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मोदी के संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन, लगाए मोदी विरोधी नारे

Published On :    27 Sep 2021   By : MN Staff
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पीएम मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधित करते हुए भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और कहा की विविध धर्म के लोग यहा शांति और भाईचारे के साथ रहते है.



नई दिल्ली : अमेरिका यात्रा और संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर पीएम मोदी राजधानी लौट आए हैं. एक तरफ जहां अमेरिका में उनका स्वागत किया गया वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी भी की गई. पीएम मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधित करते हुए भारत को लोकतंत्र की जननी बताया और कहा की विविध धर्म के लोग यहा शांति और भाईचारे के साथ रहते है. हालांकि न्यूयार्क में उनके खिलाफ किए गये विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने शांति और भाईचारे पर पीएम मोदी के दावों को खारिज कर दिया गया.



प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र के बाहर चार अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए गए. हालांकि विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए, समूहों को एक-दूसरे से अलग कर दिया गया. उनमें से सबसे बड़ा समूह लगभग समर्थकों का था, जो पीले झंडे लहरा रहे थे. अन्य तीन विरोध प्रदर्शनों के आयोजकों ने खालिस्तानियों को खारिज कर दिया कहा कि वे उनसे जुड़े हुए नहीं हैं.


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समूहों में से एक इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस थी, जो भारत में कांग्रेस का समर्थन करती है. इसने विरोध का कारण भारत में कथित मानवाधिकारों का हनन बताया है. एक अन्य विरोध भारत में किसानों के आंदोलन के समर्थन में एक स्थानीय गुरुद्वारे द्वारा आयोजित किया गया था, जो पूरी तरह से किसानों के मुद्दों पर केंद्रित था. उन्होंने खुद को खालिस्तानियों से दूर रखा. एक आयोजक ने कहा कि उनका उस विरोध से कोई लेना-देना नहीं है. इस समूह के लोग हरी पगड़ी में देखे गए.



एक विरोध प्रदर्शन द हिंदुज फॉर ह्यूमन रॉईटस (एचएचआर) की ओर से किया जा रहा था. एक आयोजक ने कहा कि वे खुद को खालिस्तानियों से नहीं जोड़ रहे हैं उस समूह के बगल में पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग की गई है. एचएचआर ने सीएए, एनआरसी अन्य कानूनों विनियमों के साथ-साथ भारत में मानवाधिकारों के  कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का विरोध किया. उनके साथ न्यूयॉर्क स्टेट काउंसिल ऑफ चर्च के एक प्रतिनिधि भी जुड़े हुए थे, जो कि एक प्रोटेस्टेंट संगठन है, जो अपने सदस्यों के बीच चर्चो की विश्व परिषद को भी सूचीबद्ध करता है.



इसके कार्यकारी निदेशक एक प्रोटेस्टेंट पादरी पीटर कुक ने कहा कि वह भारत से निर्वासित हुए थे. उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने सीएए का विरोध किया, भले ही इसने उत्पीड़न से भाग रहे ईसाइयों को नागरिकता का अधिकार दिया हो, क्योंकि यह ईसाइयों को मुसलमानों के खिलाफ खड़ा करता है. खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों, जिन्हें पुलिस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी थी, अपने झंडे लहराते नारे लगाते हुए प्रदर्शन करते दिखे.



संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत को लोकतंत्र की जननी बताने वाले प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा व यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को घसीटा है. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया है कि आप दोनों सुन रहे हैं न भारत लोकतंत्र की जननी है. दरअसल, असम में एक सप्ताह पहले हुई हिंसा और उत्तर प्रदेश में हुए घटनाक्रमों के बाद से कांग्रेस हमलावर है. कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि दोनों ही राज्यों में लोकतंत्र खत्म हो गया है और तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है.



प्रधानमंत्री के भाषण के बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का भी ट्वीट आया है. उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसा है कि मुझे दुख हुआ कि जब पीएम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया तो कुछ ही सीटें भरी हुई थीं. इससे ज्यादा  दुख तो तब हुआ जब उनके भाषण पर किसी ने ताली तक नहीं बजाई.



प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी मुलाकात की. दोनों की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. कमला हैरिस ने पीएम मोदी के सामने लोकतंत्र के मुद्दे को भी उठाया. बिना किसी देश का नाम लिए उन्होंने कहा कि दुनिया में लोकतंत्र खतरे में है और और इसे बचाने की जरूरत है.

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