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पेगासस जासूसी मामले में केंद्र को झटका, जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट बनाएगा एक्सपर्ट कमेटी

Published On :    24 Sep 2021   By : MN Staff
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केंद्र सरकार ने इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखर करने से इनकार करने के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बड़ा झटका दिया है.



नई दिल्ली : पेगासस जासूसी मामले को लेकर बाहर आया जिन्न मोदी सरकार का पिछा नहीं छोड़ रहा है. केंद्र सरकार ने इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखर करने से इनकार करने के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा. इसके लिए अगले सप्ताह आदेश जारी होगा.



सीजेआई एनवी रमना ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम इसी सप्ताह आदेश जारी करना चाहते थे. वो एक्सपर्ट कमेटी बना रहे हैं, मगर कुछ सदस्यों ने निजी वजहों से शामिल होने से इनकार कर दिया है, इसलिए मामले में विलम्ब हो रहा है. सीजेआई रमना ने यह बात वरिष्ठ वकील सीयू सिंह से कही. बता दें कि सीयू सिंह पेगासस मामले में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रहे हैं. इस मामले में 13 सितंबर को शीर्ष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था. इसमें 12 याचिकाओं पर फैसला आएगा.



वहीं केंद्र सरकार ने जनहित और राष्ट्र की सुरक्षा का हवाला दे विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से मना किया था. वकील एमएल शर्मा, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास, पत्रकार एन राम, पूर्व आईआईएम प्रोफेसर जगदीप चोककर, नरेंद्र मिश्रा, परंजॉय गुहा ठाकुरता, रूपेश कुमार सिंह, एसएनएम आब्दी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की याचिकाएं हैं.


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इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं, यह स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से केंद्र ने इनकार कर दिया था. केंद्र सरकार का कहना था कि यह पब्लिक डोमेन का मामला नहीं है इसलिए हलफनामा दाखिल नहीं कर सकते. केंद्र ने कहा था कि उसके पास छिपाने को कुछ नहीं है और इस वजह से उसने अपनी ओर से विशेषज्ञों की समिति का गठन करने की बात कही है.



सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ सख्ती दिखाई थी. चीफ जस्टिस एन वी रमना ने सीधे तौर पर कहा था कि कोर्ट जानना चाहती है कि सरकार इस मामले पर क्या कर रही है. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा था कि सरकार द्वारा किसी विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है या नहीं, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है और इस जानकारी को हलफनामे का हिस्सा बनाना राष्ट्रीय हित में नहीं होगा. मेहता ने कहा कि डोमेन विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट शीर्ष अदालत के समक्ष रखी जाएगी. अब सुप्रीम कोर्ट ने खूद इस मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि वो मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा. इसके लिए अगले सप्ताह आदेश जारी होगा.



बता दें कि द वायर सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने पेगासस प्रोजेक्ट के तहत यह खुलासा किया था कि इजरायल की एनएसओ ग्रुप कंपनी के पेगासस स्पाइवेयर के जरिये नेता, पत्रकार, कार्यकर्ता, सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों की के फोन कथित तौर पर हैक कर उनकी निगरानी की गई या फिर वे संभावित निशाने पर थे. इस कड़ी में वायर सहित विश्व के 17 मीडिया संगठनों ने 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबरों के डेटाबेस की जानकारियां प्रकाशित करनी शुरू की थी, जिनकी पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी की जा रही थी या वे संभावित सर्विलांस के दायरे में थे.



एनएसओ ग्रुप यह मिलिट्री ग्रेड स्पायवेयर सिर्फ सरकारों को ही बेचती हैं. भारत सरकार ने पेगासस की खरीद को लेकर न तो इनकार किया है और न ही इसकी पुष्टि की है. जहां रक्षा और आईटी मंत्रालय ने पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल से इनकार कर दिया है, तो वहीं मोदी सरकार ने इस निगरानी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और उसे खरीदने पर चुप्पी साध रखी है.

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