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दिल्ली दंगाः युवकों को राष्ट्रगान गाने पर मजबूर करने वाले पुलिस वालों की दो साल बाद भी नहीं हुई पहचान

Published On :    22 Jun 2022   By : MN Staff
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दिल्ली में हुए दंगों के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें कुछ लोग सड़क किनारे घायल पड़े हुए हैं और पुलिस ने उनकी पिटाई कर उनसे राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर कर रही है.



नई दिल्ली : साल 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में हुए दंगों के बीच 23 वर्षीय फैजान की एक अस्पताल में मौत हो गई थी. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस घटना के दो साल बाद भी दिल्ली पुलिस इन आरोपी पुलिसकर्मियों की पहचान कर पाने में विफल रही है.


दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने घटना में संलिप्त पुलिस वालों की सूचना देने वालों को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा करने का फैसला किया है. वायर के अनुसार, यह फैसला दिल्ली पुलिस ने आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में बार-बार नाकाम होने के चलते लिया है.


दरअसल दिल्ली में हुए दंगों के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें कुछ लोग सड़क किनारे घायल पड़े हुए हैं और पुलिस ने उनकी पिटाई कर उनसे राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर कर रही है. वीडियो में पुलिसकर्मियों ने पांच लोगों को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर किया था. इसके बाद उन्हें एक पुलिस थाने ले जाया गया, जहां से रिहा होने के अगले ही दिन फैजान की 20 फरवरी 2020 को एक अस्पताल में मौत हो गई.


वायर क अनुसार, क्राइम ब्रांच ने करीब 250 पुलिसकर्मियों से पूछताछ की और कई दस्तावेज खंगाले, जिसमें उन पुलिसकर्मियों के ड्यूटी चार्ट भी शामिल थे, जो दंगों के दौरान इलाके के बाहर से तैनाती के लिए आए थे. ‘उनसे पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की पहचान की गई थी, लेकिन उसने अपनी संलिप्तता से इनकार कर दिया. बाद में उसका पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया, जिसमें वह फेल हो गया. चूंकि अदालत में पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है, पुलिस ने घटना की एक वीडियो क्लिप से उसकी आवाज का नमूना लिया और रोहिणी की फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में भेजा.


यह भी पढ़ें : चुनाव आयोग की सूची से हटाए गए पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त 111 दल, अस्तित्व नहीं होने का दिया हवाला 


क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों ने दंगा मामलों की जांच कर रहे विशेष जांच दल को उन सभी मामलों के जांच अधिकारी बदलने के लिए कहा है, जो अभी भी अनसुलझे हैं. ऐसा इसलिए किया गया है कि नए जांच अधिकारी मामलों नए तरीके से देखेंगे. हाल ही में फैजान के मामले के जांच अधिकारी को भी बदला गया था, और नए जांच अधिकारी को आरोपियों की गिरफ्तारी पर नकद ईनाम का प्रस्ताव देने के लिए कहा गया था. ‘नए जांच अधिकारी अब तक करीब 95 पुलिसकर्मियों से पूछताछ कर चुके है.


इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है. अदालत ने जांच में देरी और चार्जशीट फाइल नहीं होने लेकर कई बार दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है. इस साल मार्च में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा था कि वो बिना किसी प्रभाव में आए हुए कानूनी तरीके से मामले की जांच करे. थे. इससे पहले हाईकोर्ट ने मामले में जांच को लेकर पुलिस की खिंचाई की थी और उससे कड़े सवाल किए थे. उन्होंने पूछा था कि फैजान को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने से पहले तैयार हुई मेडिकल रिपोर्ट में उसके शरीर पर केवल तीन चोटें थीं, जबकि उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 20 चोटें सामने आई थीं.


फैजान की मां किस्मतून ने हाई कोर्ट में दावा किया था कि उनके बेटे को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया गया था और उसके साथ मारपीट की गई थी. मां ने पुलिस पर ये भी आरोप लगाया कि गंभीर स्थिति होने पर भी फैजान का सही समय पर इलाज नहीं कराया गया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी.

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