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अमेरिका में ब्राह्मणी विचारधारा के खिलाफ हुए सम्मेलन पर बरपा हंगामा?

Published On :    14 Sep 2021   By : MN Staff
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अमेरिका में ब्राह्मणी विचारधारा के खिलाफ 10-12 सितंबर के बीच डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व नाम से एक वर्चुअल सम्मेलन हंगामे के बीच समाप्त हो गया है.



नई दिल्ली : अमेरिका में ब्राह्मणी विचारधारा के खिलाफ 10-12 सितंबर के बीच डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व नाम से एक वर्चुअल सम्मेलन हंगामे के बीच समाप्त हो गया है. इस कॉन्फ्रेंस में हिंदुत्व को नफ़रत से प्रेरित विचारधारा बताया गया. सम्मेलन के आयोजकों का कहना है कि इसका विरोध करने वालों ने उनकी आवाज़ दबाने और पैनल में शामिल अकादमिक जगत के लोगों को डराने की कोशिश की.सम्मेलन को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के 53 विश्वविद्यालयों के 70 से अधिक केंद्रों, इंस्टीट्यूट्स और अकादमिक विभागों का समर्थन प्राप्त था.


सम्मेलन के आयोजकों में शामिल प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर ज्ञान प्रकाश ने बीबीसी को बताया, सम्मेलन का मक़सद भारत के जो अलग-अलग धर्म हैं, उन पर हिंदुत्व का क्या असर हो रहा है, इस पर सम्मेलन के दौरान चर्चा की गई. हमने ये समझने की कोशिश की है कि ग्लोबल स्तर पर इसका क्या असर हो रहा है.


ज्ञान प्रकाश कहते हैं, प्रोफ़ेसर क्रिस्टोफर जैफरो ने अपने पेपर में ये बताया कि कैसे और क्यों हिंदुत्व 1995 के बाद वैश्विक स्तर पर बढ़ गया. हमने इस बात पर भी चर्चा की है कि कैसे हिंदुत्व विज्ञान के खिलाफ एजेंडा चला रहा है. सोशल मीडिया पर इस सम्मेलन का ज़बरदस्त विरोध हुआ है. आयोजकों का दावा है कि  इस सम्मेलन में शामिल विश्वविद्यालयों के सर्वर जाम कर दिए. भारत के अलावा अमेरिका में रह रहे हिंदू समूहों ने भी इस सम्मेलन का ज़बरदस्त विरोध किया. 


हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन ने इस सम्मेलन के खिलाफ़ एक व्यापक अभियान चलाया. इसके विरोध की वजह बताते हुए एचएएफ़ की संस्थापक सुहाग शुक्ला ने बीबीसी से कहा, ये कार्यकर्ता हिंदुओं के खिलाफ अपना नफ़रत भरा एजेंडा दशकों से चला रहे हैं.



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ज्ञान प्रकाश कहते हैं, हमें ये अंदेशा था कि इस सम्मेलन का विरोध होगा लेकिन ये लोग इतने डर जाएंगे, ये हमने नहीं सोचा था. हमारे पैनल में शामिल कई लोगों को धमकी भरे संदेश मिले हैं. ट्विटर, फोन और ईमेल पर उन्हें धमकिया दी गई हैं. सम्मेलन में शामिल कुछ शिक्षाविद धमकियों की वजह से पीछे हटे हैं.


विपक्षी विचारधारा के शिक्षाविदों को शामिल न करने के सवाल पर ज्ञान प्रकाश कहते हैं, हमारे सम्मेलन का उद्देश्य हिंदुत्व पर चर्चा करना और इसके बारे में लोगों में जागरूकता लाना था. ये हिंदुत्व के मुद्दे पर अकादमिक चर्चा थी. इसलिए हमने दूसरे पक्ष को शामिल नहीं किया क्योंकि हम उनके एजेंडे को पहले से ही जानते हैं.


ज्ञान प्रकाश कहते हैं, हम हिंदुत्व और हिंदू धर्म को एक नहीं मानते हैं. ये दोनों अलग-अलग हैं. हिंदुत्व एक राजनीतिक आंदोलन है जबकि हिंदू धर्म इससे बिलकुल अलग है. हिंदुत्व के समर्थक हमेशा ये कहने की कोशिश करते हैं कि हिंदुत्व ही हिंदू धर्म है. लेकिन वास्तव में ये बिलकुल अलग-अलग हैं. वैश्विक स्तर पर भी ये लोग ये कहने की कोशिश करते हैं कि हिंदुत्व ही हिंदू धर्म है.



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वहीं ज्ञान प्रकाश के इस तर्क को ख़ारिज करते हुए विजय पटेल कहते हैं, ये लोग मुसलमानों के खिलाफ हुए कुछ अपराधों की वजह से समूचे हिंदू समाज को एक रंग में रंगना चाहते हैं लेकिन इस तरह के अपराध तो हिंदुओं के खिलाफ़ भी हुए हैं. इस पर ज्ञान प्रकाश कहते हैं, हिंदुत्व भारत के मुसलमानों, अनु.जातियों और महिलाओं के खिलाफ है. हम हिंदुत्व की आलोचना कर रहे हैं, भारत की नहीं. बहुत लोग हिंदुत्व के बारे में नहीं जानते हैं. विद्वान तो जानते हैं लेकिन आम लोग नहीं जानते हैं. हम ये कोशिश कर रहे हैं कि आम लोगों को भी इस विचारधारा के बारे में पता चले. हिंदुत्व अब यूरोप और अमेरिका में भी फैलने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में यहां भी इसके बारे में लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है.


प्रकाश कहते हैं, हमारे यूनिवर्सिटी में भी ये लोग जड़े जमाने की कोशिश कर रहे हैं. ये लोग तर्क देते हैं कि भारत का मतलब हिंदू और हिंदू का मतलब है हिंदुत्व. हमारा मानना है कि हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है ये विचारधारा जातिवाद पर चलती है, ये ब्राह्मणों को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं.


ज्ञान प्रकाश कहते हैं, हिंदुत्व से जुड़े लोग चाहते हैं कि उन पर कोई चर्चा ही ना हो. भारत और हिंदुत्व एक चीज़ नहीं है. भारत एक विविध संस्कृति वाला देश है. हिंदुत्व एक कट्टरवादी राजनीतिक विचारधारा है. अब हमने ये तय किया है कि हम ना सिर्फ ये सम्मेलन कर रहे हैं बल्कि आगे भी इसे चलाए रखेंगे.



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