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चीन के वुहान लैब से हीं लीक हुआ था कोरोना वायरस, दावे पर अमेरिकी रिपोर्ट ने लगाई मुहर

Published On :    9 Jun 2021   By : MN Staff
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पिछले डेढ़ साल से पूरी दुनिया इस खतरनाक महामारी की चपेट में है. लाखों लोगों की अब तक मौत हो चुकी है. इस महामारी की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. सबसे पहले ये मामला चीन के वुहान शहर में आया था.



नई दिल्ली : पिछले डेढ़ साल से पूरी दुनिया इस खतरनाक महामारी की चपेट में है. लाखों लोगों की अब तक मौत हो चुकी है. इस महामारी की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. सबसे पहले ये मामला चीन के वुहान शहर में आया था. 


उसके बाद से लगातार सवाल उठते रहे हैं कि क्या इस वायरस के पीछे चीन की कोई चाल है? अमेरिकी रिपोर्ट ने बताया है कि वायरस के वुहान की लैब से हीं लीक होने की संभावना है. दरअसल, कोरोना वायरस को लेकर लगातार स्टडी और रिसर्च जारी है. रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि वायरस चीन की वुहान लैब से हीं लीक हो सकता है.


सोमवार को अमेरिकी रिसर्च के हवाले से द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में इस पर विस्तृत जानकारी दी है और छपा है. अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियां दो विषयों पर जांच कर रही है. वायरस चीन की वुहान लैब में किसी घटना के बाद इंसानों में फैला है. वहीं, क्या वायरस से संक्रमित कोई जानवर इंसानों के संपर्क में आया. अभी फिलहाल लैब से वायरस के लीक होने वाली थ्योरी को लेकर जांच एजेंसी को पूरी संभावना है कि ये वायरस चीन के वुहान लैब से हीं लीक हुआ है.


रिपोर्ट के मुताबिक, इस अध्ययन को मई 2020 में कैलिफोर्निया में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी ने रिसर्च पर काम करना शुरू किया था. ट्रंप सरकार के हटने से ठीक पहले स्टेट डिपार्टमेंट की तरफ से वायरस के मूल स्त्रोत को लेकर जांच करने के आदेश दिए थे. लॉरेंस लिवरमोर का मूल्यांकन कोविड-19 वायरस के जीनोमिक एनालिसिस पर आधारित है.



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कुछ हीं दिनों पहले भारतीय वैज्ञानिकों ने भी दावा किया था कि वायरस के वुहान की लैब से हीं फैलने की संभालना है. महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले वैज्ञानिक दंपत्ति डॉ. राहुल बाहुलिकर और डॉ. मोनाली राहलकर ने इस संबंध में दुनिया के कई देशों के लोगों से इंटरनेट पर संपर्क कर सबूत एकट्ठा किया है. जिनमें मुख्य रूप से ट्वीटर और ओपन सोर्स शामिल हैं. इन लोगों ने अपनी टीम को ड्रैस्टिक का नाम दिया है.


जिनका अभिमत है कि कोरोना चीन के मछली बाजार से नहीं बल्कि वुहान की लैब से ही निकला है. इस थ्योरी को पहले भी कई लोग षड्यंत्र बताकर खारिज कर चुके हैं, लेकिन इनकी टीम ने फिर से दुनिया का ध्यान इस ओर केंद्रित किया है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इस मामले की जांच के लिए आदेश दिए हैं.


इसके अलावा ब्रिटिश और नॉर्वे के दो वैज्ञानिकों ऐंगस डालग्लेश और डॉ. बिरगर सोरेनसेन ने भी दावा किया है कि कोरोना वायरस को चीनी वैज्ञानिकों ने वुहान लैब में ही तैयार किया. यह कोई प्राकृतिक रूप से उपजा वायरस नहीं क्योंकि प्राकृतिक रूप से उपजे वायरस के पुरखे होते हैं जबकि कोरोना का कोई माई-बाप नहीं. इन दोनों के रिसर्च पेपर पर डेली मेल में प्रकाशित खबर में बताया गया है कि चीनी वैज्ञानिकों ने वायरस तैयार करने के बाद रिवर्स इंजीनियरिंग की तकनीक अपनाते हुए वह रास्ता बंद कर दिया जिसके जरिए कोई साइंसदां कोरोना के जन्म का रहस्य खोल सकें.



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लेकिन जैसा कहते हैं न कि अपराधी कितना ही शातिर क्यों न हो, कुछ निशान छूट ही जाते हैं. इन दो वैज्ञानिकों ने वही चिज पकड़े हैं. वैज्ञानिकों ने कहा है कि चीनियों ने चमगादड़ में पाया जाने वाला बैकबोन नामका एक वाइरस पकड़ा और उसके ऊपर स्पाइक्स जोड़ दिए. स्पाइक माने वह कांटे या ताजनुमा रचना जो गोल कोरोना वायरस के चारों ओर चिपकी होती है. 



इन्हीं स्पाइक्स के कारण ही इस वायरस ने इतना खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया. ये स्पाइक प्रोटीन से बने होते हैं. इनमें चार ऐसे अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जिनमें पॉजिटिव चार्ज पाया जाता है. इसीलिए स्पाइक्स आदमी का शरीर मिलते ही जोंक की तरह चिपक जाते हैं क्योंकि आदमी के शरीर में निगेटिव चार्ज पाया जाता है.


दोनों वैज्ञानिकों ने रिसर्च पेपर में लिखा है कि उन्होंने कोविड-19 के सैम्पल्स में उन फुट-प्रिंट्स को पा लिए हैं जो यह साबित करने के लिए काफी हैं कि कोरोना वायरस के बनाने में मानव हाथों का इस्तेमाल किया गया. वैज्ञानिकों ने कहा है कि चीन में वायरस का जन्म रहस्य छिपाने के लिए की गई रिवर्स इंजीनियरिंग के सबूत उनके पास साल भर से थे, लेकिन वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उनकी तरफ कोई तवज्जो नहीं दी.
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