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बिल्ली, हाथी-घोड़ा की गिनती हो सकती है तो ओबीसी की क्यों नहीं?, तेजस्वी यादव का केंद्र से सवाल

Published On :    22 Jul 2021   By : MN Staff
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साल 2021 की जनगणना कुछ माह बाद से शुरू होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. इस जनगणना के मद्देनजर ओबीसी की संगठनाएं और कुछ सियासी दल ओबीसी की जाती निहाय जनगणना करने मांग कर रहे है.



पटना : साल 2021 की जनगणना कुछ माह बाद से शुरू होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. इस जनगणना के मद्देनजर ओबीसी की संगठनाएं और कुछ सियासी दल ओबीसी की जाती निहाय जनगणना करने मांग कर रहे है. 


अब बिहार में एक बार फिर से जातिगत जनगणना का मुद्दा गरमाने लगा है. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से सवाल किया है की जब हाथी, घोड़ा और बिल्ली की गिनती की जा सकती है तो ओबीसी गिनती क्यों नहीं कि जा सकती.


दरअसल कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार ने एससी-एसटी के अतिरिक्त कोई जातीय जनगणना नहीं करने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद एक तरफ जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को झटका लगा तो दूसरी ओर अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी बयान जारी कर बीजेपी पर निशाना साधा है. क्योंकि बिहार विधानसभा से दो बार जातीय जनगणना को लेकर प्रस्ताव पारित किया जा चुका है और लालू यादव भी काफी समय से इसकी मांग करते आए हैं.


गुरुवार को तेजस्वी ने कहा कि बिहार के दोनों सदनों में बीजेपी जातीय जनगणना का समर्थन करती है, लेकिन संसद में बिहार के ही कठपुतली मात्र पिछड़े वर्ग के राज्य मंत्री से जातीय जनगणना नहीं कराने का एलान करवाती है. यहां उनका इशारा नित्यानंद राय की तरफ था. तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी को पिछड़े/अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफरत क्यों है? इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी सवाल उठाया. कहा कि मोदी सरकार पिछड़े वर्गों के हिंदुओं को क्यों नहीं गिनना चाहती? क्या उन पिछड़े वर्गों के 70-80 करोड़ लोग हिंदू नहीं है?



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बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी ने कहा, जनगणना में जानवरों की गिनती होती है जिसमें कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, शेर-सियार, साइकिल-स्कूटर सबकी गिनती होती है. यहां तक कि कौन किस धर्म का है, उस धर्म की संख्या कितनी है इसकी गिनती होती है लेकिन उस धर्म में निहित वंचित, उपेक्षित और पिछड़े समूहों की संख्या गिनने में क्या परेशानी है? गणना के लिए जनगणना किए जाने वाले फॉर्म में बस एक कॉलम जोड़ना है. उसके लिए कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं होना है.


जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या ज्ञात नहीं होगी तो उनके कल्यानार्थ योजनाएं कैसे बनेंगी? उनकी शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बेहतरी कैसे होगी? उनकी संख्या के अनुपात में बजट कैसे आवंटित होगा? वो कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि देश के संसाधनों में से सबको बराबर का हिस्सा मिले?


केंद्र की ओर से लिए गए इस निर्णय पर तेजस्वी ने कहा कि जातीय जनगणना के आरजेडी ने लंबी लड़ाई लड़ी है और यह लड़ाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि यह देश के बहुसंख्यक यानि लगभग 65 फीसद से अधिक वंचित, उपेक्षित, उपहासित और प्रताड़ित पिछड़े वर्गों के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है.



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बता दें कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि संविधान के मुताबिक लोकसभा और विधानसभा में जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं. महाराष्ट्र और ओडिशा की सरकारों ने आगामी जनगणना में जातीय विवरण एकत्रित करने का अनुरोध किया है. भारत सरकार ने नीतिगत मामले के रूप में फैसला किया है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अतिरिक्त कोई जातीय जनगणना नहीं होगी.


बताते चले कि, जातीय जनगणना के पक्ष में बिहार के सभी पार्टी के नेता हैं. चाहे वह राजद सुप्रीमो लालू यादव हो, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हो, या तेजस्वी यादव, तीनों ही समान रूप से जातीय जनगणना के पक्षधर हैं औऱ लंबे समय से इसकी मांग करते रहे हैं. हालांकि अब जब केंद्र सरकार द्वारा इस मामले पर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया गया है, तो देखना यह है कि बिहार के अन्य माननीय इसपर क्या रुख अख्तियार करते हैं.

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