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सबसे बड़े लोकतन्त्र में महिलाआें के साथ सलूक

Published On :    9 May 2018   By : MN Staff
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भारत केवल आज दुनिया में कहने को सबसे बड़ा लोकतन्त्र है परन्तु वास्तव में लोकतंत्र ना होकर ब्राह्मणतंत्र स्थापित है क्यांकि लोकतंत्र में सबको समानता से जीने का अधिकार होता है लोकतन्त्र में जो समानता से जीने का अधिकार नहीं रखता है वह गुलाम होता है। 


वही स्थिति आज भारत के सन्दर्भ में कही जा सकती हैं क्यांकि यहां पर महिलाएं आज भी असमानता और गैर बराबरी का दंश झेल रही है जबकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश भारत में सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानां एवं संस्थाआें पर मातृसत्ताक विरोधी ब्राह्मणां का कब्जा है। 


जिसके कारण इस आबादी के साथ असमानता का व्यवहार किया जाता है क्यांकि भारतीय समाज में पूरी तरह से ब्राह्मणवादी कर्मकाण्ड तथा धर्म ग्रन्थां पर आधारित व्यवस्था का बोला बाला है। इन धर्म ग्रन्थां की विचारधारा का आधार समाज के मानसिकता के पटल पर राज कर रहा है जिन में इस आधी आबादी के लिए बहुत ही अमानवीय बातों की अधिकता है। देश के प्रचार माध्यम दिन रात इन्हीं मातृसत्ताक विरोधी विचारधारा का प्रचार कर रहा है। 


इस प्रचार का एक मात्र मकशद देश के लोगों की मानसिकता को ब्राह्मणां के समर्थन वाली बनाना है जिसको आज वर्तमान समय में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आज भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश मे महिलाआें को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे आजादी से जीने का अधिकार नहीं है उसका सीधा सा कारण है भारत में स्थापित पितृसत्ताक व्यवस्था, जिसमें सभी अधिकार महिलाआें को ना होकर केवल पुरूषां का है। आज समाज में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो महिला अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करते हुए आजादी से कर सकें जबकि दुनिया में आज सभी देशां में इस सृष्टि की निर्माता को पूर्ण रूप से आजादी का अधिकार है। 


वह अपनी मन मर्जी के हिसाब से कुछ भी कर सकती है। ये सभी व्यवस्थायें मातृसत्ताक व्यवस्था में है जो आज भी कई देशां में जारी है। उसके लिए ज्याद दूर जाने की जरूरत नहीं है अपने पड़ोसी देश भूटान में आज भी मातृसत्ता व्यवस्था कायम है जो किसी समय भारत जैसे महान देश में स्थापित रही है। 


इसका पतन आज से करीब 2500 वर्ष पूर्व में आक्रान्ता आने के बाद से हुआ जिन्हांने इस सृष्टि की निर्माता मातृशक्ति की आजादी को छीन लिया और उनको अपने व्यवस्था का गुलाम बनाने के लिए कई तरह की पाबन्दियां लगा कर उनकी आजादी को छीनने का कार्य किया। 



इसके लिए यूरेशियन ब्राह्मणों द्वारा लिखा मनुविधान ही जिम्मेदार है क्यांकि भारत में आज मनुस्मृति के अनुसार ही समाज व्यवस्था कायम है जो सदियां से लगातार कायम है। जिससे महिलाआें की आज दुर्दशा हो रही हैं उनकी सुरक्षा की कोई गारण्टी नहीं दी जा सकती है क्यांकि देश की शासन व्यवस्था में आज भी यूरेशियन ब्राह्मण ही काबिज है जो इन महिलाआें को पूर्व की भांति आज भी अपना नहीं मान रहा है जिसकी कीमत आज भी इन महिलआें को चुकानी पड़ रही है। 


