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महामारी में अपने हिस्से का भुगतान नहीं करने से देश में बढ़े अरबपति, मध्यमवर्ग ने दिए ज्यादा टैक्स

Published On :    18 Jan 2022   By : MN Staff
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देश में पिछले साल गरीबों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि देश में 40 नए अरबपति बने हैं.



नई दिल्ली : कोरोना महामारी के संकट काल में जहां एक ओर भारत में अरबपतियों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं दूसरी ओर गरीबी भी तेजी से बढ़ती जा रही है. ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पिछले साल गरीबों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि देश में 40 नए अरबपति बने हैं. इस बीच भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया के कई देशों से आगे निकल चुका है.


98 सर्वाधिक अमीर भारतीयों के पास करीब 49.27 लाख करोड़ की संपत्ति है, जो निचले तबके के 55.5 करोड़ लोगों की कुल संपत्ति के बराबर है. गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंडिया की रविवार को जारी हुई रिपोर्ट ‘इनइक्यूलिटी किल्स’ में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति वर्ष 2021 में 57.3 लाख करोड़ पर पहुंच गई.



ऑक्सफैम के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा कि रिपोर्ट असमानता की कठोर वास्तविकता की ओर इशारा करती है और प्रतिदिन 21,000 लोग या हर चार सेकंड में एक व्यक्ति को मृत्यु की ओर धकेल देती है. कोरोना महामारी ने लैंगिक समानता को 99 साल से 135 साल पीछे ढकेल दिया है. महिलाओं की सामूहिक कमाई में वर्ष 2020 में 59.11 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. अब 2019 की तुलना में 1.3 करोड़ कम महिलाएं कार्यरत हैं.


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रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना काल में एक ओर जहां गरीबों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है, लेकिन वहीं अमीर लोगों की संपत्ति में जोरदार इजाफा हुआ है. भारत में महामारी के दौरान अरबपतियों की संपत्ति 23.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 53.16 लाख करोड़ रुपये हो गई. इस बीच 4.6 करोड़ से अधिक भारतीयों के 2020 में अत्यधिक गरीबी में जाने का अनुमान है. यह संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व स्तर पर नए गरीबों के आंकड़े का लगभग आधा है. भारत में गरीब एवं अभिवंचितों के हितों की तुलना में अमीरों को बढ़ावा देने वाली चालाकी से संचालित अर्थव्यवस्था से आर्थिक असमानता की स्थिति उत्पन्न हुई.



रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार के राजस्व के हिस्से के रूप में अप्रत्यक्ष कर ऐसे समय में भी बढ़ रहा है, जब पिछले चार वर्षों में कॉरपोरेट टैक्स के अनुपात में गिरावट आई है. 2020-21 के पहले छह महीने में पिछले वर्ष की तुलना में ईंधन पर 33 प्रतिशत ज्यादा कर की बढ़ोतरी की गई जो कि कोरोना के पहले कि अवधि से 79 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, वर्ष 2016 में अमीरों की संपत्ति पर लगाए जाने वाले संपत्ति टैक्स को समाप्त कर दिया गया.



पिछले साल निवेश को आकर्षित करने के लिए कॉरपोरेट करों को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इससे देश के राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी हुई है. यह प्रवृत्ति इस बात को दर्शाती हैं कि गरीब, वंचित एवं मध्यवर्गीय ने महामारी से जूझने के साथ ज्यादा कर अदा किया है. जबकि अमीरों ने महामारी में भी अपने हिस्से का भुगतान नहीं करने के साथ अपने धन में अपार बढ़ोतरी की.



स्वास्थ्य असमानता पर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 98 सबसे अमीर परिवारों पर 4 फीसद संपत्ति कर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को 2 साल से अधिक समय के लिए वित्तपोषित करेगा. शिक्षा असमानता पर अध्ययन में कहा गया है कि भारत में 98 अरबपतियों की संपत्ति पर 1 फीसद टैक्स शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के कुल वार्षिक खर्च को वहन कर सकता है, जबकि उनकी संपत्ति पर अगर 4 फीसद टैक्स लगाया जाय तो 17 साल तक देश के मिड-डे-मील कार्यक्रम या 6 साल तक समग्र शिक्षा अभियान चला सकते हैं. इसी तरह 98 अरबपतियों की संपत्ति पर 4 फीसद कर मिशन पोषण 2.0 को निधि देने के लिए पर्याप्त होगा, जिसमें आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान, किशोरियों के लिए योजना और राष्ट्रीय शिशु गृह योजना शामिल हैं.

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