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आरएसएस-भाजपा के इशारे पर ही बामसेफ संगठन को तोड़ने के प्रयास में लगा था मनोज पासी, जातिय मानसिकता व भ्रष्ट आचरण में था लिप्त! (भाग- 2)

Published On :    22 Sep 2022   By : MN Staff
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हमने अब तक लालन (वी.एल.मातंग), दिलीप अम्बेडकर, एन.बी.कुरणे, मावजी राठोड़, प्रदीप राम, कमलाकांत काले और नारायण गरवा के बारे में सिलसिलेवार सबुतों के साथ लिखा है और लिखना जारी है. जब से इनके बारे में बामसेफ के कार्यकर्ता, हितचिंतक और समर्थकों में सही जानकारी गई, तब से कई सारे कार्यकर्ता खुद आगे आ रहे है और उन गद्दारों के बारे में उनके पास की जानकारी हमें लगातार दे रहे है.



बामसेफ संगठन में तोड़फोड़ करने वाले गद्दार, भ्रष्टाचारी, लालची, डरपोक और व्यक्तिगत रुप से महत्वकांक्षी लोगों के काले कारनामों के बारे में हम संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता व पदाधिकारियों से जानकारी लेकर लगातार लिख रहे है. जिसकी वजह से उन गद्दारों कि नींद हराम हो गई है. वे समाज में किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहे है. जब वे लोग ऐसे गलत काम कर रहे थे, तब उन्हें शर्म नहीं आई, लेकिन अब जब उनके सारे गलत काम सबूतों के साथ लोगों के सामने आ रहे है, तो वे घर से बाहर नहीं निकल रहे है.


हमने अब तक लालन (वी.एल.मातंग), दिलीप अम्बेडकर, एन.बी.कुरणे, मावजी राठोड़, प्रदीप राम, कमलाकांत काले और नारायण गरवा के बारे में सिलसिलेवार सबुतों के साथ लिखा है और लिखना जारी है. जब से इनके बारे में बामसेफ के कार्यकर्ता, हितचिंतक और समर्थकों में सही जानकारी गई, तब से कई सारे कार्यकर्ता खुद आगे आ रहे है और उन गद्दारों के बारे में उनके पास की जानकारी हमें लगातार दे रहे है. मनोज कुमार पासी के बारे में हमने 6 अगस्त 2022 को पहला लेख लिखा था. उसके बाद कई कार्यकर्ताओं ने हमें मनोज पासी के गलत कामों के बारे में जानकारी दी है. इसलिए अब हम मनोज पासी को लेकर दुसरा लेख लिख रहे है.


मनोज पासी ने बामसेफ संगठन के खासतौर पर उत्तर प्रदेश के पूर्णकालिन प्रचारकों का एक गुट बनाकर समाज व संगठन का पैसा लुटा है. उसने कुछ प्रचारकों से कहा था कि आप लोग जो भी निधी समाज से इकठ्ठा कर लाते हो, उसमें से कुछ पैसा अपने पास रखो, कुछ मुझे दे दो और बचा हुआ निधि संगठन के पास जमा कर दो. यह जानकारी उसी के गुट के कुछ प्रचारकों ने संगठन को दी है. आरएसएस-भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह कि मृत्यु होने पर बामसेफ और उसके सहयोगी संगठनों के किसी भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की. केवल मनोज पासी ने ही ऐसा किया.


जब संगठन ने उसे इसके बारे में पूछा तब उसने लिखित में बताया कि हमें भाजपा के लोगों से भी सम्पर्क बनाये रखना चाहिए. इससे यही समझ में आता है कि भाजपा के उन्हीं सम्पर्कों के साथ मिलकर मनोज पासी ने बामसेफ संगठन को तोड़ने की कोशिश की थी. चूंकि लालन (वी.एल.मातंग) अपनी उन्नाव की केस को लेकर आरएसएस-भाजपा के साथ समझौता करना चाहता था और उसके लिए आरएसएस-भाजपा के साथ संपर्क रखने वाले व्यक्ति की उसे जरूरत थी. इस काम के लिए मनोज पासी एक अच्छा विकल्प था. और यही वजह रही की लालन ने अपनी केस मनोज पासी को सौंप दी, ताकी मनोज पासी आरएसएस-भाजपा के साथ डील करें और लालन की केस कमजोर कर दे.


