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एनसीबीसी प्रमुख बोले- जातिगत जनगणना तर्कसंगत मांग, बेहतर नीतियां बनाने में होगी मददगार साबित

Published On :    28 Nov 2021   By : MN Staff
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अखिलेश यादव ने कहा है की अगर यूपी में सपा की सरकार बनती है तो वह राज्य में जाती निहाय जनगणना करेंगे



पटना : जातिनिहाय जनगगणना का मुद्दा एक बार फिर से जोर पकड़ रहा है. यह मुद्दा अब सियासी मुद्दा भ्ज्ञी बनता जा रहा है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है की अगर यूपी में सपा की सरकार बनती है तो वह राज्य में जाती निहाय जनगणना करेंगे. इस बीच जाति आधारित गणना तर्कसंगत मांग है और यह बेहतर नीतियां बनाने में मददगार साबित होगा. विभिन्न संगठनों ने इस मांग को लेकर उनसे भेंट की है और उन्होंने इस मुद्दे से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया है. अब सरकार को कदम उठाना है. यह बाते राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के अध्यक्ष डॉ. भगवान लाल साहनी ने शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहीं.


साहनी ने कहा, जाति आधारित जनगणना निश्चित तौर पर नीति निर्माताओं को पिछड़े वर्ग के लिए कल्याणकारी नीतियां बनाने में मददगार साबित होगी. मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो सरकार के लिए यह जानना आसान होगा किस जाति के कितने लोग हैं और उनके लिए क्या किया जाना चाहिए. जाति आधारित जनगणना में एससी, एसटी के लोगों के अलावा ओबीसी के लोगों की भी गिनती की जाएगी. साहनी ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल देश की आबादी की जाति आधारित जनगणना कराने की मांग कर रहे हैं.


मालूम हो कि कुछ महीने पहले मोदी सरकार ने जाति जनगणना कराने से इनकार कर दिया था. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना ‘प्रशासनिक रूप से कठिन और दुष्कर’ है और जनगणना के दायरे से इस तरह की सूचना को अलग करना ‘सतर्क नीति निर्णय’ है.

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बीते सितंबर में बिहार से 10 दलों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग की थी. केंद्र के इनकार के बाद नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा था कि इससे विकास की दौड़ में पिछड़ रहे समुदायों की प्रगति में मदद मिलेगी. यह राष्ट्रीय हित में है और केंद्र को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए.


उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई राजनीतिक दलों ने इस तरह की जनगणना की मांग उठाई है. भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) ने ओबीसी के कल्याण के लिए एक अलग केंद्रीय मंत्रालय और पूरे देश में जाति आधारित जनगणना की मांग की थी. विभिन्न राजनीतिक दलों के अलावा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस साल अप्रैल में सरकार से भारत की जनगणना 2021 कवायद के तहत ओबीसी की आबादी पर आंकड़े एकत्र करने का आग्रह किया था.


इसके अलावा देशभर में खासकर बामसेफ जैसे सामाजिक संगठन पिछले कई सालों से यह मांग दोहरा रहा है. इसके साथ ही ओबीसी के कई संगठनों का भी कहना है कि ओबीसी जाति निहाय जनगणना होनी चाहिए.ताकि पता चले कि किस जाति का कितना विकास हुआ है और किन जाति के लोगों का विकास नहीं हुआ इसके आंकड़े सामने आएंगे. इसलिए केंद्र सरकार जातिनिहाय जनगणना कराने से इनकार कर रही है. सरकार में बैठे लोग जानते है की अगर जातिनिहाय जनगणना की और जो आंकड़े सामने आएंगे उनके अनुरूप विकास में पिछड़ा ओबीसी के लोगों को शासन प्रशासन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा. इससे प्रशासन और शासन में उच्च जाति के लोगों का प्रतिनिधित्व घट जाएगा. यह ना हो इसलिए केंद्र सरकार जातिनिहाय जनगणना कराने से इनकार कर रही है.
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