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हिंदी सीखने से रोजगार मिलता तो हिंदी भाषी यहां पानी-पूरी क्यों बेच रहे? तमिलनाडु के मंत्री का तंज

Published On :    14 May 2022   By : MN Staff
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कोयंबटूर स्थित भरथियार विश्वविद्यालय के दीक्षांत में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, भाषा के तौर पर हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी महत्वपूर्ण है. हिंदी सीखने वालों के लिए नौकरी मौजूद होने के संबंध में जोर देने वालों पर निशाना साधते हुए मंत्री ने पूछा कि अभी शहर में ‘पानी पुरी’ कौन लोग बेच रहे हैं. उनका इशारा स्पष्ट रूप से इस काम में शामिल हिंदी भाषी लोगों की ओर था.



नई दिल्ली : भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार हिंदी के अखिल भारतीय इस्तेमाल पर जोर दे रही है, जबकि दक्षिण के राज्यों में इसका कड़ा विरोध हो रहा है. अब तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री के पोनमुडी ने हिंदी और हिंदी भाषियों को लेकर एक बयान दिया है. हिंदी भाषा को लेकर छिड़ी बहस के बीच तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमें बताया गया था कि हिंदी सीखने से नौकरी मिलेगी, मिली क्या? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोयंबटूर में हिंदी भाषी पानी पुरी बेचते हैं. उन्होंने अंग्रेजी को ताकतवर और मूल्यवान भाष करार दिया.


कोयंबटूर स्थित भरथियार विश्वविद्यालय के दीक्षांत में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, भाषा के तौर पर हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी महत्वपूर्ण है. हिंदी सीखने वालों के लिए नौकरी मौजूद होने के संबंध में जोर देने वालों पर निशाना साधते हुए मंत्री ने पूछा कि अभी शहर में ‘पानी पुरी’ कौन लोग बेच रहे हैं. उनका इशारा स्पष्ट रूप से इस काम में शामिल हिंदी भाषी लोगों की ओर था.


शिक्षा मंत्री के पोनमुडी ने कहा कि जब दक्षिणी राज्य में लोग तमिल और अंग्रेजी सीख रहे हैं तो दूसरी भाषाओं की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में दो भाषाएं हैं- एक अंग्रेजी जो अंतरराष्ट्रीय भाषा है और दूसरी तमिल, जो स्थानीय भाषा है. दीक्षांत समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि भी मंच पर मौजूद थे.


पोनमुडी ने कहा कि उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल के मुद्दे पर तमिलनाडु की भावनाओं को उजागर करने के लिए किया और राज्यपाल इससे केंद्र को अवगत करा देंगे. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लंबे समय से अंग्रेजी और तमिल प्रचलन में हैं और यह कायम रहेगा वहीं छात्र हिंदी सहित अन्य भाषाएं सीखने के खिलाफ नहीं हैं. मंत्री ने कहा, कई लोगों ने कहा कि अगर आप हिंदी सीखते हैं तो आपको नौकरी मिल जाएगी. क्या ऐसी स्थिति है ... यहां कोयंबटूर में देखें, पानी-पुरी कौन बेच रहे हैं. ये वे (हिंदी भाषी) लोग हैं.


शिक्षा मंत्री के पोनमुडी ने दावा किया कि तमिलनाडु भारत में एजुकेशन सिस्टम में सबसे आगे है और तमिल छात्र कोई भी भाषा सीखने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी एक वैकल्पिक विषय होना चाहिए, अनिवार्य नहीं. छात्रों को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की अच्छी बातों को लागू किया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार दो भाषा प्रणाली लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है.


बता दें कि केंद्र सरकार हिंदी के अखिल भारतीय इस्तेमाल पर भले ही जोर दे रही हो, लेकिन देश में अमिरां के लडके अंग्रजी भाषा और अंग्रेजी स्कूल में पढ़ते है. वे अंग्रेजी पढ़कर विदेश में नौकरी करने जाते है. मगर सरकार गरीबों को हिंदी भाषा में पढ़ने का ज्ञान दे रही है. जब की हिंदी भाषा में कोई भविष्य नहीं है. आलम यह है कि जिन नए लोगों ने इंजिनियरिंग की पढ़ाई की है और जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती उन्हें कंपनियां नौकरी नहीं दे रही है.


 जब यह हाल है तो हिंदी भाषा पढ़ने का क्या मतलब है. अगर हिंदी भाषा में भविष्य होता तो अमिरों के बच्चे भी हिंदी भाषा में पढ़ते. लेकिन ऐसा नहीं है. उन्हें अच्छी तरह से पता है कि हिंदी सिखने बड़ी नौकरियां मिलने वाली नहीं है, इसलिए वे अंग्रजी में पढ़कर विदेश में या देश में बड़े पदों पर नौकरियां करते है और बहुजन समाज के बच्चों को हिंदी में सिखने पर जोर दिया जा रहा है.

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