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कोविड वैक्सीन जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी साझा करने से स्वास्थ्य मंत्रालय का इनकार

Published On :    11 Apr 2021   By : MN Staff
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देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन की कथित कमी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय बिना कोई उचित कारण बताए वैक्सीन जारी करने (रोल आउट) और उसकी कीमत निर्धारित करने की प्रक्रिया साझा करने से बच रहा है.



नई दिल्ली : देश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन की कथित कमी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहा केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय बिना कोई उचित कारण बताए वैक्सीन जारी करने (रोल आउट) और उसकी कीमत निर्धारित करने की प्रक्रिया साझा करने से बच रहा है.


पुदुचेरी स्थित कार्यकर्ता सौरव दास ने सूचना के अधिकार के कई आवेदन दायर किए गए थे. उसमें उन्होंने पूछा था कि किस तरह से केंद्र ने वैक्सीन पर विशेषज्ञ समिति का गठन किया, किस तरह से उसने विचार-विमर्श किया, किस तरीके से उसने यह तय किया कि पहले टीकों को 30 करोड़ लोगों को प्राथमिकता के आधार दिए जाने की जरूरत थी और इसने रोल-आउट से पहले को-विन ऐप की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की. लेकिन, इनमें से अधिकांश सवालों का स्वास्थ्य मंत्रालय और उसके संबंधित विभागों ने रणनीतिक, वैज्ञानिक, आर्थिक हितों के लिए खतरे का हवाला देते हुए जवाब नहीं दिया.


सौरव दास ने कहा कि ये जवाब पूरी तरह से अवैध थे क्योंकि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना देने से इनकार करने का कोई उचित कारण नहीं बताया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग ने अब तक स्वतः ऐसी सूचनाओं को देने से इनकार करने पर संज्ञान नहीं लिया है, जो देश के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं. 



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दास ने कहा कि पिछले साल कोविड-19 महामारी के बीच तब मुख्य सूचना आयुक्त बिमल जुल्का ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए सभी उपायों को संकलित करने और अपनी वेबसाइट पर कालानुक्रमिक रूप से सूचीबद्ध करने के लिए कहा था.


दास ने कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े उनके सभी सवालों के लिए मंत्रालय पर लगभग एक जैसे जवाब देने का आरोप लगाया.उन्होंने 19 जनवरी, 2021 को आरटीआई आवेदन दायर किया था. कोविड-19 वैक्सीन के लिए अंतिम कीमत पर पहुंचने के सवाल पर उन्होंने 206 रुपये के आंकड़े को तय करने से संबंधित संपूर्ण फ़ाइल की प्रमाणित प्रतियां और खरीद के लिए वैक्सीन की अंतिम कीमत तय करने के लिए शुरू की गई बैठकों के सभी मिनटों की प्रतियां मांगी. 



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जबकि, वैक्सीन की अंतिम कीमत कैसे निर्धारित की गई इसका विवरण देने के बजाय मंत्रालय ने 26 फरवरी, 2021 को अपनी प्रतिक्रिया में कहा, मांगी गई जानकारी को आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8 (1) (ए) के तहत छूट दी गई है. क्योंकि, इससे राज्य के रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए, कोई जानकारी नहीं दी जा सकती है.


दास ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने इसी तरह से धारा 8 (1) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि 30 करोड़ लोगों के टीकाकरण का सटीक आंकड़ा कैसे आया था, उन्होंने मामले में प्रासंगिक साक्ष्य, सामग्री, सलाह, सिफारिशों और रिपोर्टों की प्रतियां मांगी थीं. आयु-समूह के सटीक विवरण, इस 30 करोड़ के आंकड़े में शामिल लोगों के प्रकार के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर मंत्रालय ने जवाब दिया, कोविड-19 वैक्सीन के लिए राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह द्वारा अनुशंसित प्राथमिकता वाले जनसंख्या समूह हैं.
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