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ब्राह्मण अल्पसंख्य होकर भी शासक है क्यों?

Published On :    2 May 2018   By : MN Staff
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शासक वर्ग ने भारत में दुर्व्यवस्था (गैरबराबरी) का माहौल बनाकर हमें 6000 हजार जातियों में बांट दिया है। हम लोगों को एक साथ आकर इस गुलामी से मुक्त होने का संघर्ष करना चाहिए। उन्हीं लोगों के साथ शासक वर्ग ने प्रताड़ित करके गुलाम बनाने का काम किया है, हमारे लोग कहते रहते हैं कि देश बहुत तरक्की कर चुका है। मैं भी कहता हूँ कि देश की तरक्की होनी चाहिए बहुत तीव्र गति से होनी चाहिए। 


लेकिन सही तरक्की उसी को कहा जाता है जो सब लोगों को एक साथ लेकर और उनकी समस्याओं का समाधान करते हुए आगे बढ़ता जाये। इसके विपरीत चंद लोगों को साथ लेकर और उनके स्तर को ऊँचा करके आगे की तरफ बढ़ता जाये, क्या इस तरह की तरक्की उन्नति वाला समाज चाहते हैं? लेकिन तो ऐसी तरक्की बिल्कुल भी पसंद नहीं है। 


बामसेफ संगठन में आने से हमें इस बात का पता चल चुका है कि हमारे महापुरूषों ने बहुजन समाज के लिए कितना संघर्ष किया? उनके जीवन से हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए और अपनी शेष जिन्दगी बामसेफ के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित करना चाहिए। जहाँ भी जाये बामसेफ की विचारधारा को समाज को बताने का काम करना चाहिए और दुनिया के लोगों से शासक वर्ग द्वारा भारत में किये हुए अत्याचारों की दास्तां को बताकर शासक वर्ग को नंगा करना चाहिए। 


ह काम बामसेफ के माध्यम से समस्त मूलनिवासी समाज को एक साथ मिलकर करना होगा। हम सब मूलनिवासी पुरखों की संतान हैं। हमारी रगों में जो खून बह रहा है वह महापुरूषों का ही खून है। इसलिए हम शासक वर्ग की व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए क्योंकि इनकी अत्याचारी व्यवस्था के खिलाफ हमारे पुरखों ने संघर्ष किया। आज हमारे लोगों के साथ भेदभाव का बर्ताव किया जा रहा है तो क्यों किया जा रहा है, और इसका कारण क्या है?  इस कारण को समझने की जरूरत है क्योंकि जानकारी ही हथियार होता है। 


आज संगठन के द्वारा लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) के बारे में बताया जा रहा है कि भारत में जो डेमोक्रेसी है, क्या यह सही मायने में डेमोक्रेसी है? किस तरह की डेमोक्रेसी है? आप अमेरिका में देख सकते हैं। बराक ओबामा को वहां के लोगों ने दो बार चुनाव जिताया जहां पर इतनी ऊँच-नीच की भावना नहीं थी, वह देश आज इतना आगे बढ़ गया है। लेकिन हमारे देश में बाबासाहब जैसे दुनिया के सबसे विद्वान आदमी ने संविधान  देकर सारी समस्याओं को खत्म करने की कुँजी दे दी फिर भी हमारे देश की हालत इतनी दयनीय है। 


कि आज वह अन्य देशों की अपेक्षा हमारे ही देश में इतना भेदभाव और ऊँच-नीच का व्यवहार क्यों किया जाता है? वह इसलिए किया जा रहा है कि हम लोग बांटे गये लोग हैं और हमारे एक ना होने की वजह से ही भारत में ब्राह्मण व  अल्पसंख्यक होकर भी शासक बन बैठा है उसने हमें हमारे ही देश में गुलाम बना कर रखा है।भारत से बाहर जाकर हमने ये देखा कि हमारे पास यूनिटी होनी चाहिए और सबको साथ मिलकर एक दूसरे से कंधा मिलाकर महापुरूषों के मिशन का काम करना चाहिए, चाहे कोई भी धर्म, मिशन या संगठन हो। 


हम अपनी समस्याओं का समाधान एक हुए बगैर नहीं कर सकते हैं। चाहे वह जापान हो, चाहे वह अमेरिका हो, हमारे लोग हर जगह हैं। हमें एक होकर और भेदभाव को भूलकर अपनी ताकत को एक दिशा में लगाकर अपनी गुलामी से मुक्त होना होगा। यही संदेश मूलनिवासी योद्धा वामन मेश्राम आज बहुजन क्रान्ति मोर्चा की परिवर्तन यात्रा के माध्यम से दे रहे हैं। जिस तरह से हमारे हांथों की पांचों अंगुलियां एक होकर भारी से भारी चींजों को उठाकर फेंक देती हैं। 


उसी तरह से हमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को एक करके जो वामन मेश्राम (राष्ट्रीय संयोजक, बहुजन क्रान्ति मोर्चा) के नेतृत्व में इतना बड़ा कांरवा लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उस कारवां में हम लोगों को सहभागी होना चाहिए।  इसलिए हम इस कारवां को आगे बढ़ाने का काम करना होगा।हमें अपनी माताओं एवं बहनों को प्रेरित करके इस कारवां में सहभागी बनाना होगा। क्योंकि हमारे देश में महिलाओं की संख्या 50 प्रतिशत है और संख्या के इतने बड़े हिस्से को छोड़कर हम ब्राह्मणों की गुलामी से मुक्ति नहीं पा सकते हैं।


हमें अपने बच्चों की पढ़ा-लिखाकर उन्हें शिक्षित बनाना होगा, ताकि उनको यह पता चले कि हमारे साथ क्या क्या गलत हो रहा है और क्या सही हो रहा है? इसकी पहचान करके सही और गलत का निर्णय करके अपना और अपने समाज के बारे में सोचना होगा क्योंकि हम किसी के साथ अत्याचार नहीं चाहते। हम एक ऐसा समाज बनाना चाहते हैं, जिसमें किसी भी व्यक्ति के साथ अत्याचार ना हो बल्कि सभी व्यक्ति न्याय, समानता, बंधुता और स्वतंत्रता का व्यवहार हो। 


अन्य देशों में यह शोध किया गया है कि अगर किसी भी देश को उन्नति के शिखर पर ले जाना है तो देश में रहने वाले बहुसंख्यक लोगों का विकास अति आवश्यक है। तभी हम सही मायने में समतावादी देश या समाज का निर्माण कर सकते हैं। ऐसा ही समाज हमारे पुरखे स्थापित करना चाहते थे।इसके लिए हमें सबसे ज्यादा शिक्षा को तवज्जों देना चाहिए, क्योंकि शिक्षा वह दौलत है जो आपसे कोई नहीं छीन सकता है। 


अगर आप के पास शिक्षा है तो आप चाहे किसी भी वर्ग के हों हर जगह कद्र होती है और हमें शिक्षित होकर और सारे लोगों को एक साथ लेकर अपने हक और अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए, और तब तक लड़ते रहना चाहिए जब तक हमें अपना निधारित लक्ष्य नहीं मिल जाता है। यही काम आज भारत मुक्ति मोर्चा कर रहा है जो सभी मूलनिवासी बहुजनों को यूरेशियन लोगों की सत्ता एवं व्यवस्था से सम्पूर्ण रूप से आजादी के लिए संघर्ष की तैयारी कर रहा है।
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