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कोरोना से जंग : निजी हाथों में देश की 60 फीसदी स्वास्थ्य सेवाएं

Published On :    5 May 2021   By : MN Staff
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महामारी में निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र खड़े किए हाथ, सरकारी अस्पतालों ने उठाया बोझ



नई दिल्ली: कोरोना महामारी के भयंकर संकट के बीच ही केन्द्र की मोदी सरकार ने तकरीबन 60 फीसदी से ज्यादा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंप दिया. लेकिन, वहीं निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र महामारी में अपने-अपने हाथ खड़े कर लिए, नतीजा यह हुआ कि मरीजों का पूरा का पूरा का बोझ सरकारी अस्पतालों पर आ गया. देश में जिस तेजी से कोरोना संक्रमण फैला है, वैसे ही स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के सामने नई चुनौतियां भी पेश हो रही हैं. देश में 60 फीसदी से ज्यादा स्वास्थ्य सेवा ‘निजी’ हाथों में है, मगर कोरोनाकाल में ‘सरकारी’ अस्पतालों ने गैर-आनुपातिक रूप से बड़ा बोझ उठाया है.


वित्त आयोग, कोविड के दौर में 2021-26 के लिए जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के रिक्त स्थान को भरने में विफल रहा है. कोविड महामारी ने इस तथ्य को और अधिक उजागर किया है कि स्वास्थ्य को एक ऐसी सेवा माना जाए, जिसके लिए सार्वजनिक वित्त पोषण आवश्यक है. यही वजह है कि स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की व्यवस्था को केवल बाजार की व्यवस्था पर नहीं छोड़ा जा सकता है.


वित्त आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और इसके कवरेज में लगातार जो असमानताएं उत्पन्न हो रही हैं, वह भारत की मानव पूंजी निर्माण और स्वास्थ्य सूचकांकों में प्रगति के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है. बाजार, स्वास्थ्य देखभाल सेवा में व्याप्त व्यापक क्षेत्रीय असमानताओं का समाधान कर पाने में सक्षम नहीं है. कोविड-19 ने यह दर्शाया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता है. अतिरिक्त वित्तपोषण के बिना, स्वास्थ्य प्रणाली न केवल प्रकोपों/आपदाओं से निपटने में विफल होगी, बल्कि अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में भी अप्रभावी रहेगी.


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बता दें कि महामारी ने इस तथ्य को उजागर कर दिया है कि इस तरह के संकट का समाधान करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया कमजोर थी. सभी स्तरों पर सीमित प्रयोगशाला क्षमता का अर्थ यह रहा कि परीक्षण, मामले का पता लगाने, निगरानी और प्रकोप प्रबंधन के कार्यों में समझौता किया गया है. इसके अलावा क्रिटिकल केयर व्यवस्था की सुविधाओं में पर्याप्त आईसीयू, आइसोलेशन बेड, ऑक्सीजन की आपूर्ति और वेंटिलेटर का अभाव है. महामारी पर नियंत्रण के लिए जिला एवं उप जिला सेवा केंद्रों को मजबूत करने के लिए काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है. क्रिटिकल केयर अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में निवेश करने की तत्काल आवश्यकता है.


मनमाने दामों पर बेचा जा रहा जरूरी मेडिकल सामान

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में देश के अनेक हिस्सों में आईसीयू बेड, दवा और ऑक्सीजन को लेकर मारामारी चल रही है. अनेक राज्यों में लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं. इसी बीच कई लोग ‘आपदा में अवसर’ को सही मानकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. दवा, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी हो रही है. जरूरी मेडिकल वस्तुओं को मनमाने दाम पर बेचा जा रहा है. किसी ने ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बुक कराया तो उसके साथ ठगी हो गई. निर्धारित कीमत से दस गुना दाम पर स्वास्थ्य उपकरण बेचे जा रहे हैं.

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