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केंद्र सरकार इस बार भी नहीं करेगी ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना

Published On :    21 Jul 2021   By : MN Staff
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पिछले कई सालों से बामसेफ संगठन सहित की कई संगठनाएं ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना करने की मांग कर रही है.खारतौर पर देशभर के ओबीसी संगठनों की मांग है कि उनकी जातिनिहाय जनगणना कि जाए.



नई दिल्ली : पिछले कई सालों से बामसेफ संगठन सहित की कई संगठनाएं ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना करने की मांग कर रही है.खारतौर पर देशभर के ओबीसी संगठनों की मांग है कि उनकी जातिनिहाय जनगणना कि जाए. लेकिन सरकार हर यह कह कर इनकार कर देती है कि हम जातिवादी गणना नहीं करेंगे. अब सरकारने साफ कर दिया है कि आनेवाली जनगणना में ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना नहीं करेंगे. 


गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य आबादी पर जातिवाद गणना नहीं कराएगी. गृह मंत्रालय ने कहा कि ऐसा निर्णय नीतिगत फैसले के तहत किया गया है.  


इससे पहले महाराष्ट्र, उड़ीसा और बिहार के राज्य सरकारों ने आगामी आम जनगणना की जाति विवरण एकत्र करने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों और अन्य पिछड़ा वर्गों का भी गणना करने का अनुरोध किया था. राज्य सरकारों का तर्क था कि इस जनगणना के आधार पर इन समुदायों के लिए कल्याणकारी योजना बनाई जा सकती है.


उड़ीसा सरकार ने पत्र लिखकर केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि 1931 के बाद जातीय जनगणना का विवरण नहीं है. राज्यों ने कहा था, इन समुदायों के लिए योजना बनाने में परेशानी महसूस की जाती है. राज्य सरकार ने केंद्र को सूचित किया था कि इन डेटा के माध्यम से समावेशी विकास का लक्ष्य रखा जा सकता है.



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लोकसभा में गृह मंत्रालय ने बताया कि भारत सरकार ने नीति के तहत आम जनगणना में पिछड़े और अन्य पिछड़े वर्गों के जातियों को शामिल नहीं करने का निर्णय लिया है. इससे पहले मार्च में सरकार ने संसद में बयान दिया था कि 2011 में किए गए जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए जाएंगे.



बता दें कि केंद्र सरकार अनुसूचीत जाति और अनुसूचित जनजाति की जातिगत आधार पर जनगणना करती है. इन दोनो समूह में एससी को 15 फीसदी और एसटी को 7.5 फीसदी यानी कुल 22.5 फीसदी आरक्षण है.सवाल यह है की जब सरकार एससी और एसटी की जाति के आधार पर जनगणना करती है तो ओबीसी की जाति के आधार पर जनगणना करने में क्या दिक्कत है? इसके पीछे का असली कारण यह है की यदि सरकार ने ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना की तो पता चल जाएगा की कितने लोग पढे है, कितने नौकरी करते है. 


इसके बाद उन्हें शासन प्रशासन में प्रतिनिधित्व देना होगा. इससे यह होगा की जिन पदों पर सामान्य वर्ग के लोगों ने कब्जा किया हुआ है वह सीधे ओबीसी को मिलेगा. इससे सवर्ण को बड़ा नुकसान होगा. यह नहीं होना चाहिए इसलिए केंद्र सरकार ओबीसी की जातिगत आधार पर जनगणना का हर बार विरोध करती है.


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