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कोरोना से जहां पहले बताई छह मौतें, अब कहा 180ः नीतीश सरकार पर भड़के चीफ जस्टिस

Published On :    12 Jun 2021   By : MN Staff
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच पहले से ही ध्वस्त स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उजागर ना हो इसलिए कुछ राज्यों पर कोरोना से हुई मौते के आंकड़े छिपाने का आरोप लगा है. इसमें भाजपा जेडीयू गठबंधन की सत्ता वाला बिहार भी शामिल है.



नई दिल्ली : कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच पहले से ही ध्वस्त स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उजागर ना हो इसलिए कुछ राज्यों पर कोरोना से हुई मौते के आंकड़े छिपाने का आरोप लगा है. इसमें भाजपा जेडीयू गठबंधन की सत्ता वाला बिहार भी शामिल है. इसको लेकर पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार की जमकर खिंचाई की है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से कहा है कि वह सरकारी आंकड़ों से संतुष्ट नहीं है.


बिहार में कोरोना संक्रमण से हुई मौत के आंकड़े पर नाराजगी जताते हुये पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा, अगर कोर्ट का आदेश नहीं होता तो शायद राज्य इन लोगों की, जिनकी मौत कोरोना से हुई है, सरकारी आंकड़ों में नाम तक नहीं होता. शायद सरकार उनकी सुध तक नहीं लेती. भविष्य में ऐसी गलती नहीं हो इसके लिए कोर्ट इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है. कोर्ट का कहना है कि अगर निर्देश नहीं होता तो ऐसी चूक कभी उजागर नहीं होती. अब इस मामले की सुनवाई शनिवार को भी होगी.


कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव के हलफनामा में मरने वालों की संख्या 9375 बताई जा रही है. वहीं आईटी विभाग की ओर से दायर हलफनामा में मरने वालों की संख्या 9143 है. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में हलफनामा देकर माना है कि कोरोना से मौत के सही आंकड़ों के मामले में गलती हुई है.



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कोर्ट को बताया गया कि मरने वालों की संख्या में गड़बड़ी होने के मामले में सूबे के सभी सिविल सर्जन को नोटिस जारी किया जायेगा. जो भी दोषी पाये जायेंगे उन पर विभागीय कार्रवाई की जायेगी. सूबे के महाधिवक्ता ललित किशोर ने सरकार का बचाव करते हुए कोर्ट को बताया कि तकनीकी गड़बड़ी तथा पोर्टल अपडेट नहीं हो पाने के कारण आकड़ों में गड़बड़ी हो गई है. फिर भी गड़बड़ी को लेकर राज्य सरकार काफी चिंतित हैं. मौत के आंकड़े अचानक बढ़ने के मामले की जांच की जायेगी.


ऑनलाइन पोर्टल के मामले पर आइटी सचिव संतोष कुमार मल्ल ने हलफनामा में स्वीकार किया कि पोर्टल पर सात जून को कोरोना के 5,424 संक्रमित मरीजों की मौत की जानकारी दी गई थी, लेकिन आठ जून को पहले की रिपोर्ट संशोधित कर 9,375 मरीजों की मौत बताई गई. इस फासले की पड़ताल के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की गई है और पोर्टल के कार्य करने के मामले का अध्ययन करने के लिए तकनीकी टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई थी.


बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में यूपी और बिहार में बड़ी संख्या में कोरोना मरीजों की मौत हुई है.मौत की संख्या इतनी ज्यादा थी की श्मशान घाटों पर इस दौरान लंबी कतारे लगी हुई थी. मृतक का अंतीम संस्कार करने के लिए परिजनों को कई घंटे इंतजार करना पड़ता था. इतना नहीं तो मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों के पास पैसा नहीं होने से पीडितोंने गंगा नदी में लाशे बहा दी और गंगा के किनारे शव दफन किये. जब यह बात सामने आई तो विपक्षी दल मौत के आंकड़ों को छुपाने का सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं.

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