भारत में आज भी महिलाआें का कोई भी वजूद नहीं है। देश में स्थापित ब्राह्मणवादी व्यवस्था एवं सत्ता के चलते आज महिलाआें के साथ तरह-तरह के अमानवीय अत्याचार हो रहे हैं जिनको रोकने के लिए देश की सत्ता पर स्थापित ब्राह्मणां की सरकारें कोई भी प्रयास नहीं कर रही है। क्यांकि 3.5 यूरेशियन ब्राह्मण यह अच्छी तरह से जानता है कि महिलाआें का इतिहास क्या है। इसी वहज से वह अपनी सत्ता का इस्तेमाल इन महिलाआें को अधिकार वंचित करने के लिए कर रहा है। 


महिलाआें के खिलाफ साजिश करने में मीडिया भी कम भूमिका अदा नहीं कर रहा है क्यांकि भारत में जो मीडिया है उसका एक मात्र मकसद देश में शासक वर्ग की व्यवस्था तथा सत्ता के मजबूत करना है। क्यांकि पूरे मीडिया में दिमाग ब्राह्मणां का और पैसा बनियां का लगा हुआ है। और डी.एन.ए. रिपोर्ट से इस बात का कोई शक छुपा नहीं है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, भारत का मूलनिवासी नहीं है और देश की सभी महिलाआें को डी.एन.ए. ने प्रमाणित किया है कि भारत में जितनी भी महिलाएं है वे सभी भारत की मूलनिवासी हैं। इसीलिए इन यूरेशियन ब्राह्मणां ने महिलाआें के लिए अपने धर्म ग्र्रन्थां में गलत शब्द का प्रयोग किया और अपने व्यवस्था के हिसाब से महिलाआें के वजूद पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया। 


आज उसी का कारण है कि पुरूष महिलाआें को कम आंकता है उसको अपनी वर्चस्ववादी व्यवस्था के हिसाब से व्यवहार कर रहा है। जो उसकी ब्राह्मणवादी मानसिकता का सबूत है। और ये ब्राह्मणवादी मानसिकता, ब्राह्मणी धर्म ग्रन्थां के कारण स्थापित हो चुकी है जिसका मुख्य कारण आज भी मूलनिवासी महिलाआें को अपने सही इतिहास की जानकारी ना होना को नहीं है। 


इसीलिए ब्राह्मणवादी व्यवस्था को खत्म करने के लिए अर्थात महिलाआें को इस अमानवीय घृणित ब्राह्मणवादी व्यवस्था से पूर्ण रूप से आजादी दिलाने का कार्य बाबासाहब अम्बेडकर ने किया जिसका सबूत हिन्दू कोड बिल है जो महिलाआें के ब्राह्मणवादी व्यवस्था से आजादी का दस्तावेजी सबूत है जिसको बाबासाहब ने अन्त तक पास कराने का काम किया। जिसका इन यूरेशियन ब्राह्मणों ने जमकर विरोध किया और वह पारित नहीं हो सका जो आज महिलाआें के साथ हो रहे अत्याचारां का कारण है। 


ब्राह्मणों ने अपनी सत्ता एवं व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मनुस्मृति पर आधारित कानूनां का निर्माण आज भी कर रहा है जिसके कारण तथाकथित आजादी के 68 वर्ष बाद  भी महिलाआें के साथ गैर बराबरी का व्यवहार हो रहा है। 


इसलिए अपने आपको इस ब्राह्मणवादी व्यवस्था से आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए महिलाआें को स्वयं आगे आना होगा उसके लिए सबसे पहले देश की मूलनिवासी महिलाआें को इस गैर बराबरी, भेदभाव, जातिवादी व्यवस्था को लात मार कर त्यागना होगा तभी महिलाआें की आजादी सम्भव हो सकती है जिसके लिए सभी 85 प्रतिशत मूलनिवासी महिलाआें को आजादी की जंग की तैयारी अभी से करनी होगी और भारत मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में चल रही लड़ाई को मजबूती प्रदान करने के लिए साथ सहयोग करना होगा।


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