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शिक्षा मंत्री की बेटी को झटका, हाई कोर्ट ने दिए बर्खास्त करने के निर्देश, लौटाना होगा 41 महीने का वेतन

Published On :    21 May 2022   By : MN Staff
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नौकरी से वंचित बबीता बर्मन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि शिक्षा राज्यमंत्री की बेटर का मेरिट सूची में नाम नहीं होने के बावजूद उनकी एक स्कूल में शिक्षक के तौर पर नियुक्ति की गई. आरोप है कि मंत्री ने प्रभाव दिखाकर गैरकानूनी तरीके से अपनी बेटी अंकिता की नियुक्ति की थी. हाई कोर्ट ने कहा है कि अंकिता व उनके परिवार के किसी भी सदस्य को स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया जाए. वह अब से शिक्षिका के तौर पर अपना परिचय भी नहीं दे पाएंगी.



नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री की बेटी को कोलकता हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. शिक्षा मंत्री की बेटी की नौकरी पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा राज्य मंत्री परेश चन्द्र अधिकारी की बेटी की सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में बतौर शिक्षक नियुक्ति को रद्द कर दिया और उनसे 41 महीने की नौकरी के दौरान प्राप्त सारा वेतन लौटाने का निर्देश दिया है. पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले का मामला कोर्ट में है. भर्ती घोटाले से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंत्री की पुत्री को नौकरी से निकालने का आदेश दिया है.  


हाईकोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने निर्देश दिया है कि उन्हें अब तक का भुगतान किया गया सभी वेतन वापस लौटाना होगा. कोर्ट ने शिक्षा मंत्री की बेटी अंकिता अधिकारी को दो किश्त में वेतन लौटाने का आदेश दिया है. जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा कि अंकिता को अपना 41 महीने का वेतन दो किस्तों में चुकाना होगा. पहली किस्त 6 जून को और दूसरी किस्त 8 जुलाई को देनी होगी. कोर्ट ने अंकिता को नौकरी से निकालने का आदेश देते हुए कहा कि वह शिक्षिका के तौर पर अपनी पहचान भी नहीं बता सकतीं. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वह अब स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकती.


बता दें, अंकिता के खिलाफ आरोप थे कि उसने अपने पिता के प्रभाव का उपयोग करके अवैध रूप से शिक्षण कार्य किया. बबीता सरकार नाम की एक स्कूल सर्विस कमीशन परीक्षार्थी ने शिकायत की. अंकिता पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल सर्विस कमीशन की मेरिट की सूची में अपना नाम चढ़वाया और इसके बूते शिक्षक की सरकारी नौकरी हासिल की.


नौकरी से वंचित बबीता बर्मन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि शिक्षा राज्यमंत्री की बेटर का मेरिट सूची में नाम नहीं होने के बावजूद उनकी एक स्कूल में शिक्षक के तौर पर नियुक्ति की गई. आरोप है कि मंत्री ने प्रभाव दिखाकर गैरकानूनी तरीके से अपनी बेटी अंकिता की नियुक्ति की थी. हाई कोर्ट ने कहा है कि अंकिता व उनके परिवार के किसी भी सदस्य को स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया जाए. वह अब से शिक्षिका के तौर पर अपना परिचय भी नहीं दे पाएंगी. इसके साथ ही बबीता को उक्त पद पर प्राथमिकता देने को कहा है.


नवंबर 2017 में अंकिता का नाम एसएससी परीक्षा की दूसरी मेरिट लिस्ट में आया था. पहली मेरिट लिस्ट में टॉप 20 में नहीं रहीं अंकिता को अवैध तरीके से दूसरी लिस्ट में पहले स्थान पर लाया गया. अंकिता ने एसएससी उम्मीदवार से 16 अंक कम प्राप्त किए जो मेरिट सूची में 20 वें नंबर पर थी. उनका स्कोअर 77 था. जहां 20 नंबर की प्रत्याशी बबीता का स्कोअर 77 था. अंकिता का नाम मेरिट लिस्ट में डालकर बबीता ने नौकरी का मौका गंवा दिया. उच्च न्यायालय ने अंकिता की नियुक्ति की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. अदालत ने आदेश दिया कि अंकिता के पद को खाली रखा जाए और उसे याचिकाकर्ता के लिए निर्धारित किया.


वहीं हाल ही में एसएससी से इस्तीफा देने वाले निवर्तमान अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार ने घटना के बारे में अदालत को सूचित करने के तुरंत बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य के शिक्षा मंत्री परेश को सीबीआई के सामने पेश होने को कहा. बेटी की गैर-कानूनी तरीके से भर्ती को लेकर आज दिन में पूछताछ के लिए मंत्री सीबीआई के दफ्तर पहुंचे थे.

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