×

पड़ताल : देश के एक भी एम्स में पूरा स्टाफ नहीं

Published On :    25 Nov 2022   By : MN Staff
साझा करें:

वेंटिलेटर पर गुजरात का एम्स : राजकोट एम्स में 90 फीसदी पद खाली



नई दिल्ली :  मोदी सरकार अपने आठ साल पूरा करने के मौके पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गये कामों के साथ-साथ मेडिकल एजुकेशन पर भी कई तरह के दावे कर रही है. वर्ष 2014 और 2022 के तुलनातमक आंकड़े पेश किये जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज़ों की संख्या में 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सीटों में 80 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधनों के विस्तार के दावे किए जा रहे हैं.

महामारी के दौरान गंगा में तैरती लाशों के दिल दहलाने वाले दृश्य तो आप देख ही चुके हैं. असल में सच्चाई यह है कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल बुरी तरह से चरमरा चुकी है, बल्कि भारत में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल एजुकेशन की स्थिति बुरे हालातों से गुजर रहे हैं. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एके एक भी एम्स में पूरा स्टॉप नहीं है. इसी बीच गुजरात चुनाव के दौरान एक और सनसनीखेज खबर है कि गुजरात के एम्स में 90 प्रतिशत पद खाली हैं.  

गौरतलब है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीन द्वारा 15 मार्च 2022 को राज्यसभा में पेश किये गये रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 19 एम्स है. इनमें शिक्षकों के 4,209 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से मात्र 1,998 पद ही भरे गये हैं और 2,211 पद खाली पड़े हैं. कुल पदों के लगभग आधे यानी 47.4 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं. इसी तरह से सीनियर रेजिडेंट के 2,794 पद स्वीकृत है, जिनमें से 1,190 पद यानी 42.5 फीसदी पद खाली पड़े हैं. वहीं जूनियर रेजिडेंट के 2,638 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 470 पद खाली पड़े हैं. इन सभी 19 एम्स में ग़ैर-शिक्षक कर्मचारियों के 35,346 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 17,804 पद खाली पड़े हैं. यह इस बात का पूख्ता सबूत है कि देश के किसी भी एम्स में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या नहीं है.



वेंटिलेटर पर एम्स 

गुजरात विधानसभा चुनाव के चलते बीजेपी बड़े-बड़े दावे कर रही है. लेकिन, ज़मीनी सच्चाई क्या है ये नहीं बता रही है. असल में जिस एम्स का गुणगान चुनावी सभाओं में किया जा रहा है वो एम्स खुद वेंटिलेटर पर है. ये नहीं बताया जा रहा है कि ये एम्स कैसे चल रहा है? क्या सचमुच भाजपा मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है या फिर ये चुनावी स्टंट है? मालूम हो कि एम्स जैसे मेडिकल संस्थानों का मकसद ना सिर्फ अच्छा इलाज़ उपलब्ध कराना होता है बल्कि अच्छे डाक्टर तैयार करना, गुणवत्ता परक मेडिकल शिक्षा उपलब्ध करना और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उच्च स्तर का शोध करना भी होता है. लेकिन इनमें से किसी भी मकसद में रोजकोट एम्स कामयाब होता नज़र नहीं आ रहा. क्योंकि राजकोट एम्स में लगभग 90 फीसदी पद खाली पड़े हैं और लगता है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र आनन-फानन में इसे शुरू कर दिया गया है.

15 मार्च 2022 को राज्यसभा में एम्स में डॉक्टरों और फैकल्टी की स्थिति के बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट अनुसार राजकोट एम्स में टिचिंग फैकल्टी के 183 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र 43 पदों पर भर्ती की गई है और 140 पद खाली पड़े हैं. सीनियर रेज़िडेंट के 40 पद स्वीकृत हैं जिनमें से मात्र 15 पद भरे गये हैं और 25 पद खाली पड़े हैं. जूनियर रेज़िडेंट के 40 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र 28 पद भरे गये हैं और 12 पद खाली पड़े हैं. यानी कुल 263 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 177 पद यानी 67 फीसदी पद खाली पड़े हैं. ऐसा नहीं है कि मात्र डॉक्टरों और टिचिंग फैकल्टी की ही कमी है बल्कि ग़ैर-शिक्षक पदों पर भर्ती की हालत तो और भी ख़राब है. राजकोट एम्स में 95 फीसदी ग़ैर-शिक्षकपद खाली पड़े हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, राजकोट एम्स में ग़ैर-शिक्षक कर्मचारियों के 951 पद स्वीकृत हैं जिनमें से मात्र 46 पदों पर भर्ती की गई है। इस तरह राजकोट एम्स में ग़ैर-शिक्षक कर्मचारियों के 905 पद यानी 95 फीसदी पद खाली पड़े हैं.



