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परमबीर सिंह को झटका, महाराष्ट्र सरकार ने दिया निलंबित करने का आदेश

Published On :    3 Dec 2021   By : MN Staff
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मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 12 नवंबर को अस्पताल से छुट्टी मिलते ही परमबीर सिंह के निलंबन आदेश पर दस्तखत किये थे. इसके साथ ही उस वक्त के ठाणे सिटी के डीएसपी रहे पराग मनेरे को भी निलंबित कर दिया गया है



मुंबई : आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह को बड़ा झटका लगा है. महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी गई. उनके खिलाफ रंगदारी के आरोपों में एफआईआर दर्ज है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 12 नवंबर को अस्पताल से छुट्टी मिलते ही परमबीर सिंह के निलंबन आदेश पर दस्तखत किये थे. इसके साथ ही उस वक्त के ठाणे सिटी के डीएसपी रहे पराग मनेरे को भी निलंबित कर दिया गया है.



परमबीर के खिलाफ अनियमितताओं और कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने के मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है. वह छह महीने पहले महाराष्ट्र होम गार्ड के चीफ बनाए जाने के बाद से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे थे. उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर 29 अगस्त तक की छुट्टी दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी वह ना ड्यूटी पर लौटे ना ही उन्होंने इस संदर्भ में महाराष्ट्र गृह मंत्रालय से सम्पर्क किया. गृह विभाग ने उनसे कई बार सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क में नहीं आए.



 सिंह ने मार्च में प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. परमबीर के मुताबिक देशमुख ने पुलिस को रेस्टोरेंट व बार मालिकों से एक महीने में 100 करोड़ की उगाही करने को कहा था. हालांकि देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया है. विवाद बढ़ने और वसूली के आरोप लगने के बाद परमबीर सिंह मुंबई से फरार हो गए. बाद में सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी से छूट मिलने के बाद मुंबई पहुंचे.


यह भी पढ़ें :  विपक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से अपने नेतृत्व का फैसला करने देना चाहिए, प्रशांत किशोर का कांग्रेस पर हमला 


 

मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने बृहस्पतिवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ गोरेगांव में दर्ज रंगदारी मामले में अपना उद्घोषणा आदेश रद्द कर दिया. अतिरिक्तचीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसबी भाजीपाले ने 17 नवंबर को परमबीर सिंह को भगोड़ा करार देते हुए उद्घोषणा आदेश जारी किया था. सिंह के पिछले हफ्ते कोर्ट में पेश होने के बाद उनके वकील ने इस आदेश को रद्द करने की अर्जी दी थी.



ऐसे में अब बिना डीजीपी ऑफिस से इजाजत लिए परमबीर सिंह मुंबई छोड़कर नहीं जा सकेंगे. साथ ही जब तक वह निलंबित हैं, तब तक तो किसी निजी कंपनी के लिए या किसी बिजनेस ट्रेड में काम नहीं कर सकेंगे. अगर ऐसा पाया जाता है तो उनके खिलाफ बर्खास्तगी का आदेश दिया जा सकता है. आईपीएस अधिकारी के खिलाफ महाराष्ट्र में जबरन वसूली के कम से कम पांच मामले दर्ज हैं.

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