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2021-22 के दौरान फ्रॉड मामलों में 51 फीसद की गिरावट, फिर भी 40 हजार करोड़ की लगी चपत

Published On :    16 May 2022   By : MN Staff
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आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के बीच धोखाधड़ी के मामलों में 51 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है. केंद्रीय बैंक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत एक आवेदन के जवाब में कहा कि 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में 81,921.54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी थी. हालाकि धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में पैसों के हिसाब से गिरावट नहीं हुई है. 2021-22 में बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई. जिसमें कुल 7,940 धोखाधड़ी के मामले हैं, जबकि प्रथम वर्ष साल 2021 में 9,933 मामले दर्ज किए गए थे.



नई दिल्ली/दै.मू.समाचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्च में बीजेपी की सरकार आने के बाद बैंक फ्रॉड के मामले बढ़े है, जिससे सरकारी बैंकों को हजारों करोड़ रूपये की चपत लगी है. विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकशी जैसे लोग सरकारी बैंकों को हजारों करोड़ चुना लगाकर विदेश भाग गए. हालांकि सरकार का कहना है कि उनसे कुछ कर्ज वसूल किया गया. इस बीच रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गये फ्रॉड के आंकडों में कहा गया है कि सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है. लेकिन इसके बाद भी करीब 40,295.25 करोड़ रुपये की चपत लगी है. सूचना के अधिकार यानी आरटीआई में यह खुलासा हुआ है.


आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के बीच धोखाधड़ी के मामलों में 51 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है. केंद्रीय बैंक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत एक आवेदन के जवाब में कहा कि 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में 81,921.54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी थी. हालाकि धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में पैसों के हिसाब से गिरावट नहीं हुई है. 2021-22 में बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई. जिसमें कुल 7,940 धोखाधड़ी के मामले हैं, जबकि प्रथम वर्ष साल 2021 में 9,933 मामले दर्ज किए गए थे. आरबीआई ने यह जानकारी मध्य प्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में दी है.


वित्त वर्ष 2022 के दौरान पीएसबी द्वारा रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी पर आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, शहर स्थित पंजाब नेशनल बैंक सबसे अधिक 9,528.95 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई है, जहां 431 ऐसी घटनाएं शामिल थीं. देश के सबसे बड़े कर्जदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 4,192 मामलों में 6,932.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी है, जो छोटे मूल्य के धोखाधड़ी की घटनाओं को दर्शाती है. अधिक कीमत की धोखाधड़ी होने वाले बैंको में बैंक ऑफ इंडिया ने 5,923.99 करोड़ रुपये (209 मामले), बैंक ऑफ बड़ौदा ने 3,989.36 करोड़ रुपये (280 मामले), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 3,939 करोड़ रुपये (627 मामले) और केनरा बैंक ने सिर्फ 90 मामलों में 3,230.18 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी है.


इसके अलावा इंडियन बैंक को 211 मामलों में 2,038.28 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा. इंडियन ओवरसीज बैंक 1,733.80 करोड़ रुपये (312), बैंक ऑफ महाराष्ट्र 1,139.36 करोड़ रुपये (72 मामले), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 773.37 करोड़ रुपये, यूको बैंक ने 611.54 करोड़ रुपये (114 करोड़) और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 159 घटनाओं में 455.04 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी है.



बताते चले कि धोखाधड़ी की ज्यादातर घटनाएं उधारी देने में ही होती हैं. ऐसे मामलों में या तो नियमों से ज्यादा कर्ज दिया जाता है या जमानत नहीं रखी जाती है. अमेरिका में हर दिन उधारी से जुड़े मामलों में असेसमेंट होता है, जो भारतीय बैंकों में नहीं किया जाता है. बैंक धोखाधड़ी की वजह से पिछले सात वर्षों में देश को हर रोज 100 करोड़ रुपये की चपत लगी है. आरबीआई के मुताबिक, देश में बैंकिंग धोखाधड़ी के 83 फीसदी मामले केवल पांच राज्यों में हैं. इसमें 50 फीसदी के साथ महाराष्ट्र शीर्ष पर है, जबकि दिल्ली दूसरे स्थान पर है. उसके बाद सबसे ज्यादा बैंकिंग धोखाधड़ी तेलंगाना, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में है. आंकड़ों के मुताबिक, एक अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2021 तक सभी राज्यों में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी हुई. इनमें इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.

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