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सरकारी कंपनियों को बेचकर खजाना भरेगी मोदी सरकार, एअर इंडिया के बाद कई कंपनियों के निजीकरण की योजना

Published On :    14 Oct 2021   By : MN Staff
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केंद्र में दोबारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की संत्ता आने के बाद संघ के एजेंडे पर चलते हुए केंद्र सरकार ने देश की सरकारी संपत्तियां बेचने की रफ्तार तेज कर दी है.



नई दिल्ली : केंद्र में दोबारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की संत्ता आने के बाद संघ के एजेंडे पर चलते हुए केंद्र सरकार ने देश की सरकारी संपत्तियां बेचने की रफ्तार तेज कर दी है. एअर इंडिया को निजी हवाले करने के बाद अब केंद्र अपना खजाना भरने के लिए इस पर तेजी से काम करेगी. वित्तीय वर्ष 2021-22 में मोदी सरकार आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों को निजी हाथों में सौंपने की योजना बना रही है.


सरकार ने इस वित्त वर्ष में देश की संपत्तियां बेचकर 1.75 लाख करोड़ रुपए हासिल करने का लक्ष्य रखा है. अभी तक सरकार को एक्सिस बैंक, एनएमडीसी और हुडको आदि में हिस्सेदारी की बिक्री से सिर्फ 8,369 करोड़ रुपए और हाल में एअर इंडिया की बिक्री से 18 हजार करोड़ रुपए मिले हैं. यानी सरकार अब तक करीब 26,369 हजार करोड़ रुपए ही जुटा सकी. ऐसे में सरकार को 1.75 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा करने के लिए अभी भी बहुत पैसे जुटाना है. जिसके लिए आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों को बेचना पड़ेगा.


कुछ महीने पहले डीआईपीएएम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने बताया था कि मार्च 2022 तक बीपीसीएल के निजीकरण का काम पूरा हो जाएगा. इसके अलावा सरकार शॅपिंग कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया, बीईएमएल, पवन हंस और नीलांचल इस्पात निगम को बेचने की प्रक्रिया भी इस साल पूरा कर लेना चाहती है. इन सभी कंपनियों को बेचने की प्रोसेस चल रही है. इसके अलावा दो पीएसयू बैंकों और एक बीमा कंपनी का भी निजीकरण किया जाना है.


केंद्र सरकार लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसे कमाना चाहती है. सरकार एलआईसी की हिस्सेदारी बेच कर 1 लाख करोड़ रुपए तक जुटा सकती है. वही भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को पूरी तरह सरकार बेचने जा रही है. इसके लिए दिसंबर तक फाइनेंशियल बिड बुलाई जा सकती हैं. भारत पेट्रोलियम में सरकार की 53फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी कीमत करीब 50 हजार करोड़ रुपए है.



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हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी पवन हंस को भी प्राइवेट हाथों में सौंपने की योजना है. इसमें फिलहाल सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और 49 फीसदी हिस्सेदारी ओएनजीसी की है. ओएनजीसी ने भी अपना हिस्सा बेचने का फैसला किया है. वहीं नीलांचल इस्पात निगम का भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है. एअर इंडिया को बेचने के बाद अब मोदी सरकार ने एक और सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की बिक्री की तैयारी तेज कर दी. सरकार को इस कंपनी की बिक्री के लिए फाइनेंशियल बोलियां मिल गई हैं. वित्त मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है.


कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर के लिए मंजूरी दे दी है. इस बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की कुल 94 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा 5.29ः हिस्सेदारी अन्य निवेशकों की है. शिपिंग कॉर्प ऑफ इंडिया को भी मार्च 2022 से बेच कर निजी हाथों सौंपा जाएगा. इसमें भी सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है. इसके लिए भी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है. जिसमें से तीन कंपनियों का नाम फाइनल किया गया है.


बता दें कि केंद्र सरकार जो संपत्ति बेचकर अपना खजाना भरना चाहती है, वह देश के आम जनता की संपत्ति है. माना जाता है कि आम जनता की संपत्ति बेचना देश को बेचने जैसा है. केंद्र सरकार पर संसद में ऐसे आरोप भी लग चुके है. इसका परिणाम यह होगा यह सरकारी कंपनियां बिकने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे. इसके साथ ही इन कंपनियों में एससी, एसटी और ओबीसी को नौकरी में मिलने वाला आरक्षण भी खत्म हो जाएगा. यानी निजीकरण यह आरक्षण खत्म करने का मामला नजर आता है.

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