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सम्पूर्ण आजादी का लक्ष्य शक्ति निर्माण से ही सम्भव

Published On :    1 May 2018   By : MN Staff
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व्यवस्था परिवर्तन की पूर्वशर्त है जन-आन्दोलन खड़ा करना और जन-आन्दोलन किसे कहते हैं? एक उद्देश्य होता है और एक उद्देश्य से प्रेरित होकर करोड़ों लोग सड़क पर उतर जाते हैं। उसको जन-आन्दोलन कहते हैं। उद्देश्य एक होता है और उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए करोड़ों लोग सड़क पर उतर आते हैं, लोग उद्देश्य से पे्ररित होकर काम में लग जाते हैं, उस समय जो परिस्थिति पैदा होती है, तो आन्दोलन का माहौल खड़ा हो जाता है, उससे जन-आन्दोलन का माहौल खड़ा हो जाता है, उसको जन-आन्दोलन कहते हैं। 


आन्दोलन में या सड़क पर करोड़ों लोग कब उतरेंगे? जब करोड़ों लोगों का समर्थन हमारे साथ होगा, तब करोड़ों लोगों को उतारा जा सकता है। करोड़ों लोगों का समर्थन कैसे हासिल किया जाए? यह हमारे सामने मंथन और चिन्तन का विषय है। करोड़ों लोग हमको समर्थन कब देंगे? जब लोग इस विचारधारा से प्रेरित होंगे तभी वे हमारे संगठन के प्रभाव क्षेत्र में आयेंगे, तब वह हमको समर्थन दे सकते हैं।


एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनाॅरिटी के 85 प्रतिशत लोग हैं, मगर अभी वे इस विचारधारा से अलग हैं और हमारे संगठन के प्रभाव क्षेत्र से बाहर हैं। ये 85 प्रतिशत लोग हमारे हैं, मगर वे अभी हमारे समर्थन में नहीं हैैं। लोग हमारे हैं और समाज हमारा है, मगर वे हमारे समर्थन में नहीं हैं। जबकि उनके समर्थन के बगैर जन-आन्दोलन खड़ा होने वाला नहीं हे। इसलिए समाज के करोड़ों लोगों को संगठन की विचारधारा के प्रभाव क्षेत्र में लाना होगा और उसके लिए निरन्तर सम्पर्क और संवाद बनाए रखना होगा। जो विचारधारा का मैकनीजम है, यह उनके पास लगातार उपलब्ध करते रहना होगा, लगातार इसको सप्लाई करते रहना होगा।


लोगों को मोबिलाइज करने के लिए, मासेस को मोबिलाइज करने के लिए नियंत्रण करने के लिए, संचालित करने के लिए तथा मशीनरी के तौर पर, यंत्रणा के तौर पर, साधन के तौर पर संगठन के आवश्यकता होती है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे हमलोगों को समर्थन चाहिए। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में रहने वाले मासेस को अगर हमें संचालित करना है, इसको मोबिलाइज करना है, तो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हमारे संगठन का प्रभाव होना चाहिए। संगठन का प्रभाव बाद में होगा, पहले संगठन होना चाहिए। यह प्रेक्टिकल बात है। 


जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बामसेफ पहुुंच नहीं सकता, न पहुंचाया जा सकता है, उसकी एक मर्यादा है। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हमारा विचार और हमारे संगठन का प्रभाव बढ़ाने के लिए ही 100 आॅफसूट संगठन बनाए जा रहे हैं। इसलिए 100 आॅफसूट संगठन बनाना और उसका हम विस्तार करना क्यों चाहते हैं? क्योकि हम हम लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। जो मकसद हमने निर्धारित किया है और जिस मकसद को लेकर हम बामसेफ चला रहे हैं। उस आॅब्जेक्टिव को लेकर हम सफल होना चाहते हैं। कामयाब होना चाहते हैं। हम व्यवस्स्था परिवर्तन करना चाहते हैं। व्यवस्था परिवर्तन का आन्दोलन सफल करना चाहते हैं और जल्द से जल्द करना चाहते हैं। 


किसी भी देश में किसी भी समूह को अगर सफल होना है तो तीन चीज की आवश्यकता होती है। सबसे पहले हमको शक्ति की आवश्यकता है। आज हमंे शक्ति का निर्माण करना होगा। शक्ति से प्रभाव निर्माण होगा और शक्ति से समर्थन का रास्ता खुलेगा तो सवाल है शक्ति कैसे निर्माण होगी? शक्ति संगठन से पैदा हो सकती है। शक्ति के माध्यम से इस देश मे हम बहुत बड़ा क्रान्तिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। हम बहुत बड़ा चमत्कार कर सकते हैं। चार साल पहले हमारी मीटिंग चल रही थी तो एक कार्यकर्ता को मेश्राम साहब ने कहा कि चमत्कार पर मेरा यकीन नहीं है। 


कोई चमत्कार कर सकता है या चमत्कार कर सकता है या चमत्कार होता है, इस पर मैं विश्वास नहीं करता हूँ। लेकिन आने वाले दस  सालों में मैं खुद ही चमत्कार करने वाला हूँ। यह 100 आॅफसूट संगठन चमत्कार की प्रक्रिया है। 100 आॅफसूट संगठन बनेंगे तो संगठनांे के द्वारा शक्ति का निर्माण होगा। आजहमें सफल होने के लिए दूसरी चीजों की आवश्यकता है हमें करोड़ों लोगों का समर्थन चाहिए। 


करोड़ों लोगों का समर्थन जुटाने के लिए तथा समर्थन हासिल करने के लिए भी संगठन की आवश्यकता होती है। सफल होने के लिए केवल शक्ति और समर्थन से सफल नहीं हो सकता। हमें सफल होने के लिए तथा आन्दोलन चलाने के लिए दांव-पेच करने वाले विजनरी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। आन्दोलन चलाने वाले लोगों को विजनरी लीडरशिप की आवश्यकता होती है। 


आज हमारा मूलनिवासी बहुजन समाज गुलाम है। लीडरशिप न होने की वजह से तथा हमारे समाज में नेतृत्व न होने की वजह से हम लोग पीछे रह गये हैं। अगर हमको सामूहिक रूप से विकास करना है, अगर हमको सफल होना है तो हमारे अन्दर लीडरशिप का निर्माण करना होगा। केवल लीडर बनने से देश में सामूहिक रूप से विकास नहीं होगा। दुश्मन के द्वारा जो षड्यंत्र किया जा रहा है, उसे आॅफसूट संगठन अपने-अपने स्तर पर दुश्मनों के षड्यंत्र को विफल करने का काम करेंगे। 


अगर 100 आॅफसूट आॅर्गेनइजेशन बनेंगे तो 100 कार्यक्रम होंगे, 100 राष्ट्रीय अधिवेशन होगें, दुश्मन कितना काउन्टर होगा और कहाँ-कहाँ करेगा? इतनी बड़ी शक्ति का निर्माण आॅफसूट संगठन के द्वारा होगा और शक्ति से ही समर्थन पैदा होगा। संगठनाओं के द्वारा हम नेतृत्व का निर्माण करना चाहते हैं और समाज को सही नेतृत्व मिल सकता है, तभी हमारा समाज सफल हो सकता है और हमारे समाज का आन्दोलन सफल होगा।

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