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कोवैक्सीन को बड़ा झटका, अमेरिका में नहीं मिली आपातकाल में इस्तेमाल को मंजूरी

Published On :    11 Jun 2021   By : MN Staff
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भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्तेमाल भारत के साथ साथ कई देशों में हो रहा ह, लेकिन अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक ने बड़ा झटका देते भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को अमेरिका में मंजूरी नहीं मिली है.



नई दिल्ली : भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्तेमाल भारत के साथ साथ कई देशों में हो रहा ह, लेकिन अमेरिकी खाद्य एवं दवा नियामक ने बड़ा झटका देते भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को अमेरिका में मंजूरी नहीं मिली है. अमेरिकी साझेदार ओक्यूजेन इंक को यह सलाह दी गई है कि वह भारतीय वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ज्यादा से ज्यादा आंकड़े दे और जैविक लाइसेंस आवेदन (बीएलए) में जाकर अनुरोध करे.


अगर यह सलाह मानी गयी तो वैक्सीन को मंजूरी मिलने में और वक्त लगेगा, लेकिन ओक्यूजेन ने इस पर सहमति जाहिर की है और बताया है कि वह एफडीए की सलाह के अनुसार कोवैक्सीन के लिए बीएलए में आवेदन करेगा.


ध्यान रहे कि बीएलए, एफडीए की पूर्ण अनुमोदन व्यवस्था है, जिसके तहत दवाओं और टीकों की मंजूरी दी जाती है. ओक्यूजेन ने कहा, कंपनी अब कोवैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग की अनुमति पाने की कोशिश नहीं करेगी. एफडीए ने मास्टर फाइल के बारे में ओक्यूजेन को प्रतिक्रिया दी है. यह सलाह दी गई है कि ओक्यूजेन को अपनी वैक्सीन के लिए ईयूए आवेदन के बजाय बीएलए अनुरोध दाखिल करना चाहिए.


इसके साथ ही कुछ अतिरिक्त जानकारी और डेटा के लिए अनुरोध भी किया गया है. ओक्यूजेन ने कहा कि इसके चलते अमेरिका में कोवैक्सीन की पेशकश में देरी हो सकती है. बीएलए अनुरोध के लिए जरूरी अतिरिक्त जानकारी को समझने के लिए ओक्यूजेन एफडीए के साथ चर्चा कर रही है. कंपनी का अनुमान है कि आवेदन की स्वीकृति के लिए एक अतिरिक्त नैदानिक परीक्षण के आंकड़ों की जरूरत होगी.



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ओक्यूजेन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और सह-संस्थापक शंकर मुसुनुरी ने कहा, हालांकि, हम अपने ईयूए आवेदन को अंतिम रूप देने के बेहद करीब थे, लेकिन एफडीए ने हमें बीएलए के जरिये अनुरोध करने की सलाह दी है. इससे ज्यादा वक्त लगेगा, लेकिन हम कोवैक्सीन को अमेरिका में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. 


भारत में बनी या विकसित हुई किसी भी वैक्सीन को कभी भी यूएसएफडीए से ईयूए या पूर्ण लाइसेंस नहीं मिला है. इस बीच भारत बायोटेक ने कहा कि एक बार मंजूरी मिलने पर यह भारत में टीकों के नवाचार और विनिर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. ओक्यूजेन ने हाल में घोषणा की थी कि उसे कनाडा में कोवैक्सीन के व्यवसायीकरण के लिए विशेष अधिकार मिले हैं और नियामक अनुमोदन के लिए हेल्थ कनाडा के साथ चर्चा की जा रही है.



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वहीं दूसरी और मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक दुष्प्रभाव के मामले सामने आने के बाद कई देशों ने फिलहाल कोविशील्ड वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है. जिन देशों ने कोविशील्ड वैक्सीन के उपयोग पर रोक लगाने के साथ इसे जांच के तहत रखा है उनमें ऑस्ट्रिया, नॉर्वे, आइसलैंड, बुल्गारिया, नीदरलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, स्वीडन और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं. कनाडा के कई प्रांतों ने भी इसी तरह की चिंताओं को लेकर एस्ट्राजेनेका के टीकों का इस्तेमाल फिलहाल रोकने का फैसला किया है.


ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के कारण रक्त में प्लेटलेट की कमी हो सकती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन के कारण ऐसे मामले जरूर सामने आए हैं, हालांकि इसकी संख्या बहुत ही कम है. यह अध्ययन जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक यह स्थिति प्रति 10 लाख खुराक में करीब 11 लोगों में हो सकती है. 65 से 70 साल की आयु वाले लोगों में इसका खतरा अधिक देखने को मिला है.

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