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आपके सीएम को कुछ भी पता नहीं, गुजरात सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

Published On :    23 Nov 2021   By : MN Staff
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सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों को मुआवजे देने के लिए स्क्रूटनी कमेटी बनाने पर गुजरात सरकार को लताड़ लगाई.



नई दिल्ली :  गुजरात में कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा पाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों को मुआवजे देने के लिए स्क्रूटनी कमेटी बनाने पर गुजरात सरकार को लताड़ लगाई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए गुजरात सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आपके सीएम को कुछ पता नहीं है. कोर्ट ने गुजरात सरकार को कम से कम 10,000 लोगों को मुआवजा देने का आदेश दिया.



सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस नागरत्ना की पीठ ने कोरोना मुआवजे से संबंधित याचिका की सुनवाई की. इससे पहले 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुग्रह राशि देने के संबंध में दिए गए उसके निर्देशों के विपरीत अधिसूचना जारी करने पर गुजरात सरकार से अप्रसन्नता जताई. शीर्ष अदालत ने चार अक्टूबर को कहा था कि कोविड-19 से मृत किसी व्यक्ति के परिजन को 50,000 रुपए का मुआवजा देने से कोई भी सरकार केवल इस आधार पर मना नहीं करेगी कि मृत्यु प्रमाणपत्र में कारण में वायरस का उल्लेख नहीं है.


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अदालत ने यह भी कहा था कि संबंधित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण या जिला प्रशासन में कोरोना वायरस के कारण मृत्यु के प्रमाणपत्र और कारण ‘कोविड-19 की वजह से मृत्यु’ प्रमाणित किए जाने के साथ आवेदन करने की तारीख से 30 दिन के अंदर अनुग्रह राशि दी जानी होती है. पीठ ने अपने आदेश में कहा था, 29 अक्टूबर, 2021 की अधिसूचना देखने के बाद हमें लगता है कि यह इस अदालत द्वारा चार अक्टूबर, 2021 के एक आदेश में जारी निर्देशों के बिल्कुल विपरीत हैं.  



सोमवार को कोरोना मुआवजे से जुड़े याचिका की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत के निर्देशों के अनुसार ही संशोधित प्रस्ताव लाया गया है. इस पर जस्टिस शाह ने पूछा कि सबसे पहले किसने अधिसूचना जारी की. जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं. तो पीठ ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी को लेनी चाहिए.



इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौजूद रहे गुजरात सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल से सवाल पूछा कि किसने इसकी मंजूरी दी और यह किसके दिमाग की उपज है. इसपर अग्रवाल ने कहा कि यह विभाग के द्वारा तैयार किया गया है और सक्षम अधिकारी से इसकी मंजूरी ली गई है. सक्षम अधिकारी का जिक्र करने पर कोर्ट ने पूछा कि ये प्राधिकारी कौन हैं. इसपर अग्रवाल ने जवाब दिया कि ये मुख्यमंत्री हैं.



मुख्यमंत्री का नाम सामने आने पर जस्टिस शाह भड़क उठे. उन्होंने कहा कि आपके मुख्यमंत्री को कुछ भी नहीं पता है. आप सचिव किस लिए हैं. यदि यह आपके दिमाग की उपज है तो आप भी कुछ नहीं जानते. क्या आप अंग्रेजी समझते हैं. आप हमारे आदेश को समझते हैं. यह कामों में देरी किए जाने का नौकरशाही प्रयास है.

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