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भाड़ में सरकारी आश्वासन..

Published On :    23 Nov 2022   By : MN Staff
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संसद में दिए आश्वासन भूल गई सरकार



नई दिल्ली : जिस देश की सरकार पहले आश्वासन देती है और बाद में भूल जाती है उसी देश में उसी सरकार द्वारा विकास का डंका पीटा जा रहा है. यह जनता को उल्लू बनाने से कम नहीं है. इसका नतीजा यह हुआ कि आश्वासन का ढेर लग गया है. देश में 2014 से लेकर अभी तक यही चल रहा है और इस नेक काम को करने में बीजेपी सरकार जरा भी संकोच नहीं करती है. इस बात का सबूत सामने है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुर्घटनावश मिसाइल चलने की घटना पर 15 मार्च को लोकसभा में आश्वासन दिया था कि भारत अपनी शस्त्र प्रणाली की सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस घटना की जांच के बाद कमी पाई जाने पर उसे दूर किया जाएगा. बाद में इस आश्वासन को ‘लंबित’ श्रेणी में डाल दिया गया. 
 
असल में सरकारी आश्वासनों को लंबित श्रेणी में डालने का यह अकेला मामला नहीं है. यदि गौर करें तो पता चलेगा कि संसदीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों में से इस वर्ष अगस्त तक लोकसभा में 1005 और राज्यसभा में 636 आश्वासन लंबित हैं. निचले सदन में दस वर्ष से अधिक पुराने 38 सरकारी आश्वासन लंबित हैं. जबकि, पांच वर्ष से अधिक पुराने 146 तथा तीन वर्ष से ज्यादा समय से 185 आश्वासन लंबित हैं. इस प्रकार, लोकसभा में 18 फीसद से अधिक सरकारी आश्वासन तीन वर्ष से अधिक समय से और 14 फीसद आश्वासन पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं. 

बता दें कि लोकसभा में सबसे अधिक 82 आश्वासन विधि एवं न्याय मंत्रालय के लंबित हैं. जबकि रेल मंत्रालय के 61, शिक्षा मंत्रालय के 56, रक्षा मंत्रालय के 50, सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय के 48, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के 47, वित्त मंत्रालय के 39, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के 35,पर्यटन मंत्रालय के 32, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 31 आश्वासन लंबित हैं. तय प्रावधानों के मुताबिक सभा में कोई आश्वासन दिए जाने के बाद उसे तीन माह के अंदर पूरा करना अपेक्षित होता है. भारत सरकार के मंत्रालय या विभाग आश्वासनों को निर्धारित तीन महीने की अवधि के अंदर पूरा करने में असमर्थ रहने की स्थिति में समय विस्तार की मांग कर सकते हैं. संसदीय कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राज्य सभा में लंबित 636 आश्वासनों में से तीन वर्ष से अधिक समय से 138 आश्वासन और पांच वर्ष से ज्यादा समय से 138 आश्वासन लंबित हैं. उच्च सदन में 31 आश्वासन 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं.

लोकसभा वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, निचले सदन में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर संसद सदस्य माला राय को, खाद्य सुरक्षा योजना पर सुप्रिया सुले को, डाटा सुरक्षा विधेयक में देरी पर मनीष तिवारी को, घरेलू डाटा केंद्र पर कनिमोई को दिए गए आश्वासन सहित कई मामलेलंबित हैं. डाटा आधारित क्षेत्र में चीनी निवेश को लेकर शशि थरूर को दिए गए आश्वासन को 11 जनवरी 2022 की संसदीय समिति की बैठक में वापस ले लिया गया.
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