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गैर भाजपा शासित राज्यों के राज्यपाल पैरों तलें कुचल रहे लोकतांत्रिक संविधान और कानून, शिवसेना का बड़ा आरोप

Published On :    24 Sep 2021   By : MN Staff
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शिवसेना ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सहित गैर भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों की दुष्ट हाथी से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक संविधान, कानून और राजनीतिक संस्कृति को अपने पैरों तले कुचल रहे हैं.



मुंबई :महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के बीच रार थमने का नाम नहीं ले रही है. इस बीच शिवसेना ने गैर भाजपा शासित राज्यपालों पर तीखा हमला बोला है. शिवसेना ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सहित गैर भाजपा शासित राज्यों के राज्यपालों की दुष्ट हाथी से तुलना करते हुए आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक संविधान, कानून और राजनीतिक संस्कृति को अपने पैरों तले कुचल रहे हैं. 

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम लिए बगैर यह आरोप भी लगाया कि केंद्र उन राज्यों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए राज्यपालों का इस्तेमाल कर रहा है जहां भाजपा की सरकार नहीं है.
उल्लेखनीय है कि शिवसेना नीत महा विकास आघाडी (डट।) सरकार का राज्यपाल कोश्यारी के साथ संबंध तनावपूर्ण रहे है। कोश्यारी अन्य मुद्दों के अलावा राज्य सरकार के कोटा से 12 विधान पार्षदों की नियुक्ति को मंजूरी देने में विलंब करने के मुद्दे पर भी प्रदेश सरकार के निशाने पर हैं.

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पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि, गैर बीजेपी शासित राज्यों के राज्यपाल दुष्ट हाथी की तरह है और उनके कहावत दिल्ली में बैठे हैं. ऐसे हाथी प्रजातांत्रिक व्यवस्था, कानून, राजनीतिक
संस्कृति को अपने पैरों तले कुचल नई परिभाषा गढ़ रहे हैं. संपादकीय में कहा गया है कि यह कितना गलत है कि राज्यपाल अपनी शक्तियों का इस्तेमाल गैर भाजपा दलों की राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए कर रहे हैं क्योंकि यह सरकार बीजेपी ने नहीं बल्कि दूसरे दल ने बनाई है.


शिवसेना ने कहा कि इस तरह के प्रयास से देश की एकता प्रभावित हो रही है और यह आग से खेलने जैसा है. इसने कहा कि याद रखा जाना चाहिए कि इस तरह का काम करने से अपना ही हाथ जल जाता है और इस तरह के काम के लिए राज्यपाल के पद का इस्तेमाल किए जाने से संवैधानिक ढांचा ध्वस्त हो रहा है.


इसमें आगे लिखा गया है कि राज्यों को सही तरीके से काम नहीं करने दिया जा रहा है. बीजेपी के एजेंटों को ताकत दी जा रही है और उन्हें खुली छूट दी जा रही है ताकि वो राज्य में अस्थिरता फैला सकें. सामना के जरिए शिवसेना ने पूछा है, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महिलाओं की सुरक्षा और राज्य में कानून व्यवस्था पर चिंता जताई है. 


लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के राज्यपालों ने ऐसी चिंता क्यों नहीं जताई. बीजेपी की महिला विधायक ने भी महाराष्ट्र में यह मुद्दा उठाया. लेकिन दूसरे राज्यों में पार्टी की अन्य महिला विधायक इन मुद्दों को क्यों नहीं उठाती हैं? इसमें आगे लिखा गया है कि यह लोग महाराष्ट्र में इतना हंगामा क्यों करते हैं? क्योंकि यहां बीजेपी सत्ता में नहीं है. महंत की रहस्यमयी मौत और यूपी तथा एमपी में महिलाओं के प्रति अपराध को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है.


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिन कई सारे मुद्दों पर राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच अब तक टकराव की स्थिति बन चुकी है. अपने कोटे से 12 विधायकों की नियुक्ति में देरी को लेकर भी गवर्नर राज्य सरकार के निशाने पर रहे हैं. वहीं गैर भाजपा शासित राज्यों में भी सरकार और राज्यपालों के बीच ठनी हुई है, उसमें महाराष्ट्र के अलावा पश्चिम बंगाल भी शामिल है. इसके अलावा दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की राहें भी अक्सर उपराज्यपाल से अलग दिखाई देती हैं. साथ ही कई राज्यों में सरकारों और राज्यपालों के बीच अनबन की जानकारी सामने आ चुकी हैं.
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