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आंदोलन का असरः लद्दाख में सरकारी नौकरियों पर 370 हटाए जाने कि पहले की स्थिति की बहाली के संकेत

Published On :    24 Nov 2022   By : MN Staff
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केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया था, जो जम्मू कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा प्रदान करते थे.



श्रीनगर : केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया था, जो जम्मू कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा प्रदान करते थे. 5 अगस्त से पहले केवल स्थायी निवासी ही तत्कालीन राज्य में नौकरी या अचल संपत्ति खरीदने के पात्र थे, इसमें लद्दाख भी शामिल था. लेकिन जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने के बाद उनका यह अधिकार खत्म हो गया था. लेकिन लगातार आंदोलन के चलते सरकार स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों पर 5 अगस्त 2019 से पहले वाली स्थिति की बहाली की ओर बढ़ रही है. गैर-राजपत्रित नौकरियों में लद्दाख के मूल निवासियों को विशेष अधिकार देने के बाद प्रशासन ने अब राजपत्रित नौकरियों को आरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

गौरतलब है कि बीते 2 नवंबर को लद्दाख और कारगिल में हजारों लोगों ने इन मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया था, जिसका आह्वान एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने किया था. इन संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी मांगें न माने जाने पर 2023 और 2024 में भी आंदोलन चलाने की धमकी दी थी. बौद्ध-बहुल लेह जिले और मुस्लिम-बहुल करगिल जिले ने राज्य के दर्जे और नौकरियों व जमीन में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए 5 अगस्त 2019 के बाद हाथ मिला लिए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1 नवंबर 2022 को एक अधिसूचना जारी करके उपराज्यपाल को राजपत्रित या समूह ‘ए’ और समूह ‘बी’ के सार्वजनिक सेवा पदों पर भर्ती के नियम बनाने का अधिकार दिया है. गृह मंत्रालय की अधिसूचना ऐसी सेवाओं और पदों पर नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता के साथ-साथ नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों जैसे- प्रोबेशन, नौकरी कंफर्म करने, वरिष्ठता और पदोन्नति आदि के लिए नियम तैयार करने की शक्तियां भी प्रदान करती है. इससे यह संकेत है कि केंद्र सरकार लद्दाख में 5 अगस्त के पहले कि सरकारी रोज़गार की स्थिति में वापस आ रही है.

अधिसूचना के बाद उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन ने 14 नवंबर को विभिन्न विभागों में राजपत्रित पदों के लिए मसौदा भर्ती नियम भेजने शुरू किए हैं. अब तक मसौदा भर्ती नियम गैर-स्थानीय लोगों को इन पदों पर नियुक्त किए जाने से रोकते हैं और इन पदों पर आवेदन करने के लिए ‘निवासी प्रमाण पत्र’ होना आवश्यक है. यह प्रमाण पत्र एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख निवासी प्रमाणपत्र आदेश, 2021 के अनुसार जारी किया जाना चाहिए. 2021 का आदेश लद्दाख में रहने वाले ‘स्थायी निवासी प्रमाण पत्र’ रखने वाले सभी लोगों को निवासी प्रमाण पत्र प्राप्त करने का पात्र बनाता है.

पूर्व मंत्री चेरिंग दोरजी ने राजपत्रित नौकरियों को मूल निवासियों के लिए आरक्षित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि जब तक केंद्र सरकार द्वारा उनकी अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा उपायों और संसद में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व जैसी हमारी मांगों से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है.

करगिल जिला हमेशा से जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे के पक्ष में रहा है और पूर्ववर्ती राज्य का हिस्सा बने रहना चाहता था, जबकि केंद्र शासित प्रदेश वाली स्थिति का मजबूती से समर्थन करता रहा है. केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 हटाए जाने के बाद, लेह जिले में जश्न मनाया गया, लेकिन करगिल में इसे जम्मू कश्मीर से अलग किए जाने के कदम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध देखा गया था. लद्दाख के बाद अब जम्मू कश्मीर में भी ऐसी मांग उठने की संभावना है, जहां कोई भी गैर-मूलनिवासी जो 15 वर्षों से तत्कालीन राज्य में रह रहा है, वर्तमान में सरकारी रोजगार के लिए पात्र होता है.

जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा अधिनियम 2010 में गृह मंत्रालय के 2020 के संशोधन के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 15 साल से रह रहा है या सात सालों से पढ़ाई कर रहा है और केंद्रशासित प्रदेश में स्थित किसी शैक्षणिक संस्थान में कक्षा 10 या 12 की परीक्षा दी है, सरकारी नौकरी का पात्र होगा.
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