आनन-फानन में इसे शुरू कर दिया गया एम्स

नरेंद्र मोदी 31 दिसंबर 2020 को ऑनलाइन तरीके से राजकोट एम्स का शिलान्यास किया था. एम्स का निर्माण कार्य सितंबर-अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ. 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट में लिखा है कि सरकार एम्स का संचालन शीघ्र करने की इच्छुक है. परिणामस्वरूप बिना निर्माण कार्य पूरा हुए सरकार ने पीडीयू मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल राजकोट में अस्थायी परिसर की व्यवस्था कर दी गई. मतलब बिना इमारत, लैबोरेट्री एवं अन्य सुविधाओं के एम्स को शुरू कर दिया गया. मात्र इतना ही नहीं राजकोट एम्स में बिना पर्याप्त शिक्षकों के ही एमबीबीएस के पहले बैच की शुरुआत कर दी गई. ये भी लक्ष्य रखा गया कि 31 दिसंबर 2021 तक ओपीडी शुरू कर दी जाए.


अब सवाल ये उठता है कि आखिर सरकार को इतनी जल्दी क्यों थी? क्या सरकार लोगों के स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा को लेकर गंभीर थी या फिर 2022 में गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव का दबाव था. एम्स राजकोट में 2021 में एमबीबीएस का पहला बैच शुरू कर दिया गया. लेकिन क्या पर्याप्त संख्या में लेक्चर रूम, थियेटर और अध्यापक थे? बिल्कुल नहीं. रिपोर्ट में बताया गया कि मेडिकल फैकल्टी के कुल 183 पद स्वीकृत हैं जबकि मात्र 15 पद ही भरे गये हैं. ग़ैर-शिक्षक कर्मचारियों के 900 पद स्वीकृत हैं जिनमें से मात्र 9 पद भरे गये हैं। ये आंकड़े मार्च 2021 के हैं और एम्स राजकोट की वार्षिक रिपोर्ट से लिए गये हैं.

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के ससुर को विश्वविद्यालय का कुलपति
छत्तीसगढ़ राज्य में अब 76 फीसदी आरक्षण, विधानसभा में सर्वसम
दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में उमर खालिद और खालिद सैफी ब
छत्तीसगढ़ राज्य में अब 76 फीसदी आरक्षण, विधानसभा में सर्वसम
तमाशा बनाया दिया, किसी का भी घर बुलडोजर से तोड़ देंगे?“ पटन
उपराष्ट्रपति बोले- सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी एक्ट रद्द कर
जमीयत ने दलित मुस्लिम-ईसाइयों को एससी का दर्जा दिलाने के
गवर्नर प्रतिष्ठा का पद, हमें गुण वाले लोगों की जरूरत, उद्ध
गुजरात में पहले फेज में 62.89 फीसदी वोटिंग, पिछली बार से 5.49 फी
शिकारा हाउसबोट की मरम्मत पर प्रतिबंध के चलते मालिकों के
जेएनयू की दीवारों पर लिखा- ब्राह्मणों भारत छोड़ो, ब्राह्म
क्रूड ऑयल सस्ता होने एटीएफ के तो दाम में कटौती, पर पेट्रोल
बीजेपी सरकार अपनी हद में रहे, सपा सरकार बनने के बाद लिया ज
पंजाब के सीएम भगवंत मान के घर के बाहर ट्रेड यूनियनों का प्
अर्नगल फैसला : पहली से आठवीं कक्षा तक अल्पसंख्यक छात्रों
बिलकिस बानो ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, गैंगरेप
सुप्रीम कोर्ट में डीएमके का हलफनामा, नागरिकता संशोधन क़ान
पांच साल में 721 फीसदी बढ़ी गृह मंत्री हर्ष सांघवी की संपत्त
तानाशाही की ओर कई देश... भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में
बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे का जर्जर गुजरात मॉडल
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper