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बामसेफ ने किया गद्दारों से निपटने का फैसला! शुरू किया ‘गद्दारों से सावधान, राष्ट्रीय अभियान!’

Published On :    18 Jun 2022   By : MN Staff
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वामन मेश्राम के अगुवाई वाले ‘राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा’ की सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ महागठबंधन की चर्चाएं चल रही थी, तब से कुछ संगठन विरोधी लोग सक्रिय हुए थे. उन लोगों के पीछे वी.एल.मातंग का मास्टरमाइंड काम कर रहा था.



पूना : पिछले कुछ महिनों से वामन मेश्राम के नेतृत्व में चल रहे बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ की कुछ घटनाएं सामने आई. हालांकी इसका संगठन पर कोई असर नहीं हुआ. कार्यकर्ताओं में भ्रम फैला कर उन्हें संगठन से तोड़ने की साजिश हुई, जिसका कुछ लोग शिकार भी हुए. इन घटनाओं से सबक सिखते हुए बीते 11 व 12 जून को नागपुर मे हुई बामसेफ की राष्ट्रीय आम बैठक में कई कई अहम फैसले लिए गए. उनमें एक अहम फैसला लिया गया. जिसको नाम दिया गया ‘गद्दारों से सावधान, राष्ट्रीय अभियान!’


यूपी चुनाव के दौरान जब वामन मेश्राम के अगुवाई वाले ‘राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा’ की सपा, कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ महागठबंधन की चर्चाएं चल रही थी, तब से कुछ संगठन विरोधी लोग सक्रिय हुए थे. उन लोगों के पीछे वी.एल.मातंग का मास्टरमाइंड काम कर रहा था. मातंग वैसे बामसेफ का काफी वरिष्ठ प्रचारक था, लेकिन यूपी पुलिस और जेल जाने कि डर से उन्होंने संगठन को तोड़ने का षडयंत्र रचा.


दरअसल, 2017 के यूपी चुनाव के दौरान उन्नाव में रैली को सम्बोधित करते हुए मातंग ने देश के राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दायर हुआ था. बामसेफ संगठन के कानूनी सलाहकार एड.राजकुमार थोरात के मुताबिक मातंग पर लगी धाराएं इतनी गंभीर नहीं थी कि उनको जमानत नहीं मिल पाती. मातंग को जमानत मिल जाती. शर्त केवल इतनी थी की जमानत के लिए उन्हें खुद हाजिर होना था. लेकिन ड़र के चलते वह पुलिस से सामना करने से हमेशा बचते रहें. पुलिस की अख़बारों में आती सुर्खियों ने मातंग के मन में डर को और भी मजबूत कर दिया था.


वी.एल.मातंग केवल यूपी पुलिस से ही नहीं बल्कि अपने गृहराज्य गुजरात पुलिस से भी ड़रते थे. साल 2018 के अक्टूबर महिने में वामन मेश्राम की एक बड़ी रैली अहमदाबाद में होने जा रही थी. उसे कवर करने के लिए एमएनटीवी और दैनिक मूलनिवासी नायक की टीम वहां पहुंची. इसके बाद पता चला की पुलिस ने उनके रैली को परमिशन देने से इनकार कर दिया. वामन मेश्राम पुलिस की इस असंवैधानिक कार्रवाई के विरोध में ‘जेल भरा’े आंदोलन करने जा रहे थे. इसके लिए नजदीकी चांदखेडा पुलिस थाने का चुनाव किया गया था.


वामन मेश्राम अपने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस थाने की ओर बढ़ रहे थे. उनके साथ वी.एल.मातंग भी थे. थाने के पास पहूंचते ही कार्यकर्ताओं कि पुलिस के साथ झड़प हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज शुरु किया और इकठ्ठा हुए सभी कार्यकर्ताओं को तितर-बितर कर दिया. लाठीचार्ज से पहले वी.एल.मातंग वामन मेश्राम के साथ थे, लेकिन जैसे ही लाठीचार्ज शुरु हुआ मातंग वहां से भाग निकला. उस लाठीचार्ज में कई सारे कार्यकर्ताओं को चोंटें आई, यहां तक महिलाओं ने भी पुलिस का डटकर सामना किया, मगर मातंग वहां से भाग गया. लाठीचार्ज का वीडियो आज भी एमएनटीवी के फेसबुक पेज पर उपलब्ध है.


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मातंग के इसी ड़र का शासक वर्ग के लोगों ने फायदा उठाया और बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने के लिए उनका इस्तेमाल किया. बात केवल पुलिस के ड़र की नहीं है. बामसेफ संगठन में रहकर भी वी.एल.मातंग का व्यवहार या उनका आचरण सही नहीं बल्कि भ्रष्ट था. इसकी जानकारी नागपुर की बैठक में बामसेफ के वरिष्ठ कार्यकर्ता बि.के.केनिया ने दी है. केनिया के मुताबिक मातंग का असली नाम लालन है, मातंग तो एक महान विरासत है, इसलिए आगे से हम वी.एल.मातंग को लालन के नाम से उद्बोधित करेंगे.
साल 2003 में विभाजन के चलते बामसेफ दो तुकड़ो में बट गया. कुछ कार्यकर्ता वामन मेश्राम के साथ थे तो कुछ बीडी बोरकर के साथ. केनिया के मुताबिक, लालन(वी.एल.मातंग) दिखावे के लिए वामन मेश्राम के साथ थे मगर वह असल में बी.डी.बोरकर के ही साथ थे. जब बि.के.केनिया वामन मेश्राम को लालन के बारे में बताने लगे, तो लालन ने केनिया के ही विरोध में माहौल बनाना शुरु कर दिया था, सारा कच्छ केनिया के विरोध में खड़ा कर दिया था. लेकिन बि.के.केनिया ने लालन का विरोध करना बंद नहीं किया.


केनिया मे नागपुर की आम सभा में लालन के भ्रष्टाचार कि सबुतों के साथ जानकारी दी. केनिया ने कहा, लालन यानी वी.एल.मातंग और उनका भांजा नारायण भाई गरवा दोनों ने मिलकर 30 से 40 लाख रुपयों की जमीन खरीदी है. जब की नारायण गरवा के पास कोई काम-धंदा नहीं है. अगर सोर्स ऑफ इनकम ही नहीं है तो लाखों रुपयों की प्रॉपर्टी कैसे खरीदी? यह सवाल भी केनिया ने सभा में उपस्थित किया. इतना ही नहीं केनिया ने ये भी बताया की रियल टाउनशिप-2 के नाम से उनका लगभग 40 करोड़ रुपयों का प्रोजेक्ट भी चल रहा है और सतीश भालेराव नाम का व्यक्ति बुकींग करने के लिए भी तैयार है. इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में भी लालन और उनका भांजा नारायण गरवा ने प्लॉट भी खरीद रखा है. केनिया ने कहा, इतने सारे पैसों कि रिकवरी होनी चाहिए. इस पर वामन मेश्राम ने कहा, केवल रिकवरी ही नहीं बल्कि इसके लिए उन्हें जेल में डा़लने का काम करेंगे.


वी.एल.मातंग उर्फ लालन और उनके साथ गए कुछ लोगों ने बामसेफ और वामन मेश्राम के बारे में लोगों के अंदर भ्रम पैदा करने की कोशिश की है कि, वामन मेश्राम ने कांग्रेस के साथ समझौता किया है. इसके लिए लालन अँड कम्पनी साल 2019 के लोकसभा चुनाव पूर्व का एक वाकया बताते है. उसके अनुसार वामन मेश्राम लालन को लेकर कांग्रेस मुख्यालय में गए और वहां सीसीटीवी देखे और घबरा के वापस आ गए. ऐसा सवाल जब उपस्थित कार्यकर्ताओं से वामन मेश्राम से पूंछा गया तो उन्होंने आम सभा को पूरी हकीकत बताई.


उन्होंने बताया, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पिता कांग्रेस का प्रस्ताव लेकर दो बार मेरे पास आये थे. तिसरी बार उन्होंने कहा की कब तक कांग्रेस ही आपके पास आयेगी. आप भी कभी कांग्रेस दफ्तर आइए. इस पर वामन मेश्राम अपने साथ लालन, पी.ए.मुकेश और अपनी पत्नि निशा मेश्राम को लेकर गाड़ी से कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय गए. कांग्रेस वामन मेश्राम को 40 सीटें देना चाहती थी. ये जानकारी होने पर लालन ने निशा मेश्राम से कहा की 40 में से एक सीट पर मै चुनाव लडूंगा और उसके लिए 10 लाख रुपयों का इंतजाम करने के लिए निशा मेश्राम को कह दिया. निशा मेश्राम ने तपाक से जवाब दिया की आपको पैसा देने के बजाए मै मेरी मां को ही चुनाव में उतारूंगी. वामन मेश्राम ने आगे कहा, जो लालन खुद कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने की बात कर रहा था, वहीं मुझ पर कांग्रेस के साथ समझौते का आरोप लगा रहा है.


इस प्रकार से समाज में भ्रम फैलाने वाले और संगठन विरोधी गद्दारों एवं भगोड़ो के विरोध में बामसेफ के द्वारा एक अभियान शुरु कर दिया गया है. जिसका नाम है ‘गद्दारों से सावधान, राष्ट्रीय अभियान!’ इसके तहत देश के 500 जिलों में प्रशिक्षण शिबिरों का एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरु किया जा रहा है. इसके तहत कम से कम 500 जिलों में जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिबिरों का आयोजन किया जायेगा और संगठन विरोधी लोगों ने जो भ्रांतियां और गंदगी समाज में फैलाई है उसे दूर कर समाज को संगठन और आंदोलन से जोड़ा जायेगा. दुसरा अभियान के तहत जिन जिलों में बामसेफ संगठन नहीं पहुंचा है वहां संगठन की विचारधारा पहूंचाने के लिए 200 कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी लगाई जायेगी. तिसरा अभियान जो लोग संगठन से पैसा लेकर भाग गए है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए बामसेफ संगठन के कानूनी सलाहकार एवं इंडियन लीगल प्रोफेशनल असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड.राजकुमार थोरात को आदेश दिया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है. इसके अलावा संगठन का पैसा लेकर भाग गए पूर्णकालिक प्रचारक अगर फील्ड में जाते है तो उनका आतिथ्य पंचपक्वानों से करने का भी राष्ट्रीय अभियान बामसेफ संगठन के द्वारा शुरू किया गया है.


वामन मेश्राम ने आरोप लगाया कि बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ की घटनाओं को केंद्र सरकार के इशारे पर और उनके निर्देशन में अंजाम दिया जा रहा है. केंद्र सरकार की आईबी जैसी खुफिया एजेंसीयां संगठन के कार्यकर्ताओं को फोन कर तोड़फोड़ की जानकारी लेने का काम कर रही है. लगभग 11 राज्यों के कार्यकर्ताओं के पास ऐसे ही कॉल आये और उन्होंने जानकारी लेने का प्रयास किया की इस तोड़फोड़ का कितना नुकसान संगठन को हुआ है. इसका विश्लेषण करते हुए वामन मेश्राम ने कहा की, केंद्र सरकार ये जानकारी इसलिए ले रही है कि जिन लोगों को हमने तोड़फोड़ करने के काम पर लगाया था, क्या उन्होंने कुछ काम किया भी या नहीं. उसी के आधार पर तोड़फोड़ करने वाले लोगों को फायदा दिया जाने वाला है.


वामन मेश्राम ने आगे कहा की, बामसेफ संगठन का कोई नुकसान नहीं हुआ है. उनके कार्यक्रम आज भी वैसे ही चल रहे है जैसे पहले चल रहे थे. संगठन के विस्तार करने में भी कोई गतिरोध नहीं है. समाज आज भी उन्हें वैसे ही निधी देने का काम कर रहा है जैसे पहले किया करता था. कार्यकर्ता भी संगठन को वैसे ही साथ सहयोग कर रहे है, आज भी कार्यकर्ता अपना पैसा ही नहीं बल्कि लाखों रुपये कीमत वाली जमीन भी दे रहे है. वामन मेश्राम कहते है की, लेकिन इससे एक फायदा हुआ, मेरे काम करने की गति चार गुना गई, अब मै ज्यादा ऊर्जा के साथ काम कर रहा हूं. यही संदेश उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी दिया है.
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