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ईवीएम के बदले मतपत्र से चुनाव कराए नहीं तो दे इच्छामृत्यु की अनुमति, सीएम बघेल के पिता द्वारा राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी से मची खलबली

Published On :    12 Jan 2022   By : MN Staff
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नंद कुमार बघेल ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर देश में ईवीएम के बजाए मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की है. ऐसा नहीं होने पर उन्होंने इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है.



रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल की एक चिट्ठी ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. नंद कुमार बघेल ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर देश में ईवीएम के बजाए मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की है. ऐसा नहीं होने पर उन्होंने इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है. उनका कहना है कि निर्वाचन आयोग और केंद्र का संवैधानिक कर्तव्य और दायित्व है कि वो चुनाव में मतदान व मतगणना की ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करें जिसका मूल्यांकन जनता और मतदाता स्वयं कर सकें.



उन्होंने राष्ट्रपति से लिखित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की कार्यशैली पर संदेह जताया है और इन्हें बैलट पेपर के इस्तेमाल से बदलने की मांग की है. चिट्ठी में उन्होंने लिखा, इस देश के सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बड़े स्तर पर जारी है. लोकतंत्र के तीन स्तंभ- न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका, इन सभी को तबाह किया जा रहा है. मीडिया भी लोकतंत्र के इन तीनों स्तंभ के इशारे पर काम कर रही है. नागरिकों के अधिकारों के संबंध में कोई सुनने वाला नहीं है. नागरिकों में एक डर का माहौल है. बघेल के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 700 से ज्यादा किसानों की मृत्यु या हत्या गलत नीतियों के कारण हुई है.



गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल फिलहाल राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच के प्रमुख हैं. यह संस्था मतदाताओं में जागरूकता पैदा करने का काम करती है. हालांकि, इस संस्था की अध्यक्षता के बावजूद नंदकुमार ने ईवीएम के इस्तेमाल पर संदेह जताया है.


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मुख्यमंत्री के पिता ने लिखा है कि लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार मतदान के अधिकार को ईवीएम मशीन द्वारा कराया जा रहा है. ईवीएम मशीन को किसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्था या सरकार ने शत-प्रतिशत शुद्धता से काम करने का प्रमाणपत्र नहीं दिया है. फिर भी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में ईवीएम से मतदान कराकर मेरे वोट के उस संवैधानिक अधिकार का हनन किया जा रहा है, जिससे मेरे और देश के नागरिकों के सभी अधिकारों की रक्षा होती है. इसकी कोई गारंटी नहीं है कि मेरा वोट उन्हीं के पास जाएगा, जिनके लिए मैंने ईवीएम का बटन दबाया है.



नंदकुमार ने पत्र में लिखा है कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का संवैधानिक कर्तव्य और दायित्व है कि वे चुनाव में मतदान और मतगणना की ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करें, जिसका मूल्यांकन जनता और मतदाता स्वयं कर सकें. उन्होंने लिखा है, ’बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स चुनाव की ऐसी ही व्यवस्था है जो दुनिया के तमाम विकसित देशों में अपनाई जा रही है. वे देश तकनीक में हमसे बहुत आगे हैं, फिर भी अपने नागरिकों के विश्वास के लिए मतपत्र और मतदान पेटी से ही चुनाव कराते हैं. हमारे देश की संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र में जनता का विश्वास कायम रखने में पूर्णतः विफल होती जा रही हैं और इस मामले में किसी भी प्रकार की कोई सुनवाई करने को तैयार नहीं है.



सीएम के पिता का कहना है कि राष्ट्रपति जी आपने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन मेरे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं हो पा रही है. ऐसी परिस्थितियों में उनके जीने का उद्देश्य ही समाप्त होता जा रहा है. जिसके चलते मेरे पास इच्छामृत्यु के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रहा. नंद कुमार बघेल ने पत्र में लिखा है कि राष्ट्रपति मतपत्र एवं मतदान पेटी से चुनाव कराने का आदेश जारी करें. अगर ईवीएम की जगह बैलट पेपर से मतदान संभव नहीं है तो मुझे इस महीने 25 तारीख को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर इच्छामृत्यु करने की अनुमति प्रदान की जाए.

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