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सीएम नीतीश कुमार से मिलेंगे तेजस्वी, जातीय जनगणना के मुद्दे से फिर गरमाई बिहार की सियासत

Published On :    2 Dec 2021   By : MN Staff
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विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विधानसभा परिसर मे कहा कि इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकारी खर्च पर जातीय जनगणना कराने की घोषणा करें.



पटना : जाति आधारित जनगणना को लेकर एक बार फिर से बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है. हालांकि एक बार फिर केंद्रीय मंत्री ने जाती निहाय जनगणना करने से संसद में इनकार कर दिया है. इस बीच बुधवार को विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विधानसभा परिसर मे कहा कि इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकारी खर्च पर जातीय जनगणना कराने की घोषणा करें. उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना देशहित मे जरूरी है, ताकि इससे यह मालूम हो सके कि किस जाति के लोग सबसे गरीब हैं और उसके बाद उस जाति के लिए काम करना आसान होगा.



तेजस्वी ने कहा कि जातीय जनगणना कराने को लेकर मुख्यमंत्री भी पक्ष में हैं. सर्वदलीय टीम इस संबंध मे प्रधानमंत्री से मिल भी चुकी है, लेकिन एक दिन पहले फिर संसद में भाजपा नेता ने कहा है कि देश मे अब जातीय जनगणना जरूरी नहीं है. ऐसे में अब मुख्यमंत्री इसे राज्य सरकार के स्तर पर कराए. इस संबंध मे हम मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखेंगे.



तेजस्वी ने कहा कि जब हम सभी दिल्ली मे प्रधानमंत्री से मिलकर वापस आए थे, तो उस वक्त यह कहा गया था कि उपचुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक कर निर्णय लिया जायेगा, लेकिन अब तक इस संबंध मे कोई चर्चा नही हुई है. इसलिए हम सीएम से मांग करते है कि सत्र के दौरान जातीय जनगणना कराने की घोषणा करें. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव जातीय जनगणना की मांग को लेकर आज गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे. अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर तेजस्वी ने लिखा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई है. तेजस्वी ने बिहार सरकार को अपने खर्चे से जातीय जनगणना कराये जाने तथा इसकी घोषणा सरकार द्वारा इसी सत्र में किये जाने की मांग की.


यह भी पढ़ें : भाजपा यूपी के विधानसभा चुनाव में कृष्ण जन्मभूमि को बनाएगी मुद्दा, केशव मौर्या के ट्वीट से हुआ साफ



बता दें कि जाती निहाय जनगणना का मुद्दा अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है. सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है की अगर यूपी में सपा की सरकार बनती है तो वह राज्य में जाती निहाय जनगणना करेंगे. इसके अलावा कई सियासी दलों नेता भी इसकी मांग कर चुके है. यही नहीं तो एनडीए से जुड़े घटक दल भी जातिनिहाय जनगणना की मांग कर चुके है.



खास बात यह है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के अध्यक्ष डॉ. भगवान लाल साहनी इसके समर्थन में है. बीते दिनों उन्होंने पटना में कहा था कि जाति आधारित गणना तर्कसंगत मांग है और यह बेहतर नीतियां बनाने में मददगार साबित होगा. विभिन्न संगठनों ने इस मांग को लेकर उनसे भेंट की है और उन्होंने इस मुद्दे से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया है. अब सरकार को कदम उठाना है.
साहनी ने कहा, जाति आधारित जनगणना निश्चित तौर पर नीति निर्माताओं को पिछड़े वर्ग के लिए कल्याणकारी नीतियां बनाने में मददगार साबित होगी. उन्होंने कहा था, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो सरकार के लिए यह जानना आसान होगा किस जाति के कितने लोग हैं और उनके लिए क्या किया जाना चाहिए. जाति आधारित जनगणना में एससी, एसटी के लोगों के अलावा ओबीसी के लोगों की भी गिनती की जाएगी. साहनी ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल देश की आबादी की जाति आधारित जनगणना कराने की मांग कर रहे हैं.
हालांकि कुछ महीने पहले पिछड़ों का वोट लेकर सत्ता में आई मोदी सरकार ने जाति जनगणना कराने से इनकार कर दिया था. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि पिछड़े वर्गों की जाति आधारित जनगणना ‘प्रशासनिक रूप से कठिन और दुष्कर’ है और जनगणना के दायरे से इस तरह की सूचना को अलग करना ‘सतर्क नीति निर्णय’ है.
 

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