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भाजपा सरकार की बहुजन विरोधी नीति

Published On :    9 May 2018   By : MN Staff
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आज देश की जो हालत है, उसमें डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) खत्म हो चुका है और डिक्टेटरशिप (तानाशाही) चल रही है। वर्तमान में जैसे भाजपा है, कांग्रेस है, तृणमूल कांग्रेस है या चाहे केजरीवाल की पार्टी है। कांग्रेस में तो सिर्फ सोनिया या राहुल गाँधी की चलती है। 


इसी तरह भाजपा में आरएसएस की चलती है और मोदी उसी के आदेशानुसार कार्य करता है और बोलता है। इसी प्रकार ‘आप’ में केजरीवाल की, तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी की और पंजाब में अकाली दल में प्रकाश सिंह बादल की चलती है। 


अगर सभी पार्टियों में डिक्टेटरशिप है तो भारत में लोकतंत्र कैसे रह सकता है? इससे यह सिद्ध हो जाता है कि भारत में लोकतंत्र के बजाय तानाशाही चल रही है। इसलिए इस तानाशाही का सीधा असर हमारे मूलनिवासी बहुजनों पर पड़ रहा है। 


भारत सरकार द्वारा ‘फुड सेक्योरिटी बिल’ (खाद्य सुरक्षा बिल) लाना और इसके माध्यम से 83 करोड़ लोगों को इसके अन्दर लाने की बात करना, यह अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है कि भारत में गरीबी के बजाय भुखमरी है। 


अर्जुन सेनगुप्ता कमेटी ने वर्ष 2007 में जो रिपोर्ट दिया था कि हमारे भारत में 83.6 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनकी रोजाना की आय 6 रूपये से लेकर 20 रूपये के अन्दर है। सरकार की जितनी भी पॉलिसी हैं, वो सब मूलनिवासी बहुजनों के खिलाफ हैं जैसे कि एलपीजी, सेज, एफडीआई और फुड सेक्योरिटी बिल। 


इसके अलावा भाजपा सरकार ने जल्दी ही एक्ट लेकर आई है जो अभी 10.08.2017 को संसद में पेश किया है ‘दी कोड ऑन वेजेज बिल -2017।’ डॉ.बाबासाहब अम्बेडकर ने ‘लेबर लॉ’ (श्रम कानून) बनाया था, वो सब श्रमिकों के हित में था। 


जैसे कि ‘दि पेमेन्ट ऑफ वेजेज एक्ट, 1936’ था, ‘दि मिनिमम वेजेज एक्ट-1948 था, ‘दि पेमेन्ट ऑफ बोनस एक्ट-1965 था और ‘दि इक्कवल रिम्यूनिरेशन एक्ट-1976’ था। ये सारे एक्ट (अधिनियम) शून्य या समाप्त हो जायेंगे और इनकी जगह ‘दि कोड ऑन वेजेज बिल-2017’ लागू किया जायेगा। 


इससे क्या होगा? इससे यह होगा  कि जितनी भी बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ हैं, उनको फायदा होगा। क्योंकि इस एक्ट के लागू होने से कम्पनी के मालिक बिल्कुल मनमानी करेंगे। कम्पनी में किसको रखना है या नहीं रखना है, कितना तनख्वाह देना है या नहीं देना है या कम्पनी किसी को भी जब चाहे निकाल सकती है। 


उनके ऊपर किसी भी प्रकार का श्रम कानून लागू नहीं होगा। यानि पूर्व में जो श्रमिकों की सुरक्षा के लिए जितने भी कानून बनाये गये थे, वो सब के सब समाप्त हो जायेंगे। ये सारी बातें जानने और समझने की जरूरत है कि ऐसा क्यों हो रहा है? 


केन्द्र में चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की सरकार हो, दोनो ही मनुवादी विचारधारा की सरकारें हैं। क्योंकि इस देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जवाहर लाल नेहरू आरएसएस की शाखाओं में जाते थे। जवाहर लाल नेहरू खुद ही आरएसएस के सदस्य थे। इससे सिद्ध होता है कि कांग्रेस और आरएसएस दोनों एक ही हैं। इन्होंने ‘एलपीजी’ की पॉलिसी बनायी, उसमें ‘लिबरलाईजेशन’ है। 


इसके बारे में ब्राह्मणवादियों ने प्रचार किया कि इसके तहत कम्पनियों से जो भी फायदा होगा, वह ऊपर से नीचे तक जायेगा। किन्तु ऐसा नहीं हो रहा है, बल्कि इन कानूनों से जितने भी फायदे हो रहे हैं, वो सबके सब फायदे सिर्फ ऊपर को ही जा रहे हैं। इस देश में चन्द परिवार हैं, जिनको फायदा पहुँच रहा है जैसे कि ‘अंबानी है, अडानी है, टाटा है और बिड़ला आदि हैं। हम मूलनिवासियों को आटा-दाल के चक्कर में डालकर भिखारी बनाया जा रहा है। 


एफडीआई का विरोध पहले भाजपा करती रही, लेकिन जैसे ही भाजपा की सरकार बनी वैसे ही भाजपा सरकार ने रेलवे में, बीएसएनएल में, बीमा में, रक्षा सहित तमाम क्षेत्रों में 100 प्रतिशत एफडीआई लागू कर रही है। भारत सरकार की बहुत सी बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ थीं, उन सबका धीरे-धीरे निजीकरण कर दिया गया। इसका सीधा दुष्परिणाम मूलनिवासियों पर ही पड़ेगा। 


क्योंकि मूलनिवासियों के पास न तो कोई जमीन है, न कोई जायदाद है और न ही कोई व्यापार है। इसीलिए मूलनिवासी नौकरी पेशा पर ज्यादातर निर्भर रहते हैं। निजीकरण की वजह से मूलनिवासियों को कोई काम (नौकरी) नहीं मिलेगी। निजी कम्पनियों में अच्छे काम और वेतन की समस्या होगी क्योंकि निजी कम्पनियाँ भी ब्राह्मण और सवर्ण-बनियों के ही हाथ में हैं। 


उधर सरकार ने श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने वाली श्रम कानूनों को समाप्त करके पूँजीपति और उद्योगपतियों को जंगल का खुला शेर बना दिया है। इसका दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहा है कि भारत के मूलनिवासी लगातार गरीब होते जा रहे हैं और पूँजीपति या उद्योगपति, जिनको सरकार चाह रही है वो दिन दूना और रात चौगुना अमीर होते जा रहे हैं। 


भारत सरकार पर काबिज ब्राह्मणों की बहुजन विरोधी नीतियों के कारण इस देश की 1 प्रतिशत सम्पत्ति 99 प्रतिशत लोगों के पास है और 99 प्रतिशत सम्पत्ति सिर्फ 1 प्रतिशत लोगों के पास है। इस प्रकार सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसी हालत में भुखमरी तो आनी ही आनी है। 


इसलिए हम सभी मूलनिवासी बहुजन समाज (एससी, एसटी, ओबीसी और सभी मायनॉरिटी) को एक जुट होना चाहिए और राष्ट्रव्यापी जन-आन्दोलन के जरिए, इस देश की राजसत्ता अपने हाथ में ले लेना चाहिए। यदि हमलोग ऐसा कर लेते हैं तो हमलोग अपनी समस्त समस्याओं का समाधान करने लायक हो जायेंगे, यही हमारे लिए एक अंतिम विकल्प है।

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