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यूपी के अगले विधानसभा चुनाव के लिए संघ की बैठक में बनी रणनीति, पीएम मोदी के नाम का नहीं होगा इस्तेमाल

Published On :    9 Jun 2021   By : MN Staff
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अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है. ऐसे में यूपी के अगले विधानसभा चुनाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूर रखने का फैसला भाजपा और संघ की बैठक में लिया गया है.



नई दिल्ली : अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है. ऐसे में यूपी के अगले विधानसभा चुनाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूर रखने का फैसला भाजपा और संघ की बैठक में लिया गया है. यानी यूपी के विधानसभा चुनाव में उनके नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. आरएसएस की दिल्ली की बैठक में यूपी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ने का फैसला लिया गया है.


संघ का मानना है कि क्षेत्रीय नेताओं के मुकाबले प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे को सामने रखने से उनकी छवि को नुकसान हुआ है. विरोधी बेवजह उन्हें निशाना बनाते हैं. हालांकि संघ की यह बात आधी सच लग रही है. सच्चाई यह है की जब से केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आई है तब से भारत कई क्षेत्र में पिछड़ गया है. 


देश में गरीबी, रोजगार, भुकमरी, कुपोषण, किसान आत्महत्या, महंगाई, पेट्रोल डीजल के बढते दाम और अल्पसंख्यकों पर बढ़ता अत्याचार की वजह से सभी वर्ग मोदी सरकार से नाखूष है. विधानसभा चुनाव में उनका यह गुस्सा वोट के रूप में फुट सकता है. इसलिए विधानसभा चुनाव में उनके नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.


आरएसएस की दिल्ली में हुई बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में ये निर्णय लिए गए हैं. संघ नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में ममता बनाम मोदी की रणनीति से नुकसान हुआ. 



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इसमें चुनाव हारने से ज्यादा अहम यह है कि राजनीतिक विरोधियों को प्रधानमंत्री मोदी पर बार-बार हमला करने का मौका मिला. इससे पहले भी बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के खिलाफ और फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी इस रणनीति से कोई फायदा नहीं हुआ.


इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी की इमेज मुसलमान विरोधी बनाने की रणनीति अपनाई. इससे मुसलमान वोटर एकजुट हो गए और मुसलमानों ने तृणमूल कांग्रेस को वोट देकर चुनाव नतीजों को एकतरफा कर दिया. उत्तरप्रदेश में भी मुसलमान आबादी करीब 75 सीटों पर असर डाल सकते हैं. यूपी में भी मोदी को चेहरा बनाने पर सपा और बसपा फिर से मुसलमानों को एकजुट करने में कामयाब हो सकती हैं.


सूत्रों की बात मानी जाए तो बैठक में कहा गया कि पूर्वी उत्तरप्रदेश में योगी की इमेज मुसलमान विरोधी नहीं है. मुख्यमंत्री बनने से पहले तक योगी आदित्यनाथ मंदिर के महंत के तौर पर स्थानीय मुसलमानों के विवाद मंदिर में बैठकर सुलझाते रहे हैं. एक और अहम बात पर गंभीरता से विचार किया गया है कि इस बार यूपी के विधानसभा चुनावों मे बीजेपी मुस्लिम उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारे.



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इससे उसकी मुस्लिम विरोधी छवि बनाने का मौका विरोधियों को नहीं मिलेगा. इस पर अंतिम फैसला पार्टी को करना है. पिछले चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था.


संघ के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक मोदी-योगी के बीच कोई विवाद नहीं है और यूपी भाजपा के ट्विटर अकाउंट से मोदी की फोटो हटाने की वजह विधानसभा चुनाव योगी के चेहरे के साथ लड़ने का निर्णय ही है. दोनों नेताओं को साथ काम करने और इस छवि को मजबूत करने के लिए कहा गया है. इसलिए अब यूपी के पोस्टर पर योगी आदित्यनाथ के अलावा यूपी भाजपा के अध्यक्ष और दोनों उपमुख्यमंत्री दिखाई देंगे. शायद इसीलिए सोमवार शाम प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश को देखते हुए योगी की फोटो जारी की गई है.


दो दिन चली बैठक में सरसंघचालक सिर्फ एक दिन के लिए ही रहे और वे नागपुर से दिल्ली आकर फिर नागपुर लौट गए. संघ की इस बैठक में क्षेत्रीय मुख्यालयों के प्रभारी और अन्य जिम्मेदारियों पर भी निर्णय किए गए हैं. इसमें सबसे अहम सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का मुख्यालय नागपुर के बजाय लखनऊ होगा। पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत के बीच समन्वय का काम देखेंगे और दिल्ली में रहेंगे.


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