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भारत में कोरोना से लगभग 50 लाख मौतें, सरकार के आंकड़ों से 10 गुना ज्यादा, अमेरिकी रिपोर्ट में दावा

Published On :    21 Jul 2021   By : MN Staff
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान देश की चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं, ऑक्सीजन की कमी, समय पर बेड और एंबुलेंस न मिलने और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के चलते लाखों लोगों को अपनी जान गवानी पडी.



नई दिल्ली : कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान देश की चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं, ऑक्सीजन की कमी, समय पर बेड और एंबुलेंस न मिलने और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के चलते लाखों लोगों को अपनी जान गवानी पडी. कई राज्यों पर तो कोरोना मृतकों के आंकड़े भी छिपाने का आरोप लगा है. 


भारत में सरकारी आंकड़ों के हिसाब से लगभग चार लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं. लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. इसमें 10 गुना ज्यादा मौत होने का दावा किया गया है. अमेरिकी शोध समूह की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में कोरोना से 34 से 47 लाख मौतें हुई हैं. जो केंद्र सरकार के आंकड़ों से 10 गुना ज्यादा है.


स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक कोरोना से 4,14,482 लोगों की मौत हुई है, जो दुनिया में तीसरे नंबर पर है. जबकि, अमेरिका में 609000 और ब्राजील में 542000 मौतें हुई हैं. अमेरिकी स्टडी ग्रुप सेंटर ऑफ ग्लोबल डिवेलपमेंट की रिपोर्ट में जो दावा किया गया है, वह अब तक का सबसे ज्यादा है. जो किसी भी संगठन की ओर से बताया गया है.


शोधकर्ताओं के मुताबिक वास्तव में मौतों का आंकड़ा कई मिलियन हो सकता है. अगर इस आंकड़े को देखा जाए तो भारत में आजादी और विभाजन के बाद से यह सबसे बड़ी त्रासदी है. सेंटर ने अपनी स्टडी के तहत कोरोना के दौर में हुई मौतों और उससे पहले के सालों में गई जानों के आंकड़े का विश्लेषण किया है. इसके आधार पर ही सेंटर ने 2020 से 2021 के दौरान मौतों का आंकड़ा निकाला है और उसे कोरोना से जोड़ते हुए सरकार के आंकड़ों पर प्रश्न उठाया है.


सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट स्टडी की तरफ से जारी रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय अनुमानों, सेरोलॉजिकल रिपोर्टों और घरों में हुए सर्वे को आधार बनाया गया है. इस रिपोर्ट की विशेष बात है कि इस रिपोर्ट के ऑथरों में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम भी शामिल हैं. शोधकर्ताओं का दावा है कि कोरोना से मृतकों की वास्तविक संख्या कुछ हजार या लाख नहीं दसियों लाख है.


रिपोर्ट में भारत में मौतों के अनुमानों की तीन रूपरेखा तैयार की है. ये सभी भारत में मौत के आधिकारिक आंकड़े चार लाख से 10 गुना ज्यादा होने की ओर इशारा करते हैं. यहां तक कि अध्ययन में उल्लिखित एक मध्यम अनुमान के अनुसार, सात राज्यों से राज्य-स्तरीय नागरिक पंजीकरण के आधार पर 34 लाख अतिरिक्त मौतों को सूचित करता है. दूसरी गणना में भारतीय सीरो सर्वे के आंकड़ों को आधार पर आयु-विशिष्ट संक्रमण मृत्यु दर के अंतर्राष्ट्रीय अनुमानों को लागू करने से लगभग 40 लाख मौत का आंकड़ा सामने आता है.



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रिपोर्ट में तीसरी गणना, उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण के विश्लेषण के आधार पर आधारित है. इसमें एक देशांतरीय पैनल ने सभी राज्यों में 8,00,000 से अधिक व्यक्तियों की मौतों का अनुमान लगाया है, जिससे यह अनुमान 49 लाख से अधिक मौतों का होता है. हालांकि शोधकर्ता यह स्वीकार करते हैं कि सांख्यिकीय आकलन के साथ कोविड-मृत्यु का अनुमान लगाना आंकड़ों को भटकाने वाला साबित हो सकता है, रिपोर्ट में कहा गया है कि मौत का आंकड़ा आधिकारिक गणना से अधिक परिमाण का एक क्रम होने की संभावना है और सैकड़ों हजारों के बजाय अब तक लाखों लोग मर गए होंगे.


बता दें कि इसके पहले अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘द इकॉनमिस्ट’ ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत में कोरोना से मौत का वास्तविक आँकड़ा 5-7 गुना अधिक होगा. हालांकि सरकार ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया था. पत्रिका ने वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लेफ़लर के एक शोध का हवाला दिया था जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि भारत में मौत का वास्तविक आंकड़ा 20 लाख से ज्यादा हो सकता है.


बताते चले कि जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब देश में रोजाना मृतकों का आंकड़ा तीन से पांच हजार के बीच पहुंच गया था. इतनी ज्यादा मौते हो रही थी की कई राज्यों में श्मशान घाटों पर लाशों की लंबी कतारे देखी गई. जिसके चलते परिजनों को मृतक का दाह संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा था. यही नहीं तो यूपी और बिहार में कई लोगों ने मृतकों के शव गंगा नदी के किनारे रेत में दफनाए.


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