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योगी सरकार ने नए मदरसों का सरकारी अनुदान किया बंद, अखिलेश सरकार की लाई नीति को भी कर दिया खत्म

Published On :    18 May 2022   By : MN Staff
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दरअसल अखिलेश सरकार द्वारा साल 2016 में मदरसों को अनुदान देने के लिए नीति लागू की गई थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है. इस नीति के तहत साल 2003 तक मान्यता पाने वाले 146 मदरसों को सपा सरकार ने अनुदान देने का निर्णय लिया था. हालाँकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में किसी मदरसे को ये अनुदान नहीं मिला.



लखनऊ : सबका साथ, सबका विकास का दम भरने वाली यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार यूपी में किस तरह मदरसों के साथ अन्याय कर रही है, इसका एक वाकया सामने आया है. योगी सरकार की कैबिनेट में फैसला लिया गया कि अब उत्तर प्रदेश में नए मदरसों को किसी तरह का अनुदान नहीं दिया जाएगा. यही नहीं तो योगी सरकार ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर अखिलेश सरकार की पुरानी नीति को भी खत्म कर दिया.


17 मई को कैबिनेट ने नए मदरसों को अनुदान सूची से बाहर करने का निर्णय लिया था, जिसे सरकार ने मान लिया है. वर्ष 2003 तक मान्यता पाने वाले मदरसों को अनुदान देने के लिए 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार में नीति बनाई गई थी. इसके तहत अखिलेश सरकार 100 मदरसों को अनुदान देना शुरू किया था.


  बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 16461 मदरसे हैं. इनमें से 559 मदरसों को इस समय सरकारी अनुदान दिया जा रहा है. इसी अनुदान से इन मदरसों के शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मचारियों को वेतन मिलता है. मंगलवार (17 मई) को हुई कैबिनेट बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इस प्रस्ताव को पास किया कि आगे से किसी भी नए मदरसे को अनुदान नहीं मिलेगा. 2017 में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद एक भी मदरसे को अनुदान नहीं दिया गया था.


दरअसल अखिलेश सरकार द्वारा साल 2016 में मदरसों को अनुदान देने के लिए नीति लागू की गई थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है. इस नीति के तहत साल 2003 तक मान्यता पाने वाले 146 मदरसों को सपा सरकार ने अनुदान देने का निर्णय लिया था. हालाँकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में किसी मदरसे को ये अनुदान नहीं मिला. इसके बाद सपा सरकार की नीति का हवाला देते हुए मदरसा प्रबंधक हाई कोर्ट गए और बात रखी कि वे हर मानक को पूरा कर रहे हैं तो उन्हें अनुदान क्यों नहीं मिल रहा. हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए मऊ के एक मदरसे मामले में सरकार को अनुदान देने पर विचार करने को कहा. लेकिन अब कैबिनेट ने सपा सरकार की उस नीति को ही समाप्त कर दिया है, जिसके तहत मदरसों को अनुदान दिया जाता था.


इस तरह के अनुदान से मदरसों के 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के अलावा प्रधानाचार्य व एक लिपिक का वेतन दिया जाता रहा है. आलिया में हाईस्कूल स्तर की पढ़ाई होती है, जबकि फौकानिया में जूनियर हाईस्कूल और तहतानिया में प्राइमरी स्तर तक की पढ़ाई होती है.


इससे पहले राज्य के मदरसों में महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों की वीर गाथा का पाठ पढ़ाने का निर्णय लिया गया था. इसके माध्यम से आजादी में संघर्ष करने वाले लोगों की जीवन गाथा से मदरसों में पढ़ाई करने वाले बच्चों को रूबरू कराया जाएगा. राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मदरसों में पढ़ाई करने वाले बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना भरना है.


हाल ही में सरकार ने प्रदेश के सभी मदरसों में रोजाना राष्ट्रगान का गायन कराने का निर्देश दिया था. उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार एसएन पांडे ने नौ मई को सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को इस बारे में आदेश जारी किया था. आदेश में कहा था कि बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप नए शिक्षा सत्र से सभी मदरसों में प्रार्थना के समय राष्ट्रगान अनिवार्य कर दिया गया है.

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