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15 अगस्त पर नहीं फहराने देंगे तिरंगा, ये झंडे के लायक नहीं, किसानों की भाजपा नेताओं को चेतावनी

Published On :    26 Jul 2021   By : MN Staff
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केंद्र सरकार द्वारा पारित नए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसान पिछले 7 महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली से सटे बॉर्डर आंदोलन कर रहे है. इस आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है.



नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा पारित नए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसान पिछले 7 महीने से भी ज्यादा समय से दिल्ली से सटे बॉर्डर आंदोलन कर रहे है. इस आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है. यहा आए दिन भाजपा नेताओं को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. कृषि कानूनों से गुस्साए किसानों ने भाजपा नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि हम उन्हें 15 अगस्त पर झंडा नहीं फहराने देंगे. किसानों ने कहा है कि भाजपा के नेता झंडा फहराने लायक नहीं हैं.


जनसत्ता की खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा है कि भाजपा के नेताओं और मंत्रियों को 15 अगस्त के दिन झंडा फहराने नहीं दिया जाएगा. साथ ही किसानों ने कहा है कि पूरे हरियाणा में बड़ा प्रदर्शन भी आयोजित किया जाएगा. किसानों ने कहा कि भाजपा के नेता झंडा फहराने के लायक नहीं है. किसानों ने हरियाणा में ट्रैक्टर परेड निकालकर भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया है.


बताते चले कि किसानों के विरोध के कारण हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने गृह जिले करनाल में भी रैली नहीं कर पाए थे. किसानों ने उनके हेलीकॉप्टर को भी नहीं उतरने नहीं दिया था. इसके अलावा हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला समेत भाजपा और जेजेपी के अधिकांश नेता किसानों के गुस्से का सामना कर चुके हैं. पिछले दिनों किसानों ने सिरसा में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा की गाड़ी पर भी हमला कर दिया था. जिसके बाद 100 लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था.



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बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर 7 महीने से अधिक समय से किसानों का आंदोलन चल रहा है. केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों से गुस्साए पंजाब और हरियाणा के किसानों ने भाजपा नेताओं के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान कर रखा है. हरियाणा में लोगों ने भाजपा की सहयोगी जेजेपी के भी बहिष्कार का ऐलान कर रखा है. किसानों ने दोनों दलों के नेताओं के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का विरोध करने की बात कही है.


भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक संसद का मानसून सत्र चलेगा, तभी तक किसानों की संसद भी बाहर चलेगी। किसान तभी वापस जाएंगे, जब कृषि कानूनों को रद्द किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि अब सरकार की मर्जी है, वह जब चाहे बातचीत शुरू कर सकती है। किसान बातचीत से कभी पीछे नहीं हटे थे और वह हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और इस तरह ही चलता रहेगा। 15 अगस्त को लेकर भी कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं और किसान उस दिन तिरंगा फहराएंगे। तिरंगा किस जगह पर फहराया जाएगा, इसको लेकर सभी बैठकर तय कर लेंगे.


उधर भाकीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि देश की संसद में किसानों की आवाज दबाई जा रही है. अगर सांसद किसानों के हक में संसद के भीतर आवाज नहीं उठाते तो उनके क्षेत्र में विरोध किया जाएगा. चाहे वह किसी भी दल के हों. राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन के आठ महीन में सरकार ने किसानों को दिल्ली में आकर अपनी बात रखने की अनुमति दी है. सरकार किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दे रही है, लेकिन हम हार नहीं मानने वाले. जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे आंदोलनकारी डटे रहेंगे. केंद्र को कानूनों को वापस लेना ही होगा.



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टिकैत ने कहा कि सरकार किसानों को हल्के में ले रही है. अन्नदाताओं ने दिल्ली का रास्ता देख रखा है. जब तक संसद का यह सत्र चलेगा यहां 200 किसान रोज आएंगे और अपनी मांग को रखेंगे. जिस तरह देश के संसद में प्रस्ताव पास होते हैं उसी प्रकार किसान संसद में भी प्रस्ताव पास होंगे जिन्हें सरकार को मानना होगा.

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