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गुजरात के गांधीधाम से 30 जून को शुरू होगा ‘गद्दारों से सावधान, राष्ट्रीय अभियान!’, वामन मेश्राम का ऐलान

Published On :    26 Jun 2022   By : MN Staff
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‘बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वालों के बीच में ही अब तू-तू, मै-मै शुरु हो गई है.’ दरअसल, सज्जाद नोमानी द.मिल्लत टाईम्स के पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कह रहे है की, देश के ब्राह्मण भी मज्लुम है और वे उन्हें भी अपने साथ लेंगे.



पूना : 30 जून 2022 को राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा व बहुजन क्रांति मोर्चा के द्वारा वामन मेश्राम कि अध्यक्षता गांधीधाम जिले के भुज में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम होने जा रहा है. इस कार्यक्रम की तैयारी के लिए वामन मेश्राम खुद उस मैदान की तैयारी का मुआयना करने आये थे, जहां यह कार्यक्रम होने वाला है. वहां पर एमएन टीवी सहायक संपादक रवींद्र राणे भी मौजूद थे. वहां रवींद्र राणे ने वामन मेश्राम का एक इंटरव्यू लिया. उसमें वामन मेश्राम ने संगठन से बाहर निकले हुए गद्दारों को सबक सिखाने के अभियान की शुरुआत करने की भी बात कही है. मेश्राम ने कहा, ‘गद्दारों का सरदार वी.एल.मातंग और भांजी राठोड का घर उसी मैदान से सटा हुआ है, जहां पर उनका कार्यक्रम होने वाला है.’



वामन मेश्राम ने इंटरव्यू में हजरत मैलाना सज्जाद नोमानी के उस वीडियो का जिक्र करते हुए कहा, ‘बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वालों के बीच में ही अब तू-तू, मै-मै शुरु हो गई है.’ दरअसल, सज्जाद नोमानी द.मिल्लत टाईम्स के पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कह रहे है की, देश के ब्राह्मण भी मज्लुम है और वे उन्हें भी अपने साथ लेंगे. मौलाना के इस बयान से सोशल मीडिया पर काफी घमासान मचा था. मौलाना सज्जाद नोमानी पर ये आरोप है कि बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वालों में मौलाना सज्जाद नोमानी भी शामिल है, लेकिन उनके इस बयान से बामसेफ से अलग हुए लोग सहमत नहीं है और उन्होंने उससे अपना पल्ला झाड लिया है. इससे मालुम होता है कि तोड़फोड़ करने के लिए एक साथ आये हुए लोगों में भी आपसी मतभेद शुरु हो गए है और ये सार्वजनिक भी हो चुके है.



वामन मेश्राम ने आगे कहा, ‘गद्दारों का लोगों को गुमराह करने का जो आधार है, उसे 30 जून को होने वाले कार्यक्रम में सार्वजनिक कर दिया जायेगा. बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने में ये गद्दार कितने कामयब हुए? इस सवाल पर वामन मेश्राम ने कहा की 0.0000000001 फीसदी ही उन्हें कामयाबी मिली है. उसमें भी जो लोग उनके पास गए थे वह वापस आ रहे है. गद्दारों के सरदार वी.एल.मातंग ने कहा था की 2024 में लोग मेश्राम को छोड़कर हमारे पास आयेंगे, इसमें कितनी सच्चाई है. इसके जवाब में वामन मेश्राम ने कहा, ‘आज लोग उनके साथ नहीं जा रहे, इसलिए 2024 की वे बात कर रहे है, लेकिन आज ही लोग गद्दारों से वाफिक हो गए और उनके साथ नहीं जा रहे है तो 2024 में कैसे और क्यूँ गद्दारों के साथ जायेंगे?’ यह सवाल भी वामन मेश्राम ने खड़ा किया. मेश्राम ने आगे कहा, ‘हम देश भर के गद्दारों की लिस्ट बना रहे है कि गद्दार कहां-कहां रहते है, उन्हें चुनौती देकर उनके घर के आसपास ही कार्यक्रम करेंगे.’ मेश्राम ने यह भी कहा की जब से हमने अहमदाबाद में ‘जेल भरो’ आंदोलन किया था, तब से ही गुजरात का प्रशासन हमसे उलझने और हमारे कार्यक्रमों में रुकावटें डालने का काम नहीं करता.


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गद्दार वी.एल.मातंग के साथी गद्दार कमलाकांत काले के साथ हुई मारपीट की घटना पर वामन मेश्राम ने कहा, ‘कुमार काले की पिटाई करने वाले लोग ओबीसी है. कुमार काले कहते है की मै ओबीसी हूं. इस पर ओबीसी के लोग कहते है की तो फिर तुमने ओबीसी की जातीय गिनती के लिए हो रहे ‘भारत बंद’ आंदोलन का विरोध क्यों किया? तुम्हारा झगड़ा वामन मेश्राम के साथ है, करों, लेकिन ओबीसी के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे के विरोध में जाने का क्या मतलब है? इसलिए ओबीसी के ही लोगों ने कमलाकांत काले को दो झापड़ लगाए.’ लोग गद्दारों को गद्दारी की सजा देना चाहते है, इसे कैसे रोका जाये? लोगों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई है. वैसे गद्दारों के लिए आईपीसी के अनुसार फांसी की सजा है, थप्पड़ मारने वाले लोगों ने गलत काम किया, ऐसा भी वामन मेश्राम ने कहा.



