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5 राज्यों में चुनाव से पहले ओबीसी क्रीमीलेयर 8 से बढ़ाकर 12 लाख करने की तैयारी

Published On :    13 Jan 2022   By : MN Staff
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पांच राज्यों के चुनाव में ओबीसी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला किया है. केंद्र सरकार आरक्षण के लिए ओबीसी क्रीमीलेयर लिमिट को बढ़ाने की तैयारी में है.



नई दिल्ली : एससी, एसटी और ओबीसी के हक मारने का आरोप लगाकर ऐन चुनाव से पहले यूपी में ओबीसी के नेता भाजपा को छोड़कर जा रहे है. इसे और पांच राज्यों के चुनाव में ओबीसी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला किया है. केंद्र सरकार आरक्षण के लिए ओबीसी क्रीमीलेयर लिमिट को बढ़ाने की तैयारी में है. आरक्षण के लिए ओबीसी क्रीमीलेयर की लिमिट को 8 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करने की तैयारी है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय की तरफ से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने को कहा गया है.



केंद्र सरकार ने तीन साल पहले ओबीसी की क्रीमीलेयर के लिए इनकम लिमिट को लेकर कदम बढ़ाया था. अब इस मुद्दे पर फिर से पुनर्विचार की पहल की गई है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सलाना आय की अधिकतम सीमा को आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करने पर विचार किया जाएगा. साथ ही मंत्रालय इस बात पर भी विचार विमर्श करेगा कि वार्षिक आय गणना में वेतन और कृषि आय को शामिल किया जाना चाहिए या नहीं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय को इस मुद्दे की फिर से जांच करने के लिए कहा गया है. अधिकारी ने बताया कि जो कैबिनेट नोट रखा गया था उसे वापस कर दिया गया है.


यह भी पढ़ें : भाजपा ने यूपी में 48 घंटे में ही खो दिए 6 बड़े नेता, जानें चुनाव में कितना होगा नुकसान 


वर्तमान में, ओबीसी को उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी रोजगार में 27 फीसदी कोटा हैं. इसमें माता-पिता की सकल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होने की शर्त है. 8 लाख से अधिक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता है.



इनकम क्राइटेरिया की हर तीन साल में समीक्षा की जाती है. पिछली बार 2017 में एनडीए सरकार ने इसकी समीक्षा करते हुए इसे 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया था. 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इसे 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया था. हालांकि, 2020 की समीक्षा से पहले मंत्रालय ने मार्च 2019 में सेवानिवृत्त सचिव बीपी शर्मा के तहत एक पैनल का गठन किया. पैनल का गठन न केवल सकल वार्षिक आय सीमा की समीक्षा करने के लिए किया गया था, बल्कि क्रीमीलेयर की कसौटी निर्धारित करने के लिए मानदंडों पर फिर से विचार करने के लिए भी किया गया था.



बता दें कि क्रीमीलेयर यह मामला दांत है तो चने नहीं और चने है तो दांत नहीं जैसा है. जीन ओबीसी के पास पढने के लिए पैसा है सरकार उनको कह रही है की आपको आरक्षण नहीं मिलेगा. जीन गरीब ओबीसी लोगों के पास पढ़ने के लिए पैसा नहीं, सरकार उन्हें कर रही है कि आप पढ़ो आपको आरक्षण मिलेगा. यह कदम ओबीसी को दोनों तरफ से आरक्षण से वंचित करने जैसा ही नजर आता है.

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