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यूएपीए के तहत पांच साल में 7840 गिरफ्तार, केवल 155 पर ही साबित कर पाए आरोप

Published On :    18 Jun 2021   By : MN Staff
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भारत में किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए के तहत गिरफ्तार करना आसान हो गया है. सरकार या उनके नीतियों की आलोचना करने पर या सरकार के नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर इस कानून का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ उठ रही विरोध की आवाज दबाने के लिए किया जाता है.



नई दिल्ली : भारत में किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए के तहत गिरफ्तार करना आसान हो गया है. सरकार या उनके नीतियों की आलोचना करने पर या सरकार के नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर इस कानून का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ उठ रही विरोध की आवाज दबाने के लिए किया जाता है. जब कि इस कानून का मुख्य काम आतंकी गतिविधियों को रोकना होता है. 


यूएपीए कानून के तहत बीते पांच साल में 7840 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि इसमें से सिर्फ 155 लोगों पर ही आरोप साबित हो पाए है. यह आंकड़े दर्शाते है की यूएपीए कानून का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है.


गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए को लेकर हाल ही में की गई टिप्पणी के बाद इस कानून पर बहस शुरू हो गई है. कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी बनाए गए तीन लोगों को जमानत देने के साथ ही यूएपीए के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे. एनसीआरबी का 2015 से 2019 तक का डेटा भी कोर्ट की शंकाओं को बल देता है. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, इन पांच सालों में यूएपीए के तहत जितनी गिरफ्तारियां हुई, उनमें से 2 फीसदी से भी कम पर दोष साबित किया जा सका.


एनसीआरबी के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, पिछले पांच सालों में यूएपीए के तहत कुल 7840 लोगों पर गिरफ्तारी के बाद केस चलाया गया. इनमें से महज 155 लोगों पर ही आतंकवाद से जुड़े आरोप साबित किए जा सके. जबकि इस साल की शुरुआत में ही गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने जानकारी दी थी कि 2015 से लेकर 2019 तक यूएपीए के तहत गिरफ्तारियों में इजाफा हुआ है. जहां 2015 में 1128 लोगों की गिरफ्तारी हुई, वहीं 2016 में 999, 2017 में 1554 और 2018 में 1421 लोग गिरफ्तार हुए। 2019 में तो गिरफ्तारियों का आंकड़ा 1948 तक पहुंच गया.



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आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में सबसे अधिक मामले मणिपुर में दर्ज किए गए थे. इसके बाद तमिलनाडु में 270, जम्मू कश्मीर में 255, झारखंड में 105 और असम में 87 मामले दर्ज किए गए. हालांकि, साल 2019 में यूएपीए के तहत सबसे अधिक 498 लोगों की गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश में हुई. इसके बाद मणिपुर में 386, तमिलनाडु में 308, जम्मू कश्मीर में 227 और झारखंड में 202 लोगों को गिरफ्तार किया गया. एनसीआरबी के ही डेटा में बताया गया है कि 2015-19 के बीच दिल्ली में यूएपीए के तहत 17 केस दर्ज हुए. इनमें दिल्ली पुलिस ने 41 संदिग्धों के नाम दिए.


बता दें कि यूएपीए के तहत जमानत पाना बहुत ही मुश्किल होता है. जांच एजेंसी के पास चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय होता है, जिससे जेल में बंद व्यक्ति के मामले की सुनवाई मुश्किल होती है. यूएपीए की धारा 43-डी (5) में यह कहा गया है कि एक अभियुक्त को जमानत पर रिहा नहीं किया जाएगा, यदि न्यायालय केस डायरी के अवलोकन या सीआरपीसी की धारा 173 के तहत बनाई गई रिपोर्ट पर विचार व्यक्त करता है कि यह मानने के लिए उचित आधार है कि इस तरह के व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाना प्रथम दृष्टया सही है.



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 इस कानून के तहत एनआईए महानिदेशक चाहें तो किसी मामले की जांच के दौरान वह संबंधित शख्स की संपत्ति की कुर्की-जब्ती भी करवा सकते हैं. इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को भी शक होने मात्र से या जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. इसके लिए उस व्यक्ति का किसी आतंकी संगठन से संबंध दिखाना भी जरूरी नहीं होगा.

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