहले भी तुम अपनी इच्छानुसार काम कर सकते थे और पढ़-लिख सकते थे। 


जिस तरह से आज पढ़-लिख रहे हो। संविधान बनने के बाद और अंग्रेजों के भारत से जाने के बाद भारत की सत्ता किसके हाथों में आयी, वो है ‘‘ब्राह्मण वर्ग’’ जो आज भी सत्ता पर काबिज है। अगर हम आजाद होते तो संसद में हमारा कब्जा होता। मगर हम आजाद नहीं हैं। इसलिए सत्ता पर हमारा कोई अधिकार नहीं है।26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद 1951 में बाबासाहब डा. अम्बेडकर के दबाव में काका कालेलकर कमीशन बनाया ‘‘काका कालेलकर आयोग’’ इसलिए बनाया गया कि ओबीसी को उनका आरक्षण मिलना चाहिए। 


अगर ओबीसी आजाद होता तो उसको अपना हिस्सा मिल जाना चाहिए था। लेकिन 1950 से लेकर 1990 तक यानि 40 साल के बाद भी ओबीसी को अपना हिस्सा नहीं मिला। ये बात साबित करती है कि ओबीसी आजाद नहीं है। अगर ओबीसी आजाद होता तो उसे अपना हिस्सा ले लेना चाहिए था और स्वयं निर्णय लेकर अपने लिए प्रमोशन में आरक्षण लागू करवा लेता। 


इस बात से साबित होता है कि ओबीसी भी आज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की तरह ही गुलाम और लाचार है क्यों है क्योंकि इस कमीशन को नेहरू ने संसद पटल पर रखी है। उसके बाद मण्डल कमीशन आया, तो ओबीसी को 52 प्रतिशत की जगह मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है। तो सवाल है क्या आजाद भारत में भी ओबीसी को आधी रोटी खाने के लिए मिलेगी। 


1947 के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को आरक्षण दे दिया गया, मगर ओबीसी को नहीं दिया गया। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण भी दे दिया गया, मगर ओबीसी को प्रमोशन में आरक्षण भी नहीं दिया गया। ऐसा इनमें झगड़ा लगाने के लिए इस तरह का षड्यंत्र एससी, एसटी और ओबीसी के साथ किया जा रहा है। 


इस जटिल समस्या का हल दोनों वर्गों के लोगों को आपस में एक होकर तथा एक विचारधारा के साथ आकर ही निकाल सकते हैं। इसलिए इन सभी लोगों को आपस में एक होना होगा और अपने हक के लिए लड़ाई लड़नी होगी भारत मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में संगठित होकर इस आन्दोलन के माध्यम से हम अपने हक एवं अधिकार ले सकते हैं। क्योंकि आज गुलामी सबसे बड़ी समस्या है। और आजादी सबसे बड़ा समाधान है।
संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
दिव्यांगों के कार्यक्रम में एक व्यक्ति पर भड़के भाजपा मंत
गुजरात में बुलेट ट्रेन योजना से प्रभावित एक हजार किसानों
होटेल कांड में दोषी पाए जाने के बाद मेजर गोगोई पर कार्रवा
पिछले साल भारत में हुई 8 लाख बच्चों की मौत, हर दो मिनट में ह
नोटबंदी के बाद, बड़े नेताओं की अध्यक्षता वाले सहकारी बैंक
तीन तलाक के विरोध में मोदी सरकार लाई अध्यादेश, 3 साल की सजा
मोहन भागवत ने कांग्रेस की तारीफ की, कहा- संघ के लिए कोई परा
तमिलनाडु : पेट्रोल महंगाई पर बीजेपी अध्यक्ष से सवाल किए ज
देहरादून : बोर्डिंग स्कूल में छात्रा से गैंगरेप, 1 माह तक छ
यूपी : बिना परीक्षा दिए ही सहायक अध्यापक के लिए चयनित हुए 16
तीन सरकरी बैंक; बैंक आफ बड़ौदा,देना बैंक और विजया बैंक का
भाजपा सांसद ने कार्यकर्ता से धुलवाया पैर, पीने दिया वह पा
संयुक्त राष्ट्र संघ के मानव विकास सूचक अंक में भारत 130वें
गुरुग्राम : ब्राह्मण संगठनों की पंचायत में फैसला- मुस्लि
तमिलनाडु में फिर तोड़ी ब्रह्मंवादियों ने पेरियार की मूर्
यूपी में राशन घोटाला : आधार कार्ड नंबर बदल करोड़ों रुपये क
प्रकाश अंबेडकर और ओवैसी का 2019 लोकसभा चुनाव के लिए होगा गठब
फिर हुई मॉब लिंचिग! एमबीए के मुस्लिम छात्र को भीड़ ने मार
लगातार बढ़ रही तेल की कीमतें, मुंबई में पेट्रोल 90 के करीब
तेलंगाना में ऑनर किलिंग : अंतरजातिय शादी करने पर एससी लड़क
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper