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सरकारी स्वास्थ्य सेवा से भारतीय असंतुष्ट! आधे परिवार नहीं जाते सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, एनएफएचएस-5 में खुलासा

Published On :    12 May 2022   By : MN Staff
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सर्वे में लोगों के बीमार होने पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठाने के कारण बताए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सबसे सामान्य कारण सरकारी अस्पतालों में देखभाल की खराब गुणवत्ता के चलते लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने से बचते हैं. इसके अलावा दूसरा सबसे आम कारण सरकारी सुविधाओं को पाने में लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है. ऐसे में 46 फीसदी लोगों ने इस कारण से सरकारी सुविधा नहीं ली.



नई दिल्ली : कोरोना काल में देखा गया कि देश की चरमरा चुकी स्वास्थ्य सेवा और डॉक्टरों की भारी कमी के चलते समय पर इलाज और जरूरी सेवाए नहीं मिलने से देशभर में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. यह वास्तव एक बार फिर से सामने आ गया है. अब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 खुलासा हुआ है कि सरकारी अस्पतालों की खराब गुणवत्ता के चलते भारत में आधे परिवार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं जाते हैं.


बता दें कि 2019-21 में कराए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट को स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने पिछले हफ्ते जारी किया था. सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 2019-21 के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग नहीं करने वाले परिवारों का प्रतिशत लगभग 49.9 फीसदी था. यही आंकड़ा 2015-16 में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में 55.1 प्रतिशत था.


गौरतलब है कि 2019-21 के दौरान ऐसे परिवारों का अनुपात सबसे अधिक बिहार में 80 फीसदी, उत्तर प्रदेश 75 प्रतिशत था. वहीं लद्दाख, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे कम 5 प्रतिशत पाया गया. हालांकि उत्तर प्रदेश में सरकारी सुविधा का उपयोग नहीं करने वाले परिवारों में मामूली गिरावट देखी गई. दरअसल 2015-16 में यह अनुपात यूपी में 80.1 फीसदी था.


उत्तराखंड में भी जहां यह अनुपात 2015-16 में 50.5 फीसदी था तो वहीं 2019-21 में बढ़कर 55.7 प्रतिशत हो गया. वहीं इस सर्वे में लोगों के बीमार होने पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठाने के कारण बताए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सबसे सामान्य कारण सरकारी अस्पतालों में देखभाल की खराब गुणवत्ता के चलते लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने से बचते हैं.


इसके अलावा दूसरा सबसे आम कारण सरकारी सुविधाओं को पाने में लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है. ऐसे में 46 फीसदी लोगों ने इस कारण से सरकारी सुविधा नहीं ली. वहीं 40 फीसदी परिवार ऐसे भी हैं जिनके घरों के आस-पास कोई सरकारी सुविधा नहीं है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से स्वास्थ्य सेवा नहीं लेने वाले 48 प्रतिशत परिवारों ने देखभाल की खराब गुणवत्ता को ही सबसे बड़ा कारण बताया. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में 46.9 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 51.7 प्रतिशत परिवारों ने 2019-21 के दौरान सार्वजनिक अस्पतालों का उपयोग किया.


बता दें कि हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने चौकाने वाले मौत के आंकड़े जारी किए है. आंकड़ों से पता चला है कि साल 2020 में भारत में मरने वाले कुल 82 लाख लोगों में से 45 प्रतिशत को मौत के समय कोई चिकित्सा सहायता नहीं मिली थी. इस वर्ष के दौरान कुल पंजीकृत मृत्यु में से केवल 1.3 प्रतिशत को एक योग्य पेशेवर से इलाज मिला था. यह बात भी देश की स्वास्थ्य सेवा के खराब गुणवत्ता को दर्शाती है.


रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के दौरान कुल पंजीकृत मौतों में से लगभग 1.3 प्रतिशत ने योग्य एलोपैथिक पेशेवरों और अन्य डॉक्टरों से इलाज कराया था जबकि 45 प्रतिशत को मृत्यु के समय कोई चिकित्सा सेवा ही नहीं मिली थी. चिकित्सा सुविधा की अनुपस्थिति में 2019 में मरने वालों की संख्या 35.5 प्रतिशत थी. आंकड़ों के अनुसार, कुल मौतों में से करीब 28 प्रतिशत मौतें अस्पतालों में हुई हैं और अन्य जगहों पर इलाज कराने वालों के मुकाबले अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों में मृत्यु दर अधिक है. यह बात भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के खराब गुणवत्ता को उजागर करती है.

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