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एनएचआरसी को रोजाना मिलती हैं औसतन 228 शिकायतें, 20 हजार से अधिक केस विचाराधीन

Published On :    13 Oct 2021   By : MN Staff
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कानून के जरिए भेदभाव को भले ही खत्म किया गया हो, लेकिन यह आज भी जारी है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) को रोज औसतन 228 शिकायतें मिल रही हैं.



नई दिल्ली : कानून के जरिए भेदभाव को भले ही खत्म किया गया हो, लेकिन यह आज भी जारी है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) को रोज औसतन 228 शिकायतें मिल रही हैं. फिलहाल उसके समक्ष 20,806 मामले विचाराधीन हैं. आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. आयोग के समक्ष विचाराधीन 20,806 नए और पुराने मामलों में से 344 मामले पुलिस हिरासत में मौत के, 3407 मामले न्यायिक हिरासत में मौत के, 365 मामले पुलिस मुठभेड़ में मौत के हैं.


इसके अलावा, बंधुआ मजदूरों से संबंधित 290 शिकायतें, बच्चों से जुड़ी 336 शिकायतें, महिलाओं से संबंधित 1741 शिकायतें तथा एससी, एसटी एवं ओबीसी से जुड़ी 338 शिकायतें आयोग के समक्ष विचाराधीन हैं. अन्य श्रेणी के, मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के 13,985 मामले आयोग में विचाराधीन हैं.


बीते पांच वर्षाे में आयोग को कुल 4,16,232 शिकायतें प्राप्त हुई. इनमें से, साल 2016 में 96,627 शिकायतें, 2017 में 82,006, 2018 में 85,950, 2019 में 76,585 और 2020 में 75,064 शिकायतें आयोग को मिलीं. इस प्रकार आयोग को रोज औसतन 228 शिकायतें मिल रही हैं. एनएचआरसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में अब तक उसे 53,191 शिकायतें मिली हैं. पिछले महीने यानी सितंबर 2021 में उसे 10,627 नयी शिकायतें मिलीं. सितंबर में ही नयी और पुरानी 8,736 शिकायतों का निपटारा किया गया.


गौरतलब है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को किया गया था. आयोग मानवाधिकारों के हनन से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेता है, इसकी जांच करता है तथा पीड़ितों के लिए मुआवजे की सिफारिश करता है. इसके साथ ही आयोग मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ कानूनी उपाय भी करता है.



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मानवाधिकार आयोग भेदभाव तथा नस्लवादी और यौन-उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए एक निरूशुल्क, अनौपचारिक पूछताछ व शिकायत सेवा उपलब्ध कराता है. भेदभाव की घटना तब मानी जाती है जब समान परिस्थितियों के तहत किसी व्यक्ति के साथ अन्य लोगों की तुलना में अन्यायपूर्ण या कम स्वीकारात्मक तरीके से व्यवहार किया जाता है.


उधर एनएचआरसी के 28वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानवाधिकारों की व्याख्या करने वालों तथा उन्हें राजनीतिक नफा-नुकसान के तराजू से तौलने वालों की आलोचना की. पीएम ने कहा कि हाल के वर्षों में मानवाधिकार की व्याख्या कुछ लोग अपने-अपने तरीके से, अपने-अपने हितों को देखकर करने लगे हैं. उन्होंने कहा कि चयनित तरीके से आचरण करते हुए कुछ लोग मानव अधिकारों के हनन के नाम पर देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं.



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प्रधानमंत्री ने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया. हालांकि सत्तारूढ़ भाजपा मानवाधिकार समूहों के एक वर्ग की आलोचना करती रही है जिसमें वैश्विक मौजूदगी वाले समूह भी हैं. पार्टी का मानना है कि ये समूह कथित तौर पर सरकार को निशाना बनाने के लिए मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को चयनित तरीके से एवं एकतरफा ढंग से उठाते हैं. 


मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘मानवाधिकार का बहुत ज्यादा हनन तब होता है जब उसे राजनीतिक रंग दिया जाता है, राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, राजनीतिक नफा-नुकसान के तराजू से तौला जाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में देश ने अलग-अलग वर्गों में, अलग-अलग स्तर पर हो रहे अन्याय को भी दूर करने का प्रयास किया है. हालांकि आंकड़े कहते है कि पीड़ित वर्ग पर अन्याय को दूर करने के पीएम के बयान के बावजूद आयोग को भेदभाव की रोज 228 शिकायतें मिल रही है जो भेदभाव जारी रहने की तरफ इशारा करती है.



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