इससे भी यही सिद्ध हो जाता है कि मनोज पासी आरएसएस और भाजपा के इशारे पर काम कर रहा था. केवल मनोज पासी ही नहीं बल्कि बामसेफ को तोड़ने के प्रयास में शामिल सभी गद्दार संघ के इशारे पर ही काम कर रहे थे. इसका ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र के औरंगाबाद का है. आरएसएस और बीजेपी ने जिस प्रकार से बामसेफ संगठन को तोड़ने की कोशिश की उसी तरह उन्होंने शिवसेना को भी तोड़ने का प्रयास किया है. उन्होंने शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे को तोड़ा और उसके नाम से ‘शिंदे गुट’ बनाया. अब बामसेफ को तोड़ने के प्रयास में कार्यरत मिलिंद तलेकर नाम का व्यक्ति भाजपा प्रणित शिंदे गुट में शामिल हो गया है.


प्रदीप राम और अमिता बौद्ध के संबंधों के बारे में कार्यकर्ताओं और समाज में ज्यादा चर्चा मनोज पासी ही करता था. मनोज पासी की बातें सुनकर ही कार्यकर्ताओं ने संगठन के पास कई सारी शिकायतें भी की थी. मनोज पासी उन दोनों के एक साथ, एक ही थाली में खाना खाने को लेकर भी कार्यकर्ताओं के साथ बातें करता था. प्रदीप राम और अमिता बौद्ध का सबसे ज्यादा प्रचार मनोज पासी ने ही किया है. मनोज पासी ने ही उन दोनों के चरित्र पर सवाल उठाये है. मनोज पासी के अन्य महिलाओं के बारे में ही बुरे ख्यालात नहीं है, बल्कि उसके अपनी पत्नी के बारे में भी कुछ ऐसे ही विचार है. किसी भी शादीशुदा पति-पत्नी के बीच की बातें सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए. पर जब पती ने ही उन बातों को प्रचारकों के सामने जाहीर किया हो, तब हमें उसकी महिलाओं के प्रति गलत मानसिकता को लोगों के सामने लाने के लिए उन्हें सार्वजनिक करना पड़ रहा है.


2021 में उत्तर प्रदेश में चुनाव की तैयारियां चल रही थी, मनोज पासी के नेतृत्व में भी एक परिवर्तन यात्रा चल रही थी. उस दौरान संगठन द्वारा दी गई गाड़ी में उसके अलावा अन्य दो-चार प्रचारक भी थे. उन सबके सामने मनोज पासी ने कहा, ‘मै ऐसे घर से बाहर रहता हूं, इसलिए मैने मेरी पत्नी से कहा कि अगर तुम्हें शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा हो गई और तुम उसे कंट्रोल नहीं कर पा रही हो, ऐसे समय में तुम किसी बाहरी पुरुष से संबंध मत बनाना, बल्कि मेरे भाई के पास चली जाना और अपनी इच्छा पूरी कर लेना.’ अपनी पत्नी के बारे में ऐसी घिनौनी बात सोचने वाला और उसे प्रचारकों के बीच साझा करने वाला मनोज पासी समाज की अन्य महिलाएं एवं संगठन के बारे में क्या सोचता होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.


मनोज पासी एक तरफ प्रदीप राम और अमिता बौद्ध की बदनामी कर रहा था वहीं दुसरी ओर प्रदीप राम पर संगठनात्मक कार्रवाई होने के बाद उसके बचाव में भी उतरा था. इसमें गौर करने वाली बात यह है कि वह प्रदीप राम के बचाव में नहीं लगा था बल्कि बामसेफ संगठन में फूट डालने के काम में भी लगा हुआ था. प्रदीप राम का समर्थन करने के पीछे मनोज पासी की दो वजह थी. एक जातिय मानसिकता और दुसरी प्रदीप राम को संगठन तोड़ने के काम में शामिल कराना, क्योंकि उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक क्षेत्र में प्रदीप राम का नाम था. वह यूपी का प्रभारी था. इसलिए उसके नाम का उपयोग करने से संगठन में फूट डालना ज्यादा आसान हो जाएगा, यह सोचकर मनोज पासी ने प्रदीप राम के गलत कामों का भी संगठन के विरोध में जाकर समर्थन करना शुरू कर दिया.


