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कांग्रेस द्वारा बामसेफ की बोली क्यों?

Published On :    22 Mar 2018   By : MN Staff
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जैसे-जैसे मनु की औलादों और उनकी राजनैतिक पार्टियां की काली करतूते बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा एक्सपोज हो रही हैं वैसे वैसे देश के मूलनिवासी बहुजन समाज में इनकी सभी साजिशों का भांडा फूटता जा रहा है और मूलनिवासी समाज के सामने उनके असली दुश्मन की तस्वीर साफ होती जा रही है जिसका मूलनिवासी बहुजन समाज सदियों से इन्तजार कर रहा था। 


आज मूलनिवासी बहुजन समाज के दुश्मन को बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा ने देश के मूलनिवासी बहुजनों के सामने लाकर खड़ा कर दिया है यह बात लगातार पूरे देश में गूंज रही है जिसके माध्यम से आज देश के 32 राज्यों, 550 जिलों तथा 5000 तहसीलों में संगठन लगातार कार्यक्रम चल रहे हैं 


जिसमें मूलनिवासी बहुजन समाज के लाखों की संख्या में जुटने से दुश्मन लगातार एक्सपोज हो रहा है और देश में मनुवाद और उसका पोषण करने वाले लोगों का समर्थन लगातार घट रहा है जिसका असर अब सामने आ चुका है। 


देश में बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा के माध्यम से तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित मूलनिवासी महापुरूषों की ओजस्वी विचारधारा का उन लोगों तक पहुंचना जारी है जिन लोगों को विदेशी मुट्टी भर लोगों ने सभी मानवीय अधिकारों से हजारों साल से वंचित रखा, आज उन्हीं मूलनिवासी महापुरूषों के अथक संघर्ष और कुर्बानी का दस्तावेजी सबूत भारतीय संविधान है जिसके द्वारा भारत की शासन प्रणाली संचालित हो रही है जिसको बनाने वाला वही महापुरूष थे जिसने कराहती मानवता की वेदना सही ढंग से समझा। 


आज उसी संविधान की बदौलत ही हम अपने आने वाली पीढ़ियों को सम्पूर्णरूप से आजाद कराने का आन्दोलन चला पा रहे हैं। देश में यूरेशियन लोगों की सत्ता एवं व्यवस्था की असल सच्चाई सामने आने से शासक वर्ग भयाक्रान्त हो रहा है जिसके कारण शासक वर्ग एवं उनकी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं के स्वर बदल रहे हैं जिसका सबूत किसी से छिपा नहीं है। 


आज शासक वर्ग के अन्दर इस कदर से भय का वातावरण बन रहा है जो देश में बढ़ रहे बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के समर्थकों के सैलाब को देखकर शासक वर्ग को मजबूरी में अपना स्वर बदलना पड़ रहा है। उसी का नतीजा है कि यूरेशियनों की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस आज ईवीएम मामले में बामसेफ की भाषा बोलने को मजबूर हो रही है 


जिसमें उसका कहना है कि अगला यानि 2019 का लोकसभा चुनाव ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से होना चाहिए ऐसा स्वर सोनिया गांधी और उसका बेटा राहुल गांधी दोनों बोल रहे हैं। जिनके सुर में सुर मिलाते हुए यूरेशियन लोगों के दूसरे नम्बर की राजनैतिक पार्टी भाजपा को मजबूर होकर कांग्रेस का साथ देना पड़ रहा है जिसमें उसका कहना है कि यदि सभी पार्टियां सहमत हैं तो हम भी ऐसा ही करने को तैयार हैं। जो उनकी मजबूरी है। 


उनकी बातों के सवाल पर भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम का कहना है अगर कांग्रेस ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव करने का आन्दोलन यदि सड़कों पर उतर करती है तो हम पूरे देश में उसका साथ दे सकते हैं लेकिन हमें मालूम है। 


वो ऐसा करने वाली नहीं है। इसलिए हम देश के 15 लाख बूथों पर ईवीएम फोड़ने/तोड़ने का मामला पीछे लेने वाले नहीं हैं। अगर ईवीएम जैसे राक्षस को खत्म करने के लिए हमें शैतान की सहायता लेनी पड़े तो हम उसके लिए तैयार हैं बशर्ते कांग्रेस को ईवीएम खत्म करने के लिए सड़कों पर उतरकर आन्दोलन करना होगा। 


ईवीएम विरोधी बातें करने से काम चलने वाला नहीं है। जबकि कांग्रेस का इतिहास ही इस बात का गवाह है कि जिसने इस देश में लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए ईवीएम को भारत में स्थापित किया है वह इस ईवीएम को कभी खत्म कैसे कर सकती है? 


मूलनिवासी बहुजनों की जनजागृति से होने वाले खतरे को भांपते हुए ही आज शासक वर्ग बामसेफ की भाषा बोलने को मजबूर है और उनकी राजनैतिक पार्टियां भी बामसेफ की भाषा बोलकर मूलनिवासी बहुजन समाज के अन्दर पनप रहे गुस्से को शान्त करने का प्रयास कर रही हैं। 


इसके अलावा इनको कुछ भी नहीं करना है। क्योंकि मूलनिवासी बहुजनों को यह हमेशा ही ध्यान रखना होगा कि कांग्रेस और भाजपा और इनकी चाटुकारिता करने वाली सभी मनुवादी पार्टियां देश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं और जब वे देश की दुश्मन हैं तो वे 85 प्रतिशत मूलनिवासी बहुजन समाज की भी दुश्मन हैं जिनको सबक सिखाने का समय आ रहा है। 


यही वे पार्टियां हैं जो मूलनिवासी बहुजन की विकराल समस्याओं के लिए जिम्मेवार हैं जिन समस्याओं से देश का मूलनिवासी समाज जूझ रहा है। आज इस देश में शासक वर्ग का कोई भी ऐसा षड्यंत्र नहीं है जो मूलनिवासी बहुजन समाज (एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी) की परमानेण्ट गुलामी का कारण न बना रहा हो। वर्तमान समय में उसका मूलकारण ईवीएम है जो इन धोखेबाज भाजपा और कांग्रेस को निर्वाचन आयोग के सहयोग से सŸा में काबिज कर रही है। जिसको खत्म करके ही भारतीय लोकतंत्र की हत्या को रोका जा सकता है।

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