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बांदा कृषि विवि में नियुक्ति को लेकर मचा बवाल, 15 नियुक्ति में 11 एक ही जाति के

Published On :    10 Jun 2021   By : MN Staff
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उत्तर प्रदेश में जब सपा का शासन था और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा के नेता आरोप लगाते थे कि यूपी में सरकार आंख मूंदकर यादव लोगों की भर्तियां कर रही है. लेकिन अब यही योगी सरकार में भी हो रहा है.



बांदा : उत्तर प्रदेश में जब सपा का शासन था और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा के नेता आरोप लगाते थे कि यूपी में सरकार आंख मूंदकर यादव लोगों की भर्तियां कर रही है. लेकिन अब यही योगी सरकार में भी हो रहा है. आरोप है कि बांदा कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की जो नियुक्तियां हुई हैं, उसमें सामान्य जाति के कोटे में ठाकुर अभ्यर्थियों का ही सिलेक्शन किया गया है.


चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तर प्रदेश में एक नया विवाद सिर उठाने लगा है. बांदा कृषि विवि में नियुक्तियों को लेकर एक ऐसा किस्सा सामने आया है की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 15 नियुक्ति में एक ही जाति के 11 उम्मीदवार की नियुक्ति कर दी. सरकार के इस कदम से खूद बीजेपी का एक धड़ा इस कदर खफा हुआ कि सीधे पीएम को खत लिख दखल की गुहार कर दी. कहा जा रहा है कि सरकार के इस कदम से तमाम वर्ग नाराज तो होंगे ही. चुनाव सिर पर हैं तो बीजेपी को खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है.


दरअसल, जो विवाद खड़ा हुआ है वो बांदा कृषि विवि में नियुक्तियों को लेकर है. यहां 15 प्रोफेसरों का चयन सरकार ने किया. यहां तक तो कोई परेशानी नहीं, लेकिन लिस्ट को बारीकी से देखें तो इनमें से 11 एक ही जाति यानि ठाकुर हैं. महकमे के मंत्री भी ठाकुर हैं. लिहाजा सवाल तो खड़े होंगे ही. बीजेपी खुद को सभी वर्गों की पार्टी बताती है. दूसरे वर्ग इसे लेकर बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं. उनका कहना है कि मंत्री ने अपने चहेतों को मनमाफिक नियुक्ति दिलवा दी.



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इस मामले में बांदा कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से बताया गया कि प्रोफेसर पद पर यह नियुक्ति इंटरव्यू के आधार पर की गई है. इसके लिए पहले विज्ञापन निकाला गया. यह विज्ञापन अखबारों के अलावा रोजगार समाचार पत्रों में भी छपे थे. इसके बाद जितने एप्लीकेशन आए, उनकी स्क्रीनिंग की गई. स्क्रीनिंग के बाद एक पोस्ट के लिए अधिकतम 10 उम्मीदवारों को सिलेक्ट किया गया. 


इंटरव्यू का 3 चरण होता है. पहले चरण में एकेडमिक प्रोफाइल देखी गई. दूसरे चरण में अभ्यर्थियों के टीचिंग स्केल के लिए प्रेजेंटेशन देखा जाता है और फिर इंटरव्यू किया जाता है. इसके लिए के लिए अलग-अलग नंबर निर्धारित किया गया. एकेडमिक प्रोफाइल के लिए 70 नंबर, इंटरव्यू के लिए 20 और टीचिंग स्केल के लिए 10 नंबर निर्धारित था. कुल 100 नंबरों में से ही अधिकतम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन हुआ है.


बांदा कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर्स की इन नियुक्तियों के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। 5 सदस्यों की इस कमेटी में विश्वविद्यालय के कुलपति/ चेयरमैन, हर विषय के लिए उस विषय के हेड ऑफ डिपार्टमेंट, डीन और राज्यपाल की तरफ से सिलेक्टेड 5 प्रोफेसर में से 2 को रखा गया था. इसी कमेटी ने इन 15 प्रोफेसर की नियुक्ति की है.



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उधऱ, बीजेपी नेता बृजेश कुमार प्रजापति ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि नियुक्तियों में आरक्षण से जुड़े नियमों की सरेआम अवहेलना की गई. उनकी मांग है कि इससे जुड़े विज्ञापन को निरस्त करके फिर से प्रक्रिया शुरू की जाए. उनका कहना है कि इससे लोगों के बीच गलत संदेश जा रहा है. सरकार को चाहिए कि वो फिर से विज्ञापन निकाल सही तरीके से भर्तियां करे.



सोशल मीडिया पर यूपी सरकार का ये कदम चर्चा का विषय बना हुआ है. नवीन कुमार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, यूपी में टैलेंट का गजब विस्फोट हुआ है. बांदा कृषि विश्वविद्यालय में 15 प्रोफेसर की नियुक्ति हुई. 11 एक ही जाति के. प्रोफेसर से लेकर एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर तक. अब सवर्णों में जूतम पैजार शुरू है. पंडित जी लोग बिफरे हुए हैं. ई सब ना चलबे.


उनका कहना है कि बीजेपी वाले अपनी ही सरकार की बखिया उधेड़े हुए हैं. ना भाई ना. आपका हिस्सा दलितों पिछड़ों आदिवासियों ने नहीं मारा. ठाकुर मंत्री से पूछो जिनके महकमे का मामला है. मुस्की मारके पूछ रहे हैं ऐसा है क्या? जातिवाद से नफरत करने वालो जागो. धीरज ने लिखा- यथा राजा तथा प्रजा. वहीं एम अकबर कादरी ने हैरत जताते हुए पोस्ट किया-बाप रे. संजय शर्मा का कहना है कि ये सच्चाई है तो विश्वेस ने लिखा- आखिर स्वयंभू जन्मजात प्रतिभावान एंटीना धारी खतरे में है तो अब हिंदू खतरे में होगा ही


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