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कर्मचारी संघ ने खटखटाया अदालत का दरवाजा, सरकार ने सीईएल के निजीकरण की योजना टाली

Published On :    13 Jan 2022   By : MN Staff
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केंद्र ने सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) के निजीकरण की योजना फिलहाल टाल दी है.



नई दिल्ली : कर्मचारी संघ ने सरकारी कंपनी को एक कम जाने-पहचाने फर्म को बेचने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था. इसके बाद केंद्र ने सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) के निजीकरण की योजना फिलहाल टाल दी है. निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा कि शहर स्थित नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग द्वारा लगाई गई 210 करोड़ रुपये की उच्चतम बोली में कम मूल्यांकन के आरोपों की जांच की जा रही है.



पांडे ने बताया कि सीईएल में 100 प्रतिशत सरकारी शेयरधारिता नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग को बेचने के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी नहीं किया गया है, क्योंकि आरोपों की जांच की जा रही है. सरकार ने नवंबर में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के तहत सीईएल को नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग को 210 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी थी. लेन-देन मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है.


  

इसके बाद सीईएल कर्मचारी संघ ने निजीकरण के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और विपक्षी कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि कंपनी का कम मूल्यांकन किया जा रहा है. पांडे ने कहा कि विनिवेश पर अंतर-मंत्रालयी समूह आरोपों की जांच कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमने एलओआई को रोक रखा है क्योंकि यह एक विचाराधीन मामला है और कर्मचारी संघ के आरोपों की जांच की जा रही है.


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उन्होंने कहा कि सीईएल की बुक वैल्यू 108 करोड़ रुपये और टर्नओवर करीब 200 करोड़ रुपये है. पांडे ने आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि 108 करोड़ रुपये के बुक वैल्यू वाली कंपनी का मूल्यांकन 1,000 करोड़ रुपये कैसे हो सकता है. किसी साल सीईएल ने 20 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, तो कभी उन्होंने 1 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया.



सीईएल की स्थापना 1974 में की गई थी. नेशनल लेबोरेटरी एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के द्वारा देश में तैयार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा कैसे कर सकते हैं, इसका जिम्मा सीईएल को दिया गया था. सीईएल देश में सोलर फोटोवोल्टिक के क्षेत्र में अग्रणी है, जिसे 1977 में भारत का पहला सोलर सेल और 1978 में पहला सोलर पैनल विकसित करने के साथ-साथ 1992 में भारत का पहला सोलर प्लांट चालू करने का गौरव प्राप्त है.



कंपनी ने 2015 में विशेष रूप से पैसेंजर ट्रेन की छतों पर उपयोग के लिए पहला क्रिस्टलीय लचीला सौर पैनल विकसित किया. इसके सोलर प्रोडक्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्तर के हैं. सीईएल रेलवे क्षेत्र में सिग्नलिंग और दूरसंचार के लिए नए और उन्नत उत्पादों की एक श्रृंखला के विकास पर आगे काम कर रहा है.

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