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भारत में तुरंत कुछ हफ्तों के लिए लॉकडाउन कर दो, कोविड विशेषज्ञ डॉ एंटनी फॉची का सुझाव

Published On :    1 May 2021   By : MN Staff
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डॉ. एंटनी फॉची ने कहा, बंदी से संक्रमण चक्र टूटने की संभावना है. इस बंदी से भारत को तात्कालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कदम उठाने का रास्ता मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत बेहद कठिन और हताशा की स्थिति में है.



नई दिल्ली: कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच देश में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से कोरोना मरीज लगातार दम तोड़ रहे है. इस बीच आरोप लग रहे हैं केंद्र सरकार ने इसको रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.जिसके चलते कोरोना के नए मामलों के साथ- साथ मौतों का आंकडा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. इस महामारी को रोकने में विफल होते देख कर विख्यात कोविड विशेषज्ञ डॉ. एंटनी फॉची ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है. उन्होंने कहा है की भारत में तुरंत कुछ हफ्तों के लिए लॉकडाउन कर दो. इंडियन एक्सप्रेस को दिए विशेष इंटरव्यू में उन्होंने यह सुझाव दिया है.


डॉ. एंटनी फॉची ने कहा, बंदी से संक्रमण चक्र टूटने की संभावना है. इस बंदी से भारत को तात्कालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक कदम उठाने का रास्ता मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत बेहद कठिन और हताशा की स्थिति में है. भारत ने कोविड संकट से कैसे डील किया, इस बात पर चर्चा से उन्होंने शुरू में ही इनकार कर दिया. वह बोले, मैं जनस्वास्थ्य का काम करने वाला आदमी हूं. कोई नेता नहीं. बहरहाल, उन्होंने इतना कहा कि भारत बहुत हताशा-निराशा की स्थिति में है.


डॉ. फॉची ने कहा, मैं अभी नहीं जानता कि भारत ने अभी कोई संकट प्रबंधन समूह बनाया है या नहीं. कुछ लोगों ने बताया कि लोग अपनी बीमार मां, बाप, भाई और बहन को लिए सड़क पर ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं. सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि हम तुरंत क्या कर सकते हैं. फिर यह कि आप अगले दो हफ्तों में क्या कर सकते हैं. अगर इस संकट को लंबा खिंचने से रोकना है तो हमें चीजों को कई चरणों में समझना होगा. मसलन, इस वक्त वैक्सीनेशन हो रहा है. यह होना ही चाहिए. आवश्यक है. लेकिन टीका लगाने से इस समय अस्पताल में बेड, दवा और ऑक्सीजन जैसी तात्कालिक समस्या नहीं सुलझेगी. सो, इस वक्त लोगों की देखभाल कीजिए. भारत को एक इमरजेंसी ग्रुप बनाना चाहिए जो दवा और ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की प्लानिंग करे. विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरे देशों से बात करे.


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अमेरिकी विशेषज्ञ ने खुशी जताई कि उनकी सरकार ने भारत को दवा आदि देने का वादा कर दिया है. मगर दूसरे देशों को भी भारत की मदद के लिए आगे आना होगा क्योंकि भारत दूसरे देशों की हमेशा मदद करता आया है. तात्कालिक के बाद डॉ. फॉची मध्यकालिक, यानी वे कदम जो दो हफ्ते में उठाने चाहिए का जिक्र करते हुए चीन का नाम लेते हैं. बताते हैं कि संकट के वक्त चीन ने चंद दिनों और हफ्तों में कामचलाऊ इमरजेंसी अस्पताल खड़े कर दिए थे. पूरी दुनिया ने चीन की इस क्षमता को बड़े अचरज से देखा था. इसके अलावा भारत सरकार के अन्य अंगों को काम में लगा सकती है. जैसे कि फौज.


वे कहते हैं कि सबसे पहले फटाफट अस्पताल खड़े करने होंगे. वैसे अस्पताल जिन्हें युद्ध के दिनों में फौजें बनाती है. यह युद्ध ही तो है. दुश्मन का नाम है वायरस. वैक्सीनेशन की बात करते हुए डॉ. फॉची कहते हैं कि वैक्सीनेशन हर हाल में और जितना जल्दी हो सके होना चाहिए. इतने बड़े देश में दो प्रतिशत लोगों के वैक्सीनेशन से क्या होगा. और ज्यादा लोगों को जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगनी चाहिए.


इसी बीच एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कोविड से होने वाली मौतों में वृद्धि के तीन प्रमुख कारण गिनाए हैं. उनके मुताबिक, पहला है मौतों की संख्या और मरने वालों का प्रतिशत. अगर प्रतिशत कम है और मृतक संख्या ज्यादा तो हमें और ज्यादा डाटा का अध्ययन करना होगा. दूसरे, ब्रिटेन से ऐसे आंकड़े आए हैं कि वाइरस के यूके स्ट्रेन के कारण मृत्युदर बढ़ी है. मुमकिन है कि वाइरस के इस रूप के कारण रोग की तीव्रता और मृत्युदर बढ़ी हो. तीसरा कारण यह कि बीमारी में उफान इस तेजी से आया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव के चलते लोगों को अस्पताल में जगह न मिली.


बता दें कि जब कोरोना की दूसरी लहर भारत में दस्तक दे रही थी तब इसको रोकने के लिए कदम उठाने के बजाए केंद्र सरकार और उसके मंत्री पांच राज्यों में चुनावी रैलियां कर रहे थे. जब देश में लाखों मामले सामने आ रहे थे तब भी बीजेपी नेताओं की बंगाल में चुनावी रैलियां शुरू ही थी. इसके अलावा हरिद्वार में कुंभ भी चल रहा था. आरोप हैं की कुंभ और चुनावी रैलियों में बिना मास्क और दो गज की दूरी को ताक पर रखने से संक्रमण फैला. इसका खामियाजा कोरोना संक्रमित मरीज अपनी जान गंवाकर भुगत रहे है.

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