इसके लिए वह इलाहाबाद और कौशांबी जिले में संगठन विरोधी गतिविधियां कर रहा था. जब इसकी जानकारी संगठन को मिली तो मनोज पासी को लखनऊ बुलाया गया. लखनऊ आने के बाद बामसेफ भवन में जितने पूर्णकालिन प्रचारक थे उन सभी के साथ वह नेतृत्व व संगठन विरोधी ही चर्चा करता था. यह बात उन सभी प्रचारकों ने संगठन को लिखकर दी है. प्रदीप राम को बचाने के नाम पर मनोज पासी जो संगठन तोड़ने का काम कर रहा था, उसी के तहत उसने बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम का मोबाईल चोरी किया था. मोबाईल चोरी करके उससे आपत्तिजनक मेसेज बामसेफ के राष्ट्रीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को भेजे गए.


मनोज पासी इस बात को भली भांति जानता था कि मोबाईल भले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का है मगर उसे चलाने का काम उनकी पत्नी निशा मेश्राम करती है. अगर उस मोबाइल से आपत्तिजनक मेसेज भेजे जाएंगे तो उसका आरोप निशा मेश्राम पर आएगा. मामले की जांच और सत्यापन करने के बाद वामन मेश्राम निशा मेश्राम पर कार्रवाई नहीं करेंगे और इस तरह से वामन मेश्राम पर भेदभाव का आरोप लगाना आसान हो जाएगा. इस सारी रणनीति पर मनोज पासी काम कर रहा था. और हुआ भी वैसे ही. जो आपत्तिजनक मेसेज उस चोरी की हुई मोबाइल से भेजा गया, इसमें उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और कौशांबी के गांवों की कुछ बातें लिखी थी. अब सवाल यह है कि गुजरात में पली-बड़ी और महाराष्ट्र में ब्याही हुई महिला को उत्तर प्रदेश के गांवों की जानकारी कैसे मिल सकती है. न ही वह कभी उस गाव में गई और न ही उनके बारे में किसी से कुछ सुना. यहां पर मनोज पासी की चोरी पकड़ी गई.


इससे यह भी सिद्ध हो गया कि मोबाइल चोरी करने और उससे गलत मेसेज लोगों को भेजने में मनोज पासी का ही हाथ है. यह केवल वामन मेश्राम को बदनाम करने और उससे बामसेफ संगठन को तोड़ने के षड़यंत्र का हिस्सा मात्र था. इस पुरे एपिसोड में महाराष्ट्र के कुछ लोग भी शामिल थे, जैसे नंदाताई नाटेकर. नंदाताई नाटेकर काफी दिनों से संगठन विरोधी कामों में लिप्त थी. ऐसे में जब मनोज पासी द्वारा मोबाइल चोरी करने के बाद उससे आपत्तिजनक मेसेज भेजे गए, उसके विरोध में नंदाताई नाटेकर ने संगठन से पुलिस कार्रवाई करने के लिए अनुमति मांगी. नंदाताई को संगठन से अनुमति मांगने की जरूरत ही नहीं थी. वह पहले से ही संगठन और नेतृत्व के विरोध में काम कर रही थी. इसलिए उसने सीधे पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए थी.


नंदाताई जानती थी कि अगर पुलिस में शिकायत दर्ज की जाती है तो इसमें मनोज कुमार पासी ही फंस जाएगा, इसलिए उसने पुलिस में शिकायत करने के बजाय संगठन से अनुमति मांगी. ताकी इस झूठ को सही साबित किया जाए कि वामन मेश्राम अपनी पत्नी को बचाने के लिए संगठन में भेदभाव कर रहे है. नंदाताई नाटेकर भी उसी षड़यंत्र का हिस्सा थी, जो मनोज पासी बामसेफ को तोड़़ने के लिए कर रहा था. इस तरह से मनोज पासी के समाज व संगठन विरोधी काम है. इस लेख के बाद और भी जानकारी हमारे पास आएगी तो उसे अगले लेख में आप लोगों के सामने प्रस्तुत करेंगे.

संकेत कांबले

मो.9004248821

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