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कोरोना ने बढ़ाई बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याए, दुनिया का हर सातवां बच्चा पीड़ित, यूनिसेफ की रिपोर्ट का खुलासा

Published On :    6 Oct 2021   By : MN Staff
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निया का हर सातवां बच्चा मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहा है. ऊपर से कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने उनकी समस्या और बढ़ा दी. जिस पर यूनिसेफ ने गहरी चिंता जताई है



नई दिल्ली : यूनिसेफ की वैश्विक रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2021- ऑन माई माइंड, प्रमोटिंग, प्रोटेक्टिंग एंड केयरिंग फॉर चिल्ड्रन मेंटल हेल्थ’ में खुलासा हुआ है कि दुनिया का हर सातवां बच्चा मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहा है. ऊपर से कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने उनकी समस्या और बढ़ा दी. जिस पर यूनिसेफ ने गहरी चिंता जताई है. यूनिसेफ का दावा है कि कोरोना महामारी ने बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को और बढ़ा दिया है. इसे गंभीरता से लेकर बच्चों की मदद करनी चाहिए. ये इसलिए भी है कि वैसे भी वैश्विक स्तर पर हर 7 में से एक बच्चे को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं.


यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ यास्मीन अली हक ने कहा कि हमने यह पाया है कि समस्याएं होने के बावजूद बच्चे इसके बारे में बात करने में सहज नहीं होते हैं और इसपर चर्चा नहीं करते. उन्होंने कहा, हमें बच्चों, वयस्कों और युवाओं को उनकी चिंता, अवसाद और बुरे विचारों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि हम उनकी मदद कर सकें। इस समस्या को दूर करना एक बहुत बड़ा मुद्दा है. रिपोर्ट को जारी करने के मौके पर डॉ यास्मीन अली हक ने कहा कि कोविड महामारी ने बच्चों को बहुत ज्यादा झेलाया है, वे शिक्षा और खेल से दूर होकर घरों में बंद हो गये. जिससे उन्हें मानसिक समस्याएं हुईं, इस समस्या को हम जितना समझ रहे हैं, यह उससे बहुत बड़ी है.

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‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने कहा कि बच्चों, युवाओं, माता-पिता और देखभाल करने वालों की एक पूरी पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोविड महामारी ने भी बहुत बड़ी चिंता पैदा कर दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बच्चे उदासी, दुख और चिंता से भरे हुए हैं. कुछ सोच रहे हैं कि ये दुनिया किस ओर जा रही है और इसमें उनका क्या स्थान है. दरअसल, बच्चों और युवाओं के लिए ये बेहद चुनौतीपूर्ण समय है और 2021 में उनकी दुनिया की यही स्थिति है. यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को भी पेश की.


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने यूनिसेफ की इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे जल्दी इन समस्याओं को पहचान सकें और बच्चों को उचित सलाह और इलाज मुहैया करवा सकें. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य की समझ को शामिल किया जाना भी एक बेहतर उपाय हो सकता है. मांडविया ने कहा कि बच्चों को मानसिक समस्याओं से उबरने में परिवार की सबसे अहम भूमिका होती है. परिवार किसी भी बच्चे का पहला स्कूल होता है लेकिन विगत वर्षों से परिवार सीमित हो गया है और परिजन आपस में बात भी नहीं करते, यह स्थिति बदलनी चाहिए ताकि बच्चों को मानसिक समस्याएं ना हों.


यूनिसेफ के मुताबिक भारत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन और महामारी से संबंधित मूवमेंट पर लगे प्रतिबंध की वजह से बच्चों ने अपने जीवन के पूरा एक साल परिवार, दोस्तों, कक्षाओं और खेल के मैदान से दूर बिताया. इसलिए महामारी का प्रभाव महत्वपूर्ण है और ये सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है. महामारी से पहले भी बहुत से बच्चे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार द्वारा बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है.


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