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जब देश लाशें गिन गिन के थक चुका तब पीएम मोदी ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां

Published On :    31 May 2021   By : MN Staff
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इसके उलट मोदी जी ने कहा कि ऑक्सीजन पर हमने कमाल कर दिया 900 टन उत्पादन करने थे, 9500 टन उत्पादन करने लगे हैं, ये बात क्या राहुल वोहरा से कह पाएंगे. वो तो चला गया... बिन ऑक्सीजन



नई दिल्ली: बीते 25 अप्रैल को जब पीएम मोदी ने मन की बात में देश को संबोधित किया था तो रोजाना कोरोना से करीब दो से तीन हजार के करीब मौतें और लगभग साढ़े तीन लाख के आसपास केस आ रहे थे. तब से  आम लोगों को इतने गहरे घाव लग चुके हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी दर्द महसूस करेंगी. ऐसे में प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वो 30 की मई की बात में इस दर्द के कारण और निवारण पर कुछ बात करेंगे, लेकिन इस पर कुछ बात करने के बजाए उन्होंने अपनी सात साल कि उपलब्धियां ही गिनानी शुरू कर दीं.


सवाल यह है कि भले ही सरकार के सात साल पूरे हुए हो, लेकिन क्या वाकई ये मौका अपनी उपलब्धियां गिनाने का था? जब देश लाशें गिनते.गिनते थक चुका है, आंसू अभी सूखे नहीं हैं, मौतें अभी थमी नहीं हैं, अगर कोई भ्रम में था कि सरकार को सेकंड वेव के लिए कम तैयारियों का मलाल होगा तो मन की बात को सुन कर टूट गया होगा. ऑक्सीजन की कमी से घुटते मरीज, एक एक इंजेक्शन के लिए तरसते मरीजों के घरवाले, अस्पताल के बाहर इस इंतजार में खड़ा मरीज कि अंदर कोई मरे तो एक बेड मिलेगा, गंगा में बहती लाशें इन सब पर मन की बात में एक शब्द नहीं, क्या वाकई पीएम के मन में ये बातें नहीं आतीं?


इसके उलट मोदी जी ने कहा कि ऑक्सीजन पर हमने कमाल कर दिया 900 टन उत्पादन करने थे, 9500 टन उत्पादन करने लगे हैं, ये बात क्या राहुल वोहरा से कह पाएंगे. वो तो चला गया... बिन ऑक्सीजन. गोवा के जीएमसी में कई दिन तक रोज बिन ऑक्सीजन मरने वाले मरीजों के परिवारों को बता पाएंगे दिल्ली के बत्रा, गंगाराम और जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए छटपटाते मरीजों को कह पाएंगे.


मोदी जी ने कह तो दिया कि पहली वेव में भी हमने पूरे हौसले के साथ लड़ाई लड़ी थी. इस बार भी भारत विजय होगा, लेकिन सच तो ये है कि लाखों परिवारों को मिलाकर करोड़ों लोगों के लिए ये लड़ाई खत्म हो चुकी है, वो हार चुके हैं, उनका परिवार तबाह हो चुका, उन्हें इलाज बजाए मौत मिली, बहुतों को मौत के बाद सम्मान तक नसीब नहीं हुआ. मोदी सरकार ने सात साल में क्या कमाल का काम किया है, इन परिवारों को ये सुनकर कैसा लगेगा. ये बात पीएम के मन में एक बार भी नहीं आई?


पीएम ने बताया कि देश दूसरी लहर से बड़ी बहादुरी से लड़ रहा है, कोई टैंकर से ऑक्सीजन पहुंचा रहा है, कोई विदेश से टैंकर ला रहा है, लेकिन सरकार ने क्या किया, पीएम के मन में एक बार भी नहीं आया कि देश से माफी मांगें कि फरवरी में कोरोना पर विजय का उद्घोष कर मैंने गलती की थी. क्या वाकई में पीएम के मन में एक बार भी ये बात नहीं आई कि उनका जीत के भ्रम में जीना हजारों लोगों के लिए मौत बन गया. इस भ्रम में नहीं होते तो वैक्सीन देने आ रही कंपनियों को तब वापस नहीं करते.


पीएम ने कहा कि वैक्सीन से हम कोरोना को हरा सकते हैं, लेकिन ये नहीं बताया कि वैक्सीन आएगी कहां से. स्वास्थ्य मंत्रालय दिसंबर तक 216 करोड़ डोज वैक्सीन लाने लाने की बात कह रहा है,अगर ये वीके पॉल साहब के गणित पर आधारित है क्योंकि और कोई हिसाब तो देश के सामने रखा नहीं गया. तो वो गड़बड़ गणित है, जो वैक्सीनें अभी फेज एक दो ट्रायल पर हैं उनकी कितनी सप्लाई होगी. ये भी जोड़ लिया गया है, नंबर किसने बताया है, कंपनी से वैक्सीन नहीं मिली तो कंपनी जबाबदार, क्या हमने कंपनी को चुना था?


मन की बात सुन कर मन में आशंका उठती है कि क्या इस दुष्काल के बाद भी सरकार अपने उसी एजेंडे पर है जब पीएम कहते हैं कि 7 साल में वो कर दिखाया जो 70 साल में नहीं हुआ. पीएम ने मन की बात में राम मंदिर और जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने को अपनी अपनी उपलब्धि बताया, कोरोना महामारी में ऑक्सीजन, बेड, एम्बुलेंस, दवा और वेंटिलेटर के अभाव में जीन लोगों ने अपनी जान गवाई उनके बारे में या देश के कोरोना से जो तीन लाख से ज्यादा मौतें हुई उस पर एक शब्द भी नहीं बोले?


पीएम जब कहते हैं कि 7 साल में बड़ी कामयाबियां मिलीं कई परीक्षाएं आईं कोरोना भी एक परीक्षा है जिससे हमें निकलना है तो लगता है कि सारा बोझ हमारे ही कंधों पर डाल रहे हैं क्या वाकई भ्रम है कि पीएम के मन की ये बात पब्लिक के मन को टीस नहीं पहुंचाएगी? ये परीक्षा सरकार की थी, फेल सरकार हुई है.
 



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