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मोदी सरकार इस मुनाफे वाली सरकारी कंपनी को जा रही बेचने, खरीदने के लिए लगी खरीदारों की कतार

Published On :    21 Jun 2022   By : MN Staff
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अब मुनाफे में चलने वाली एमएसटीसी लिमिटेड की सहायक कंपनी फेरो स्क्रेप निगम लिमिटेड को भी बेचने की तैयारी कर रही है. इससे केवल नौकरियां नहीं घटेंगी बल्कि एससी, एसटी और ओबीसी को मिलने वाला आरक्षण भी समाप्त हो जाएगा.



नई दिल्ली  : एक तरफ मोदी सरकार ने 10 लाख नौकरियां देने का ऐलान कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ तेजी से सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर रही है. कई सरकारी कंपनियां बेचने के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने एयर इंडिया और आईडीबीआई बैंक को बेच दिया है. वहीं सरकार एलआईसी का आईपीओ भी लाने वाली है. अब मुनाफे में चलने वाली एमएसटीसी लिमिटेड की सहायक कंपनी फेरो स्क्रेप निगम लिमिटेड को भी बेचने की तैयारी कर रही है. इससे केवल नौकरियां नहीं घटेंगी बल्कि एससी, एसटी और ओबीसी को मिलने वाला आरक्षण भी समाप्त हो जाएगा.

भारत सरकार विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के एमएसटीसी लिमिटेड की सहायक कंपनी फेरो स्क्रेप निगम लिमिटेड को बेचने की तैयारी कर रही है. निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव ने सोमवार (20-जून-2022) को ट्वीट कर कहा कि एफएसएनएल लिमिटेड में कई कंपनियों की ओर से रूचि दिखाई गई है. इससे पहले पिछले महीने सरकार की ओर से एफएसएनएल लिमिटेड की बोली जमा करने की तारीख को 6 जून तक आगे बढ़ा दिया गया था. इसके पहले अंतिम बोली जमा करने की तारीख 5 मई 2022 रखी गई थी. सरकार एफएसएनएल लिमिटेड में पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रही है. एफएसएनएल लिमिटेड एक मिनी रत्न और एक मुनाफे वाली कंपनी है. आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने एमएसटीसी लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एफएसएनएल लिमिटेड के विनिवेश के लिए अक्टूबर 2016 में मंजूरी दे दी थी. यह कंपनी भारत में मेटल स्क्रैप रिकवरी और स्लैग हैंडलिंग में अग्रणी है. कंपनी के पास भारत में 9 स्टील प्लांट है. एफएसएनएल को स्टील और लोहा बनने के दौरान पैदा हुए स्लैग और कचरे से मेटल की रिकवरी करने और फिर आगे उसे प्रोसेसिंग करने में महारत हासिल है.


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हाल ही में केंद्र सरकार ने देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी तेल वितरक कंपनी बीपीसीएल की विनिवेश प्रक्रिया को खरीदार न मिलने के चलते वापस ले लिया था. सरकार ने विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बीपीसीएल में अपनी पूरी 52.98 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी. सरकार ने मार्च 2020 में बीपीसीएल को बिक्री के लिए कंपनियों से बोलियां मंगाई थी और नवंबर 2020 तक कम से कम तीन बोलियां आ चुकी थीं लेकिन बाद में सभी कंपनियों ने अपनी बोली को वापस ले लिया था. दरअसल मौजूदा समय में अगर किसी सरकारी कंपनी में वैकेंसी निकलती है तो आपको दिखता होगा कि उसमें कई पोस्ट एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित रहती हैं. वहीं निजीकरण के बाद कंपनियां जाति-वर्ग या आरक्षण के हिसाब से भर्तियां नहीं करेंगी. ऐसे में दबे-कुचले वर्ग को आगे बढ़ने के लिए सहारा नहीं मिल पाएगा. इसी वजह से अब निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग बढ़ती जा रही है.

बीते साल मोदी सरकार ने सीईएल यानी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के निजीकरण को मंजूरी दे दी थी और नंदल फाइनेंस ने इसके लिए सबसे बड़ी बोली लगाई थी. मोदी सरकार की लिस्ट में कुल 36 कंपनियां हैं, जिन्हें निजीकरण के लिए चुना गया है. इसमें 21 कंपनियों पर फैसले की प्रक्रिया जारी है. याचिकाओं के चलते जिन कंपनियों के निजीकरण का ट्रांजेक्शन रुका हुआ है उसमें 6 यूनिट्स शामिल है. जिन कंपनियों के निजीकरण का ट्रांजेक्शन पूरा हो गया है उसमें 9 यूनिट शामिल है. खास बात यह है कि निजीकरण की वजह से ही देश में बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ रही है.

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