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पटना हाइकोर्ट ने जतायी आरबीआई से कड़ी नाराजगी, कहा- अधिकारियों कि लापरवाही से बढ़ रहे मनी लॉन्ड्रिंग के मामले

Published On :    17 May 2022   By : MN Staff
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कोर्ट ने कहा कि आरबीआइ द्वारा कानून में ढील देने का नतीजा है कि मनी लॉन्ड्रिंग का केस बढ़ रहा है. शातिर लोग इस कानून का फायदा उठा गरीब लोगों का पैसा अपने यहां जमा कराते हैं और कुछ दिनों के बाद पूरा पैसा ले फरार हो जाते हैं. दूसरी ओर पैसा जमा कराने वाले एजेंट फंस जाते हैं. लोग उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा देते हैं, जबकि एजेंट अपने कमीशन के लोभ में लोगों का पैसा जमा करवाते हैं.



पटना : राज्य में बढ़ रहे मनी लॉन्ड्रिंग के मामले पर सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने आरबीआई के खिलाफ सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि आरबीआई के लचीले कानून और अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज सैकड़ों निवेशक अपने जमा पैसे के लिए दर-दर भटक रह हैं. प्रदेश में मनी लॉन्ड्रिंग के केस बढ़ते जा रहे हैं. मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर आरबीआई को गंभीरता दिखाने की बात करते हुए कोर्ट ने कहा कि संस्था को इसके प्रति सजग होने की जरुरत है.


कोर्ट ने कहा कि आरबीआइ द्वारा कानून में ढील देने का नतीजा है कि मनी लॉन्ड्रिंग का केस बढ़ रहा है. शातिर लोग इस कानून का फायदा उठा गरीब लोगों का पैसा अपने यहां जमा कराते हैं और कुछ दिनों के बाद पूरा पैसा ले फरार हो जाते हैं. दूसरी ओर पैसा जमा कराने वाले एजेंट फंस जाते हैं. लोग उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा देते हैं, जबकि एजेंट अपने कमीशन के लोभ में लोगों का पैसा जमा करवाते हैं.


बिहार में करीब सात सौ निधि कंपनियां है जो लोगों से बैंक की तरह पैसा जमा करा रही हैं, जबकि निधि कंपनी पैसों का लेनदेन नहीं कर सकती है. बावजूद इसके निधि कंपनी पैसों का लेनदेन धड़ल्ले से कर रही हैं. आरबीआई का इस पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं होने का फायदा निधि कंपनी उठा रही हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बिना लाइसेंस निधि कंपनी पैसों का लेनदेन नहीं कर सकती, इसके बावजूद निधि कंपनी पैसों का लेनदेन बेहिचक कर रही है. कोर्ट ने बिहार में बढ़ रहे मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर एक जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश हाइकोर्ट प्रशासन को दिया है.


हाईकोर्ट प्रशासन ने लोकहित याचिका दर्ज करने के लिए मुख्य न्यायाधीश संजय करोल से अनुमति देने के लिए संबंधित संचिका को भेजा है. मुख्य न्यायाधीश से अनुमति मिलते ही हाइकोर्ट प्रशासन द्वारा एक लोकहित याचिका हाईकोर्ट में दायर कर कार्रवाई शुरू की जायेगी. आगे की सुनवाई अगली तारीख पर होगी.


दरअसल, आरबीआई के लचीले कानून और अधिकारियों की लापरवाही के कारण पिछले कई वर्षों के दौरान लोगों के करोड़ रुपये लेकर कई कंपनी भाग चुकी हैं. वहीं, सुबे में सबसे बड़ा मामला सहारा ग्रूप के खिलाफ है. जहां जमा अपने पैसों के लिए अब तक करीब 342 निवेशक दर दर भटक रहे हैं. बीते कई सालों से पटना हाईकोर्ट में सहारा ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ मामले की सुनवाई चल रही है.


बीते 27 अप्रैल को पटना हाईकोर्ट ने सहारा इंडिया के विभिन्न स्कीमों में उपभोक्ताओं द्वारा जमा किये पैसे के भुगतान को लेकर सहारा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक सुब्रत रॉय को 11 मई को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिया था, लेकिन वो कोर्ट में पेश नहीं हुए. उधर परेशान निवेशक अपने एजेंट से मारपीट पर उतारू हैं.


बता दें कि इससे पहले 23 मार्च को आरबीआई की ओर से पटना हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामा में बताया गया था कि राज्य का कोई भी निधि बैंक उसके नियंत्रण में नहीं है. यहां तक कि आरबीआई निधि बैंक के लिए लाइसेंस भी जारी नहीं करती है. वहीं, सरकारी वकील द्वारा कोर्ट को बताया गया था कि राज्य में 438 निधि बैंक कंपनी रजिस्टर्ड हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में निधि कंपनी धड़ल्ले से पैसों के लेन-देन के कारोबार में संलिप्त हैं. कई निधि कंपनी लोगों का पैसा लेकर भाग चुके हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.

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