इंटरव्यू में कमलाकांत काले की पत्नी सुजाता काले के एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए सवाल करने पर वामन मेश्राम ने कहा, ‘गद्दार सुजाता काले का आदर-सत्कार करने के लिए गुजरात की 200 महिला कार्यकर्ता जाने वाली है और उनका स्वागत पंच-पकवानों से किया जायेगा.’ देश में जहां भी गद्दार है उनका ढूँढ-ढूँढकर बंदोबस्त किया जायेगा. उनको सबक सिखाया जाएगा ताकि दोबारा कोई गद्दार पैदा ही नहीं होना चाहिए, इसकी खबरदारी ली जायेगी. इस पुरे इंटरव्यू का केवल इतना हीं पार्ट अलग करके गद्दारों की ओर से सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है और कहा जा रहा है की महिलाओं को मारने की धमकी वामन मेश्राम दे रहे है.



इसके बारे में जब हमने वामन मेश्राम से सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा की गद्दार को गद्दारी की सजा तो मिलनी चाहिए. कोई महिला अगर किसी की हत्या कर दे तो क्या उसे इसलिए छोड़ दिया जायेगा की वह महिला है? उन्हें गद्दारी करने की न अनुमती दी जायेगी न गद्दारी करने के बाद उन्हें छोड़ दिया जायेगा. कानून के सामने सभी समान होते है. वामन मेश्राम ने आगे कहा, ‘हम पहले स्त्री-पुरुष समानता के सिद्धांत को मानते है, उस पर अमल करते है, इसलिए गद्दार स्त्री हो या पुरुष कोई भेदभाव नहीं होगा. दोनों से निपटने का एक ही तरीका अपनाया जाएगा.’



गद्दारों से सावधान राष्ट्रीय अभियान शुरु करने के पीछे का बड़ा उद्देश बताते हुए वामन मेश्राम ने कहा, ‘भविष्य में गद्दार नाम की नस्ल पैदा ही ना होने देना है. विवेकशील व्यक्ति को समझाया जा सकता है, मगर गद्दारी करने वालों को समझाया नहीं जा सकता. गद्दारों को समझाना मूर्खों का काम है और समाज तथा संगठन को कानून के दायरे में रहकर गद्दारों को सबक सिखाने का अधिकार है. उसी अधिकार का हम उपयोग कर रहे है.’



वामन मेश्राम ने गद्दार वी.एल.मातंग के बारे में कहा, ‘वह पहले तो यूपी से ही भाग गए थे. वैसे उनके भागने का इतिहास काफी पुराना है. यूपी से भागकर वे अपने घर गुजरात आ गए. अब उनके घर के बगल में ही 30 जून को विशाल और ऐतिहासिक कार्यक्रम होने जा रहा है. इससे डरकर वह अपना घर छोड़कर ही भाग गए है. अभी ये जानकारी मिली है की गद्दार वी.एल.मातंग अपने घर से भागकर अपने दुसरे गद्दार साथी कमलाकांत काले के घर दौंड, पुणे में है. वह 30 जून से पहले गुजरात में आने वाले भी नहीं है.



इसके अलावा मुंबई के मावजी राठोड़ भी गद्दारों कि सूची में शामिल है. उन्होंने संगठन की गाड़ी अपने कब्जे में ली है, जिसकी उस वक्त की किमत करीब 5 लाख रुपये थी. अगर समाज की संपत्ति पर कोई नाजायज तरीके से कब्जा जमा ले तो उसे सबक सिखाये बगैर समाज की संपत्ति वापस कैसे मिल सकती है. इसलिए वामन मेश्राम ने मुंबई के कार्यकर्ताओं को भी मावजी राठोड़ को सबक सीखाने के लिए कहा है. सुत्रों के अनुसार, मावजी राठोड़ अपने घर के सामने चार गार्ड की सुरक्षा लगाकर छिपकर बैठे है? इस पर वामन मेश्राम का कहना है की ऐसे छिपकर घर में बैठने या डर के मारे घरे से ही भाग जाने तक गलत काम करने ही क्यों थे? और अगर मावजी राठोड़ जैसे लोग गद्दार मातंग के साथ रहेंगे भी तो उनके संगठन को क्या फायदा होगा? क्योंकि वे घर से तो निकलेंगे ही नहीं, तो उनका संगठन कैसे बढ़ायेंगे!



इस सारे घटनाक्रम के शुरुआती दौर में गद्दार वी.एल.मातंग ने वामन मेश्राम पर निराधार आरोप लगाया था कि वामन मेश्राम ने कांग्रेस के साथ समझौता कर 21 करोड़ रुपये लिये है. अभी वी.एल.मातंग की अध्यक्षता में महाराष्ट्र राज्य की समीक्षा बैठक हुई. उसमें वे कहते है की वामन मेश्राम 1 लाख रुपयों का मोबाईल फोन इस्तेमाल करते है और 80 हजार रुपयों की घड़ी पहनते है. इस पर वामन मेश्राम ने कहा 1 लाख 17 रुपयो, का मोबाईल फोन उन्हें अमेरीका के सरबजीत सिंह ने उस वक्त दिया था, जब वे अमेरिका में संगठन के नेटवर्क को बढ़ाने के लिए गए थे. रही बात घड़ी की तो वामन मेश्राम ने कहा की वे घड़ी पहनते ही नहीं. इससे आगे उन्होंने कहा की जो लोग मुझ पर बिना किसी सबुत के 21 करोड़ लेने का आरोप लगाते थे, वही लोग आज 1 लाख और उससे भी नीचे हजारों तक आ गए है. और वह भी बिना सबूत के केवल मात्र आरोप लगाने के लिए. वामन मेश्राम का कहना है की झूठ बोलने की भी कोई हद होनी चाहिए, मगर गद्दार वी.एल.मातंग और उनके साथ गए हुए गद्दारों ने झूठ बोलने की सारी हदें पार कर दी है.

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