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महंगाई ने तोड़ा पिछले एक दशक का रिकॉर्ड, खाने-पीने की चीजें 4.5 से 24 फीसदी तक महंगी

Published On :    18 May 2022   By : MN Staff
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जारी आकड़ों के अनुसार, अप्रैल माह में खाने- पीने की चीजों पर महंगाई की दर 8.35 फीसदी रही जो मार्च में 8.06 फीसदी थी. खाद्य पदार्थों में महंगाई की बड़ी वजह सब्जियों के दाम में इजाफा होना है. अप्रैल माह में सब्जियों में महंगाई की दर 23.24 फीसदी रही जो मार्च में 19.88 फीसदी थी. आलू के दामों में 19.84 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके साथ फलों के दामों में भी 10.89 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 10.62 फीसदी रही. वहीं, गेहूं के कीमत में 10.70 फीसदी का उछाल देखा गया जो पिछले महीने करीब 14.04 फीसदी था. अंडे, मीट और मछली के दामों में 4.50 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 9.42 फीसदी था.



नई दिल्ली : कोरोना काल में रोजगार गंवाने के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर लोगों का आसमान छूती महंगाईने जिना मुहाल कर दिया है. देश में लगातार बढ़ती महंगाई हर दिन नए रिकॉर्ड कायम कर रही है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अप्रैल माह में थोक मुद्रास्फीति 15.08 की दर पहुंच गई है, जो लगभग एक दशक का उच्चतम स्तर है.


आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक मार्च में 14.55 के स्तर पर थी जबकि फरवरी में यह 13.11 फीसदी थी. वहीं, पिछले साल अप्रैल में यह 10.74 फीसदी थी. यह लगातार 13 वां महीना है जब थोक महंगाई दोहरे अंक में रही है. सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि अप्रैल में महंगाई की उच्च दर मिनरल ऑयल, जिंसों, क्रूड पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खाद्य पदार्थों, गैर- खाद्य पदार्थों, और केमिकल उत्पादों की कीमत में बढ़ने के कारण रही हैं.


जारी आकड़ों के अनुसार, अप्रैल माह में खाने- पीने की चीजों पर महंगाई की दर 8.35 फीसदी रही जो मार्च में 8.06 फीसदी थी. खाद्य पदार्थों में महंगाई की बड़ी वजह सब्जियों के दाम में इजाफा होना है. अप्रैल माह में सब्जियों में महंगाई की दर 23.24 फीसदी रही जो मार्च में 19.88 फीसदी थी. आलू के दामों में 19.84 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके साथ फलों के दामों में भी 10.89 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 10.62 फीसदी रही. वहीं, गेहूं के कीमत में 10.70 फीसदी का उछाल देखा गया जो पिछले महीने करीब 14.04 फीसदी था. अंडे, मीट और मछली के दामों में 4.50 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 9.42 फीसदी था.


फ्यूल और पावर सेक्टर के दामों में 38.66 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 34.52 फीसदी था. हाई स्पीड डीजल के दाम में अप्रैल में 66.14 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि इस दौरान एलपीजी के दाम में
38.48 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की कीमत में 10.85 फीसदी का इजाफा हुआ है जो मार्च में 10.71 फीसदी थी.


बताते चले कि बढ़ती महंगाई को लेकर चौतरफा हाहाकार है मगर इसे रोकने के सरकार के प्रयास विफल होते नजर नहीं आ रहे. तेल की कीमतों पर काबू पाने के प्रयास बेनतीजा साबित हो रहे हैं. खुदरा महंगाई लगातार बढ़ने से लोगों को अपने रोजमर्रा के खर्चे में कटौती करनी पड़ रही है. पांच खरब की अर्थव्यवस्था बनाने का दम भरने वाली सरकार के सामने अब महंगाई पर काबू पाने का कोई उपाय भी नजर नहीं आ रहा.


इंधन के बढ़ते दाम महंगाई में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है. ढुलाई महंगी होने से वस्तुओं की कीमतें कई गुना बढ़ जाती हैं. मगर सरकार तेल के दाम को काबू में नहीं कर पा रही. पिछले दिनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वैट में कटौती करने की अपील करने वाली केंद्र सरकार कई साल से तेल पर ऊंचा उत्पादन शुल्क वसूल रही है, उसमें कटौती की बात नहीं कर रही है.


महंगाई की मार लोगों पर इसलिए भी अधिक पड़ रही है कि उनकी कमाई नहीं बढ़ रही. बहुत सारे लोग अपना रोजगार-नौकरी गंवा चुके हैं. कई लोग अपने भविष्य निधि से पैसे निकलवा कर गुजारा कर रहे है. ऐसे में अगर वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं तो उनका जीना दूभर हो जाता है. खुद सरकार का दावा है कि वह देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन बांट रही है. यानी इतने लोगों के हाथ में कोई रोजगार नहीं है. इसलिए सरकार को महंगाई पर काबू पाने के लिए विचार करना चाहिए. हद तो तब हो गई जब महंगाई को लेकर सत्ता में बैठे लोग सड़क पर उतर आते थे. आज वहीं लोग इस पर बोल नहीं रहे है बल्कि महंगाई का समर्थन कर रहे है.

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